केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू (तस्वीर क्रेडिट@DynamicAndhra)

अमरावती को स्थायी राजधानी का दर्जा दिलाने की पहल,चंद्रबाबू नायडू ने अमित शाह से की अहम मुलाकात

अमरावती,8 जनवरी (युआईटीवी)- आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने बुधवार को नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात कर राज्य से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। इस बैठक का सबसे प्रमुख एजेंडा अमरावती को आंध्र प्रदेश की स्थायी राजधानी का वैधानिक दर्जा दिलाने का रहा। मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि संसद में विधेयक पेश कर अमरावती को कानूनी मान्यता दी जाए,ताकि राज्य के दीर्घकालिक विकास और प्रशासनिक स्थिरता को सुनिश्चित किया जा सके। नायडू ने कहा कि राजधानी के मुद्दे पर स्पष्टता न केवल राज्य के समग्र विकास के लिए जरूरी है,बल्कि इससे जनता की आकांक्षाओं को भी मजबूती मिलेगी।

मुख्यमंत्री पोलावरम परियोजना स्थल का दौरा करने के बाद सीधे दिल्ली पहुँचे थे। अमित शाह के साथ हुई इस बैठक में आंध्र प्रदेश में चल रही प्रमुख विकास परियोजनाओं,कल्याणकारी योजनाओं और भविष्य की प्राथमिकताओं की समीक्षा की गई। चर्चा के दौरान चंद्रबाबू नायडू ने जोर देकर कहा कि अमरावती को स्थायी राजधानी का वैधानिक दर्जा मिलने से नीति निर्माण में स्पष्टता आएगी और विकास की रफ्तार तेज होगी। उनके अनुसार,राजधानी को लेकर लंबे समय से जारी असमंजस ने निवेशकों और उद्योग जगत में अनिश्चितता पैदा की है,जिसे दूर करना अब बेहद जरूरी हो गया है।

चंद्रबाबू नायडू ने अमित शाह को यह भी बताया कि अमरावती को विधायी मान्यता मिलने से न केवल प्रशासनिक ढाँचे को मजबूती मिलेगी,बल्कि यह आंध्र प्रदेश के लोगों के आत्मविश्वास को भी बढ़ाएगा। उन्होंने कहा कि राज्य के पुनर्गठन के बाद से राजधानी का मुद्दा लगातार चर्चा में रहा है और अब इसे स्थायी समाधान की जरूरत है। मुख्यमंत्री के मुताबिक,केंद्र सरकार का समर्थन मिलने से अमरावती को एक आधुनिक,सुनियोजित और आर्थिक रूप से मजबूत राजधानी के रूप में विकसित किया जा सकेगा।

बैठक में मुख्यमंत्री ने ग्रामीण रोजगार और कल्याणकारी योजनाओं से जुड़े मुद्दों को भी उठाया। उन्होंने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के स्थान पर हाल ही में लागू की गई जी-राम-जी योजना के कुछ प्रावधानों को लेकर राज्य को लचीलापन देने का अनुरोध किया। नायडू ने कहा कि आंध्र प्रदेश की भौगोलिक और आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए योजनाओं के क्रियान्वयन में कुछ विशेष छूट और लचीलापन जरूरी है,ताकि इनका वास्तविक लाभ ग्रामीण जनता तक पहुँच सके।

मुख्यमंत्री ने वीबी-जी-राम-जी योजनाओं के वित्तीय प्रावधानों पर भी विस्तार से चर्चा की। उन्होंने अमित शाह को अवगत कराया कि केंद्र और राज्य सरकार के बीच वित्तपोषण का 60:40 का संशोधित अनुपात आंध्र प्रदेश के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है। नायडू ने कहा कि राज्य पहले से ही वित्तीय कठिनाइयों का सामना कर रहा है और ऐसे में यह अनुपात राज्य पर अतिरिक्त बोझ डाल रहा है। उनका मानना है कि इस वित्तीय ढाँचे से योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में बाधा आ सकती है।

चंद्रबाबू नायडू ने यह भी बताया कि संशोधित केंद्र-राज्य वित्तपोषण अनुपात के कारण राज्य के बजट पर दबाव बढ़ा है और विकास कार्यों की गति प्रभावित होने की आशंका है। राहत की माँग करते हुए उन्होंने केंद्र से वैकल्पिक वित्तीय सहायता और अधिक लचीले वित्तीय प्रावधानों पर विचार करने का अनुरोध किया। मुख्यमंत्री ने राज्य की वर्तमान वित्तीय स्थिति का हवाला देते हुए कहा कि अगर केंद्र की ओर से सहयोग और लचीलापन मिलता है,तो आंध्र प्रदेश तेजी से वित्तीय संकट से उबर सकता है।

बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने आंध्र प्रदेश को अब तक मिले केंद्रीय सहयोग के लिए धन्यवाद भी दिया। उन्होंने कहा कि कठिन आर्थिक परिस्थितियों के बावजूद केंद्र सरकार के समर्थन से राज्य ने कई अहम परियोजनाओं को आगे बढ़ाया है। साथ ही उन्होंने यह उम्मीद जताई कि भविष्य में भी केंद्र सरकार राज्य के विकास में इसी तरह सहयोग देती रहेगी। नायडू ने विशेष रूप से पोलावरम परियोजना,बुनियादी ढाँचे के विकास और सामाजिक कल्याण योजनाओं के लिए निरंतर समर्थन की आवश्यकता पर जोर दिया।

अमित शाह के साथ हुई चर्चा में राज्य में हाल के घटनाक्रमों,कानून-व्यवस्था की स्थिति और प्रशासनिक सुधारों पर भी बातचीत हुई। इसके अलावा केंद्रीय बजट में आंध्र प्रदेश के लिए किए गए आवंटनों और भविष्य में संभावित अतिरिक्त संसाधनों पर भी विचार-विमर्श किया गया। मुख्यमंत्री ने कथित तौर पर राज्य में विभिन्न विकास परियोजनाओं के लिए अतिरिक्त आवंटन की माँग रखी,ताकि अधूरी परियोजनाओं को समय पर पूरा किया जा सके।

गौरतलब है कि चंद्रबाबू नायडू की तेलुगु देशम पार्टी केंद्र में भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार की प्रमुख सहयोगी है। ऐसे में इस बैठक को राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि अमरावती को स्थायी राजधानी का वैधानिक दर्जा दिलाने की माँग पर केंद्र सरकार का रुख आने वाले समय में आंध्र प्रदेश की राजनीति और विकास की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है।

यह मुलाकात आंध्र प्रदेश के विकास, वित्तीय स्थिरता और प्रशासनिक स्पष्टता के लिए एक अहम कदम मानी जा रही है। अमरावती के मुद्दे पर केंद्र से सकारात्मक संकेत मिलने की स्थिति में राज्य को लंबे समय से चली आ रही अनिश्चितता से राहत मिल सकती है और विकास की नई संभावनाएँ खुल सकती हैं।