एयर इंडिया

हवाई सफर हुआ महँगा: एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस ने बढ़ाया फ्यूल सरचार्ज, घरेलू उड़ानों पर अब 400 से 1,200 रुपये तक अतिरिक्त शुल्क

नई दिल्ली,9 अक्टूबर (युआईटीवी)- मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और वैश्विक ऊर्जा बाजार में जारी उथल-पुथल का असर अब हवाई यात्रियों की जेब पर पड़ने लगा है। इंडिगो के बाद अब एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस ने भी घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए ईंधन अधिभार यानी फ्यूल सरचार्ज बढ़ाने का ऐलान किया है। विमानन ईंधन की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी के कारण एयरलाइंस की परिचालन लागत बढ़ गई है। इसी को देखते हुए दोनों कंपनियों ने यात्रियों से वसूले जाने वाले अतिरिक्त शुल्क में बदलाव किया है। नई व्यवस्था के तहत घरेलू उड़ानों के लिए दूरी के आधार पर 400 रुपये से लेकर 1,200 रुपये तक का फ्यूल सरचार्ज देना होगा,जबकि अंतर्राष्ट्रीय मार्गों पर यह शुल्क गंतव्य के अनुसार अलग-अलग निर्धारित किया गया है।

एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, नई दरें 9 अक्टूबर से की गई नई बुकिंग पर लागू होंगी। हालाँकि,दोनों एयरलाइंस के लिए नई व्यवस्था लागू होने का समय अलग-अलग रखा गया है। एयर इंडिया एक्सप्रेस की नई बुकिंग पर संशोधित सरचार्ज भारतीय मानक समय के अनुसार 9 अक्टूबर की रात 12 बजे से लागू होगा,जबकि एयर इंडिया की नई बुकिंग के लिए यह व्यवस्था उसी दिन सुबह 11 बजे से प्रभावी होगी। यात्रियों को टिकट बुक करते समय संबंधित उड़ान की दूरी और गंतव्य के आधार पर अतिरिक्त शुल्क का ध्यान रखना होगा।

एयर इंडिया ने फ्यूल सरचार्ज बढ़ाने के पीछे वैश्विक ऊर्जा बाजार में जारी दबाव और भू-राजनीतिक परिस्थितियों को प्रमुख कारण बताया है। एयरलाइन के मुताबिक, पिछले कुछ महीनों के दौरान अंतर्राष्ट्रीय घटनाक्रमों के कारण विमानन टरबाइन ईंधन की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। हालिया बढ़ोतरी ने विमानन कंपनियों की परिचालन लागत पर अतिरिक्त दबाव डाला है।

विमानन टरबाइन ईंधन, जिसे एटीएफ कहा जाता है,किसी भी एयरलाइन के कुल परिचालन खर्च का एक बड़ा हिस्सा होता है। विमानों को उड़ाने के लिए बड़ी मात्रा में ईंधन की जरूरत पड़ती है। ऐसे में इसकी कीमतों में थोड़ी-सी बढ़ोतरी भी एयरलाइंस के खर्च को काफी प्रभावित कर सकती है। जब ईंधन की लागत लगातार बढ़ती है,तो कंपनियों के लिए अपने मौजूदा किराये और परिचालन खर्च के बीच संतुलन बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।

मध्य पूर्व में जारी तनाव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार की अनिश्चितता को बढ़ाया है। इस क्षेत्र का अंतर्राष्ट्रीय तेल और ऊर्जा आपूर्ति व्यवस्था में महत्वपूर्ण स्थान है। यहाँ किसी भी बड़े घटनाक्रम का असर कच्चे तेल की कीमतों,आपूर्ति की परिस्थितियों और विमानन ईंधन की लागत पर पड़ सकता है। एयरलाइंस का कहना है कि बढ़ती लागत के प्रभाव को संभालने के लिए फ्यूल सरचार्ज में संशोधन करना जरूरी हो गया है।

एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस ने घरेलू उड़ानों के लिए एकतरफा यात्रा पर लगने वाले फ्यूल सरचार्ज को दूरी के अनुसार चार श्रेणियों में बाँटा है। इससे यात्रियों को अपनी यात्रा की लंबाई के आधार पर अतिरिक्त भुगतान करना होगा।

500 किलोमीटर तक की दूरी वाली घरेलू उड़ानों के लिए 400 रुपये का फ्यूल सरचार्ज निर्धारित किया गया है। वहीं,501 से 1,000 किलोमीटर तक की यात्रा करने वाले यात्रियों को 600 रुपये अतिरिक्त देने होंगे। 1,001 से 1,500 किलोमीटर की दूरी तय करने वाली उड़ानों के लिए यह शुल्क 850 रुपये होगा। इसके अलावा, 1,501 किलोमीटर से अधिक दूरी वाली घरेलू उड़ानों पर 1,200 रुपये का फ्यूल सरचार्ज लगेगा।

इस बदलाव का असर अलग-अलग शहरों के बीच यात्रा करने वाले यात्रियों पर उनकी उड़ान की दूरी के अनुसार पड़ेगा। कम दूरी की यात्रा करने वालों पर अपेक्षाकृत कम अतिरिक्त शुल्क लगेगा,जबकि लंबी दूरी की घरेलू उड़ानों के यात्रियों को अधिक भुगतान करना होगा। यात्रियों को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि फ्यूल सरचार्ज टिकट के मूल किराये से अलग होता है और टिकट की कुल कीमत में इसके अतिरिक्त अन्य लागू शुल्क भी शामिल हो सकते हैं।

एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस ने कुछ प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय मार्गों के लिए भी फ्यूल सरचार्ज में संशोधन किया है। नई दरों के अनुसार,उत्तरी अमेरिका जाने वाली उड़ानों के लिए सरचार्ज 215 डॉलर निर्धारित किया गया है। ऑस्ट्रेलिया के लिए यह शुल्क 210 डॉलर होगा। वहीं,ब्रिटेन सहित यूरोप जाने वाले यात्रियों को 135 डॉलर का फ्यूल सरचार्ज देना होगा।

पश्चिम एशिया और मध्य पूर्व के मार्गों पर यह शुल्क 55 डॉलर तय किया गया है। अंतर्राष्ट्रीय उड़ानों के लिए निर्धारित इन दरों से स्पष्ट है कि एयरलाइंस ने विभिन्न क्षेत्रों के लिए अलग-अलग शुल्क संरचना अपनाई है। यात्रियों को टिकट खरीदने से पहले अपने गंतव्य के अनुसार लागू सरचार्ज की जानकारी प्राप्त करनी चाहिए,क्योंकि इससे यात्रा की कुल लागत प्रभावित हो सकती है।

अंतरराष्ट्रीय यात्रा की योजना बना रहे लोगों के लिए यह बदलाव विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। परिवार के साथ विदेश जाने वाले यात्रियों,कारोबार के सिलसिले में यात्रा करने वाले लोगों और नियमित रूप से अंतर्राष्ट्रीय उड़ानों का इस्तेमाल करने वाले पेशेवरों के बजट पर अतिरिक्त शुल्क का असर पड़ सकता है।

एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस से पहले इंडिगो ने भी विमानन ईंधन की बढ़ती कीमतों के कारण अपने फ्यूल चार्ज में बदलाव किया था। कंपनी ने 6 अक्टूबर को रात 12 बजकर 1 मिनट से की गई नई बुकिंग पर संशोधित शुल्क लागू करने की घोषणा की थी। एयरलाइन के मुताबिक,पिछले महीने की तुलना में ईंधन की कीमतों में 14 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी हुई थी,जिससे एटीएफ की लागत पिछले एक दशक के ऊंचे स्तर पर पहुँच गई थी।

इंडिगो ने घरेलू उड़ानों के लिए दूरी के आधार पर अलग-अलग शुल्क निर्धारित किए हैं। 500 किलोमीटर तक की यात्रा के लिए 375 रुपये का फ्यूल चार्ज तय किया गया। 501 से 1,000 किलोमीटर की उड़ानों के लिए यह शुल्क 600 रुपये,जबकि 1,001 से 1,500 किलोमीटर की उड़ानों के लिए 900 रुपये रखा गया।

इसके अलावा, 1,501 से 2,000 किलोमीटर की यात्रा पर 1,150 रुपये और 2,000 किलोमीटर से अधिक दूरी वाली उड़ानों पर 1,300 रुपये का फ्यूल चार्ज निर्धारित किया गया है। इस तरह इंडिगो की घरेलू उड़ानों पर भी यात्रियों को यात्रा की दूरी के अनुसार अतिरिक्त भुगतान करना होगा।

अंतर्राष्ट्रीय उड़ानों के लिए इंडिगो ने गंतव्य के आधार पर अलग-अलग शुल्क लागू किए हैं। दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन यानी सार्क क्षेत्र के भीतर 500 किलोमीटर तक की उड़ानों के लिए 1,000 रुपये और 501 किलोमीटर या उससे अधिक दूरी के मार्गों के लिए 3,000 रुपये का शुल्क तय किया गया है। दक्षिण-पूर्व एशिया, खाड़ी सहयोग परिषद के सदस्य देशों, मध्य पूर्व तथा उत्तर और पूर्वी एशिया जाने वाली उड़ानों के लिए 5,500 रुपये का फ्यूल चार्ज निर्धारित किया गया है।

अफ्रीका जाने वाली उड़ानों के लिए यह शुल्क 6,000 रुपये और यूरोप जाने वाले यात्रियों के लिए 10,000 रुपये रखा गया है। इंडिगो ने कहा था कि उसने ईंधन की वास्तविक लागत में हुई बढ़ोतरी के मुकाबले यात्रियों पर कम अतिरिक्त बोझ डालने का प्रयास किया है।

देश की प्रमुख एयरलाइंस की ओर से फ्यूल सरचार्ज बढ़ाए जाने के बाद हवाई यात्रा की कुल लागत बढ़ सकती है। खासकर उन यात्रियों को अधिक खर्च करना पड़ सकता है,जो बार-बार उड़ानों से यात्रा करते हैं या एक ही बुकिंग में परिवार के कई सदस्यों के टिकट खरीदते हैं। अंतर्राष्ट्रीय मार्गों पर निर्धारित शुल्क के कारण विदेश यात्रा का बजट भी प्रभावित हो सकता है।

हालाँकि,फ्यूल सरचार्ज में बढ़ोतरी का अर्थ यह नहीं है कि सभी टिकटों के मूल किराये में समान रूप से वृद्धि हुई है। अतिरिक्त शुल्क यात्रा की दूरी, गंतव्य और संबंधित एयरलाइन की व्यवस्था के अनुसार अलग हो सकता है। इसके अलावा,टिकट की अंतिम कीमत बुकिंग के समय लागू किराये और अन्य शुल्कों पर भी निर्भर करेगी।

कुल मिलाकर,मध्य पूर्व में तनाव और विमानन ईंधन की बढ़ती लागत ने एयरलाइन कंपनियों के खर्च पर दबाव बढ़ाया है। इंडिगो के बाद एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस का फ्यूल सरचार्ज बढ़ाने का फैसला इसी स्थिति का संकेत है। यदि वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बनी रहती है,तो विमानन कंपनियों के लिए लागत को नियंत्रित करना चुनौतीपूर्ण रह सकता है। ऐसे में यात्रियों के लिए टिकट बुक करने से पहले कुल किराये और लागू फ्यूल सरचार्ज की तुलना करना पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गया है।