नई दिल्ली,14 अगस्त (युआईटीवी)- टाटा समूह के स्वामित्व वाली एयर इंडिया ने अपने सुरक्षा मानकों को और मजबूत करने के उद्देश्य से समूह के सभी पायलटों की अनिवार्य ड्रग और प्रतिबंधित दवाओं की स्क्रीनिंग कराने का फैसला किया है। एयरलाइन के इस निर्णय के तहत एयर इंडिया समूह के सभी पायलटों की उन दवाओं और प्रतिबंधित पदार्थों को लेकर जाँच की जाएगी,जिनका इस्तेमाल विमानन नियमों के तहत अनुमत नहीं है। सूत्रों के अनुसार,यह फैसला हाल ही में फुकेट से दिल्ली आ रही एयर इंडिया की एक उड़ान में सामने आई गंभीर टर्बुलेंस और अचानक ऊँचाई में गिरावट की घटना के बाद लिया गया है। कंपनी की ओर से पायलटों को भेजे गए एक पत्र के मुताबिक,यह स्क्रीनिंग कार्यक्रम 13 अगस्त से लागू हो गया है।
एयर इंडिया की ओर से पायलटों को भेजे गए संचार में कहा गया है कि कंपनी ने वर्षों से अपने पायलटों और कर्मचारियों की पेशेवर क्षमता,कौशल तथा सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता के आधार पर अपनी पहचान बनाई है। ऐसे में यात्रियों का भरोसा बनाए रखना एयरलाइन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। कंपनी ने कहा कि विमानन क्षेत्र में सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है और इसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही की गुंजाइश नहीं हो सकती। इसी सोच के तहत एयर इंडिया ने मौजूदा नियामकीय आवश्यकताओं से आगे बढ़कर अपने स्तर पर अतिरिक्त सुरक्षा उपाय लागू करने का निर्णय लिया है।
एयरलाइन ने अपने पत्र में स्पष्ट किया है कि समूह के सभी पायलटों के लिए यह स्क्रीनिंग अनिवार्य होगी। इसके तहत यह पता लगाया जाएगा कि कोई पायलट ऐसी दवा या पदार्थ का सेवन तो नहीं कर रहा है,जिसे विमान संचालन के दौरान विमानन नियमों के तहत प्रतिबंधित माना जाता है। कंपनी का कहना है कि व्यापक स्क्रीनिंग का उद्देश्य केवल किसी संभावित उल्लंघन की पहचान करना नहीं है,बल्कि विमान संचालन में सुरक्षा और पेशेवर दक्षता के उच्चतम मानकों को बनाए रखना भी है।
एयर इंडिया के अनुसार, स्क्रीनिंग की प्रक्रिया अलग-अलग परिचालन परिस्थितियों और स्थानों पर की जाएगी। गुरुग्राम स्थित प्रशिक्षण अकादमी में प्रशिक्षण सत्रों के दौरान पायलटों की जांच की जा सकती है। इसके अलावा उड़ानों के बाद फ्लाइट ब्रीफिंग सेंटरों, एयर इंडिया के कार्यालयों और विभिन्न परिचालन बेस पर निर्धारित स्थानों पर भी स्क्रीनिंग आयोजित की जाएगी। इस तरह कंपनी ने जाँच प्रक्रिया को पायलटों के नियमित प्रशिक्षण और परिचालन गतिविधियों के साथ जोड़ने की व्यवस्था की है,ताकि सभी पायलट इसके दायरे में आ सकें।
एयरलाइन ने कहा है कि वह पहले से ही नागर विमानन महानिदेशालय की ओर से निर्धारित सभी सुरक्षा नियमों और प्रक्रियाओं का पालन करती है। कंपनी के मुताबिक, देश में लागू विमानन सुरक्षा संबंधी प्रक्रियाएँ प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय विमानन बाजारों में अपनाए जाने वाले मानकों के अनुरूप हैं। इसके बावजूद एयर इंडिया ने मौजूदा नियमों से आगे जाकर अतिरिक्त जाँच की व्यवस्था करने का फैसला किया है। कंपनी का कहना है कि सुरक्षा के मामले में केवल न्यूनतम नियामकीय अनुपालन तक सीमित रहना पर्याप्त नहीं है,बल्कि यात्रियों की सुरक्षा और भरोसे को ध्यान में रखते हुए अतिरिक्त सावधानियाँ भी जरूरी हैं।
पायलटों को भेजे गए पत्र में एयरलाइन ने कहा कि हाल के दिनों में कई पायलटों ने सुरक्षा और पेशेवर मानकों को लेकर अपनी चिंताओं तथा सुझावों को कंपनी के साथ साझा किया है। एयर इंडिया ने इन चिंताओं को भी महत्वपूर्ण माना है। कंपनी का कहना है कि पायलटों और कर्मचारियों से मिलने वाली प्रतिक्रिया सुरक्षा व्यवस्था को लगातार बेहतर बनाने में मदद करती है। एयरलाइन का उद्देश्य ऐसा परिचालन वातावरण तैयार करना है, जिसमें सुरक्षा से जुड़े प्रत्येक पहलू की नियमित समीक्षा की जा सके और संभावित जोखिमों को समय रहते पहचाना जा सके।
सूत्रों के अनुसार,सभी पायलटों की अनिवार्य स्क्रीनिंग का फैसला पिछले सप्ताह फुकेट से दिल्ली आ रही एयर इंडिया की एक उड़ान से जुड़ी घटना के बाद लिया गया। इस उड़ान में विमान को अचानक गंभीर टर्बुलेंस का सामना करना पड़ा था और उसकी ऊँचाई में अचानक गिरावट दर्ज की गई थी। घटना के बाद विमान संचालन और चालक दल की स्थिति को लेकर जाँच शुरू हुई। इसी दौरान जानकारी सामने आई कि उड़ान के पायलट-इन-कमांड नींद से जुड़ी समस्या के लिए एक दवा का सेवन कर रहे थे। इस जानकारी ने विमानन सुरक्षा के संदर्भ में दवाओं के इस्तेमाल और पायलटों की उड़ान-योग्यता को लेकर सवाल खड़े किए।
हालाँकि,किसी पायलट द्वारा दवा का सेवन किया जाना अपने आप में नियमों के उल्लंघन का प्रमाण नहीं है। विमानन क्षेत्र में कुछ दवाएँ ऐसी होती हैं,जिनका सेवन उड़ान से पहले या उड़ान के दौरान प्रतिबंधित हो सकता है,क्योंकि उनके संभावित दुष्प्रभाव पायलट की सतर्कता,प्रतिक्रिया क्षमता या निर्णय लेने की क्षमता को प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए पायलटों द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली दवाओं और प्रतिबंधित पदार्थों की निगरानी सुरक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है। एयर इंडिया की नई पहल इसी व्यापक सुरक्षा दृष्टिकोण के तहत देखी जा रही है।
फुकेट से दिल्ली आने वाली उड़ान में अचानक ऊँचाई गिरने की घटना ने एयरलाइन के परिचालन और सुरक्षा प्रोटोकॉल पर भी ध्यान केंद्रित किया है। गंभीर टर्बुलेंस के दौरान विमान में मौजूद यात्रियों और चालक दल के सदस्यों को अचानक तेज झटकों और ऊँचाई में बदलाव का सामना करना पड़ सकता है। ऐसी परिस्थितियों में पायलटों की सतर्कता और तुरंत निर्णय लेने की क्षमता बेहद महत्वपूर्ण होती है। इसी कारण एयर इंडिया अब यह सुनिश्चित करना चाहती है कि उसके सभी पायलट विमान संचालन के दौरान पूरी तरह निर्धारित सुरक्षा मानकों के अनुरूप हों।
एयर इंडिया ने अपनी इस पहल को केवल नियामकीय अनुपालन की प्रक्रिया नहीं बताया है। कंपनी के अनुसार,यह सुरक्षा और पेशेवर उत्कृष्टता के उच्चतम मानकों को बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। एयरलाइन का मानना है कि व्यापक जाँच व्यवस्था से यात्रियों के साथ-साथ निवेशकों और अन्य हितधारकों का भरोसा भी मजबूत होगा। विमानन क्षेत्र में यात्रियों का विश्वास सीधे तौर पर एयरलाइन की सुरक्षा व्यवस्था और परिचालन क्षमता से जुड़ा होता है। ऐसे में कंपनी इस पहल को अपने सुरक्षा ढाँचे को और मजबूत करने के प्रयास के रूप में देख रही है।
एयर इंडिया ने पायलटों को यह भी बताया है कि यदि उन्हें स्क्रीनिंग कार्यक्रम को लेकर किसी तरह की जानकारी या स्पष्टीकरण की आवश्यकता है,तो वे अपने चीफ पायलट या बेस मैनेजर से संपर्क कर सकते हैं। कंपनी ने यह व्यवस्था इसलिए की है,ताकि जाँच प्रक्रिया को लेकर पायलटों के बीच किसी तरह की अस्पष्टता न रहे और उन्हें आवश्यक जानकारी समय पर उपलब्ध कराई जा सके।
एयर इंडिया का यह फैसला ऐसे समय में आया है,जब विमानन क्षेत्र में सुरक्षा और चालक दल की उड़ान-योग्यता को लेकर लगातार अधिक सतर्कता बरती जा रही है। पायलटों की शारीरिक और मानसिक स्थिति,पर्याप्त आराम,दवाओं का इस्तेमाल और उड़ान के दौरान उनकी सतर्कता विमान सुरक्षा के अहम पहलू हैं। एयरलाइन की नई स्क्रीनिंग व्यवस्था इन सभी पहलुओं की निगरानी को और मजबूत करने की दिशा में एक कदम मानी जा रही है।
समूह के सभी पायलटों को जाँच के दायरे में लाने का निर्णय एयर इंडिया के लिए व्यापक स्तर की सुरक्षा व्यवस्था स्थापित करने का प्रयास है। कंपनी का संदेश स्पष्ट है कि विमान संचालन में सुरक्षा के मानकों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। फुकेट-दिल्ली उड़ान की घटना के बाद शुरू की गई यह अनिवार्य स्क्रीनिंग भविष्य में ऐसी किसी भी संभावित स्थिति की पहचान करने और जोखिम को कम करने में मदद कर सकती है। एयरलाइन को उम्मीद है कि इस अतिरिक्त सुरक्षा उपाय से यात्रियों का भरोसा और मजबूत होगा तथा एयर इंडिया समूह में पेशेवर और सुरक्षित विमान संचालन के मानकों को और ऊँचा किया जा सकेगा।
