अमेरिका ने ‘गोल्डन डोम’ के लिए डिजिटल पोर्टल किया लॉन्च (तस्वीर क्रेडिट@np_nationpress)

अमेरिका ने ‘गोल्डन डोम’ के लिए डिजिटल पोर्टल किया लॉन्च,185 अरब डॉलर की मिसाइल रक्षा परियोजना में उद्योग और स्टार्टअप को जोड़ने की तैयारी

वाशिंगटन,12 अगस्त (युआईटीवी)- अमेरिका ने अपनी प्रस्तावित 185 अरब डॉलर की ‘गोल्डन डोम’ मिसाइल रक्षा प्रणाली को विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अमेरिकी रक्षा विभाग ने मंगलवार को एक नया डिजिटल पोर्टल शुरू किया है, जिसका उद्देश्य रक्षा कंपनियों, प्रौद्योगिकी स्टार्टअप,निवेशकों,विश्वविद्यालयों और शोधकर्ताओं को इस महत्वाकांक्षी परियोजना से सीधे जोड़ना है। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक,इस पहल के जरिए अत्याधुनिक तकनीकों को तेजी से पहचानने, विकसित करने और रक्षा प्रणाली में शामिल करने की प्रक्रिया को आसान बनाया जाएगा।

‘गोल्डन डोम फॉर अमेरिका इकोसिस्टम हब’ नामक इस डिजिटल मंच की घोषणा अमेरिका के लिए ‘गोल्डन डोम’ के निदेशक जनरल माइक गुएटलीन ने वार्षिक ‘स्पेस एंड मिसाइल डिफेंस सिम्पोजियम’ के दौरान की। यह मंच कार्यक्रम से जुड़े अधिकारियों और रक्षा क्षेत्र के पारंपरिक ठेकेदारों के साथ-साथ निजी प्रौद्योगिकी कंपनियों,वेंचर कैपिटल निवेशकों,विश्वविद्यालयों,शोध प्रयोगशालाओं और नए उद्यमियों के बीच संपर्क का एक साझा केंद्र बनेगा।

अमेरिकी रक्षा विभाग का मानना है कि इस पोर्टल के जरिए रक्षा क्षेत्र में नई तकनीकों और विचारों को शामिल करने की प्रक्रिया में लगने वाला समय काफी कम किया जा सकता है। वर्तमान व्यवस्था में किसी नई तकनीक या डिजाइन को सरकारी रक्षा कार्यक्रम तक पहुँचने और मंजूरी की प्रक्रिया पूरी करने में कई महीने लग सकते हैं। नए डिजिटल मंच के माध्यम से संभावित औद्योगिक साझेदार सीधे पंजीकरण कर सकेंगे,अपने विचार और प्रस्ताव अपलोड कर सकेंगे तथा उन्हें कार्यक्रम से जुड़े निर्णयकर्ताओं तक पहुँचा सकेंगे।

इस डिजिटल पोर्टल की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में से एक कार्यक्रम की तकनीकी जरूरतों और क्षमताओं में मौजूद कमियों से संबंधित वास्तविक समय की गैर-गोपनीय जानकारी उपलब्ध कराना है। इसका उद्देश्य निजी क्षेत्र को यह समझने में मदद करना है कि ‘गोल्डन डोम’ कार्यक्रम को इस समय किस प्रकार की तकनीक और क्षमता की आवश्यकता है। इसके आधार पर कंपनियाँ और शोध संस्थान अपने अनुसंधान एवं विकास कार्यक्रमों को परियोजना की प्राथमिकताओं के अनुरूप तैयार कर सकेंगे।

जनरल माइक गुएटलीन ने कहा कि अमेरिका को नई पीढ़ी के ऐसे हवाई खतरों का सामना करने के लिए तैयार रहना होगा,जो तेजी से अपनी दिशा और रणनीति बदल सकते हैं। उनके मुताबिक,भविष्य के खतरों से निपटने के लिए केवल पारंपरिक रक्षा प्रणालियाँ पर्याप्त नहीं होंगी,बल्कि ऐसा रक्षा कवच तैयार करना होगा,जो संभावित दुश्मन की क्षमताओं की तुलना में तेजी से खुद को अनुकूलित कर सके।

उन्होंने कहा कि अमेरिका इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए सरकारी प्रक्रियाओं में मौजूद अनावश्यक बाधाओं को कम कर रहा है और निजी क्षेत्र के साथ साझेदारी के जरिए नवाचार को बढ़ावा देने की कोशिश कर रहा है। उनका जोर इस बात पर रहा कि देश की तकनीकी और औद्योगिक क्षमता को एक साथ लाकर रक्षा क्षेत्र में नए समाधानों को तेजी से इस्तेमाल में लाया जाए।

गुएटलीन ने रक्षा तकनीक के विकास में मौजूद उस अंतर की ओर भी इशारा किया, जिसे अक्सर ‘वैली ऑफ डेथ’ कहा जाता है। यह वह स्थिति है,जब कोई तकनीक प्रयोगशाला या शुरुआती विकास चरण में सफल होने के बावजूद बड़े पैमाने पर उत्पादन और सैन्य तैनाती तक नहीं पहुँच पाती। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि नया पोर्टल इस अंतर को कम करने में मदद करेगा और उपयोगी तकनीकों को रक्षा कार्यक्रमों तक तेजी से पहुँचाने का रास्ता तैयार करेगा।

अमेरिकी रक्षा विभाग ने ‘गोल्डन डोम’ को देश की अगली पीढ़ी की बहु-स्तरीय मिसाइल और हवाई रक्षा प्रणाली के रूप में पेश किया है। इसका उद्देश्य विभिन्न प्रकार के हवाई और मिसाइल खतरों का पता लगाना,उनकी निगरानी करना और जरूरत पड़ने पर उन्हें रोकना है। ऐसी आधुनिक रक्षा प्रणालियाँ आम तौर पर कई स्तरों पर काम करती हैं और इनमें सेंसर,कमांड एवं कंट्रोल नेटवर्क तथा इंटरसेप्टर जैसी अलग-अलग क्षमताओं का एकीकरण किया जाता है।

‘गोल्डन डोम’ की परिकल्पना भी इसी तरह की एक एकीकृत रक्षा व्यवस्था के रूप में की जा रही है। इसका उद्देश्य संभावित हमलों के अलग-अलग चरणों में खतरों का पता लगाकर उन्हें रोकने की क्षमता विकसित करना है। इसके लिए अंतरिक्ष आधारित निगरानी से लेकर जमीन और समुद्र पर तैनात सेंसर तथा इंटरसेप्टर तकनीकों तक कई तरह की क्षमताओं को एक साथ जोड़ने की जरूरत होगी।

इस विशाल परियोजना की लागत को लेकर भी अमेरिकी प्रशासन का विशेष जोर है। गुएटलीन ने कहा कि अमेरिका रक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी निवेश करेगा, लेकिन इसके साथ ही परियोजना के लिए निर्धारित 185 अरब डॉलर का इस्तेमाल जिम्मेदारी से किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार लागत कम रखने के लिए बाजार में पहले से मौजूद व्यावसायिक तकनीकों का अधिक से अधिक इस्तेमाल करेगी और विभिन्न आपूर्तिकर्ताओं के बीच प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देगी।

अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक,निजी क्षेत्र की पहले से विकसित तकनीकों का इस्तेमाल करने से नई क्षमताओं को शून्य से विकसित करने में लगने वाला समय और खर्च दोनों कम किए जा सकते हैं। इसके अलावा,प्रतिस्पर्धी आपूर्ति व्यवस्था से किसी एक कंपनी या तकनीकी समाधान पर अत्यधिक निर्भरता से भी बचा जा सकेगा। इससे परियोजना की लागत और उत्पादन क्षमता दोनों को बेहतर ढंग से नियंत्रित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

नए पोर्टल को अमेरिकी रक्षा औद्योगिक आधार को मजबूत करने के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। रक्षा विभाग के अनुसार,इसके जरिए छोटे और मध्यम स्तर के आपूर्तिकर्ताओं को भी बड़े रक्षा कार्यक्रम में भाग लेने का अवसर मिल सकता है। इससे उन्हें नए निवेश स्रोतों तक पहुँच मिलेगी और वे अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाने में सक्षम हो सकेंगे।

अमेरिका के सामने मौजूदा समय में रक्षा आपूर्ति श्रृंखला को अधिक मजबूत बनाने की चुनौती भी है। किसी महत्वपूर्ण रक्षा प्रणाली के लिए सीमित संख्या में आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता होने से उत्पादन में बाधा आने का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए ‘गोल्डन डोम’ के लिए ज्यादा से ज्यादा कंपनियों और तकनीकी साझेदारों को जोड़ने की कोशिश की जा रही है। अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि इससे आपूर्ति श्रृंखला में कमजोरियाँ कम होंगी और उत्पादन को जरूरत के अनुसार तेजी से बढ़ाया जा सकेगा।

इस पहल के पीछे अमेरिका की व्यापक रक्षा औद्योगिक रणनीति भी दिखाई देती है। आधुनिक युद्ध में कृत्रिम बुद्धिमत्ता,उन्नत सेंसर,स्वायत्त प्रणालियों,अंतरिक्ष आधारित निगरानी और तेज गति से प्रतिक्रिया करने वाली तकनीकों का महत्व लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में सरकार पारंपरिक रक्षा कंपनियों के साथ-साथ वाणिज्यिक तकनीकी क्षेत्र में काम करने वाली कंपनियों और नए स्टार्टअप को भी रक्षा परियोजनाओं से जोड़ना चाहती है।

‘गोल्डन डोम’ के लिए शुरू किया गया डिजिटल मंच इसी बदलाव का हिस्सा माना जा रहा है। इससे रक्षा क्षेत्र में नए विचारों को सीधे सरकारी कार्यक्रमों तक पहुँचाने का रास्ता तैयार होगा और कंपनियों को यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि उनकी तकनीक परियोजना की किन जरूरतों को पूरा कर सकती है। साथ ही निवेशकों को भी उन तकनीकों और कंपनियों की पहचान करने का अवसर मिलेगा,जिनकी रक्षा क्षेत्र में भविष्य में बड़ी भूमिका हो सकती है।

अमेरिकी प्रशासन के लिए यह परियोजना केवल एक मिसाइल रक्षा प्रणाली विकसित करने तक सीमित नहीं है। इसके जरिए वह देश की तकनीकी क्षमता,रक्षा उत्पादन और निजी क्षेत्र की भागीदारी को एक साथ मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। 185 अरब डॉलर के प्रस्तावित निवेश को देखते हुए ‘गोल्डन डोम’ आने वाले वर्षों में अमेरिकी रक्षा उद्योग की सबसे महत्वपूर्ण परियोजनाओं में से एक बन सकता है।

हालाँकि,इतनी बड़ी और जटिल रक्षा प्रणाली को विकसित करना अपने आप में एक बड़ी चुनौती होगी। अलग-अलग सेंसर,कमांड नेटवर्क और इंटरसेप्टर प्रणालियों को एकीकृत करने के साथ-साथ उनकी विश्वसनीयता,लागत और बड़े पैमाने पर उत्पादन की क्षमता सुनिश्चित करनी होगी। ऐसे में नए डिजिटल पोर्टल के जरिए व्यापक औद्योगिक और तकनीकी भागीदारी हासिल करने की कोशिश इस परियोजना के लिए अहम साबित हो सकती है।

अमेरिका का ताजा कदम यह संकेत देता है कि वह ‘गोल्डन डोम’ के निर्माण में केवल पारंपरिक रक्षा कंपनियों पर निर्भर रहने के बजाय पूरे तकनीकी और निवेश पारिस्थितिकी तंत्र को साथ लाना चाहता है। सरकार की योजना मौजूदा व्यावसायिक तकनीकों का इस्तेमाल,आपूर्तिकर्ताओं के बीच प्रतिस्पर्धा और निजी क्षेत्र के नवाचार को जोड़कर एक ऐसी बहु-स्तरीय रक्षा प्रणाली तैयार करने की है,जो भविष्य के बदलते हवाई और मिसाइल खतरों के खिलाफ तेजी से प्रतिक्रिया दे सके।