वाशिंगटन,20 मई (युआईटीवी)- जेडी वेंस ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर बड़ा बयान देते हुए कहा है कि डोनाल्ड ट्रंप की सरकार तेहरान के साथ गंभीर और लगातार बातचीत कर रही है,लेकिन यदि ईरान परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने वाले समझौते पर सहमत नहीं होता,तो अमेरिका सैन्य अभियान दोबारा शुरू करने के लिए पूरी तरह तैयार है। वेंस का यह बयान ऐसे समय में सामने आया है,जब मध्य पूर्व में तनाव लगातार बढ़ रहा है और अमेरिका ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर पहले से ज्यादा सख्त रुख अपनाए हुए है।
व्हाइट हाउस में मीडिया से बातचीत करते हुए जेडी वेंस ने साफ शब्दों में कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप की नीति बिल्कुल स्पष्ट है और अमेरिका किसी भी स्थिति में ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने की अनुमति नहीं देगा। उन्होंने कहा कि अगर ईरान परमाणु बम बनाने में सफल हो जाता है,तो इससे पूरी दुनिया में हथियारों की नई दौड़ शुरू हो सकती है और मध्य पूर्व की स्थिरता गंभीर खतरे में पड़ सकती है।
वेंस ने कहा,“राष्ट्रपति ट्रंप ने साफ कर दिया है कि ईरान कभी भी परमाणु हथियार नहीं बना सकता। अगर ऐसा हुआ तो इससे वैश्विक सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा असर पड़ेगा और कई देशों के बीच परमाणु प्रतिस्पर्धा शुरू हो सकती है।” उन्होंने चेतावनी दी कि अमेरिका इस मुद्दे को केवल क्षेत्रीय खतरे के रूप में नहीं,बल्कि वैश्विक सुरक्षा चुनौती के तौर पर देखता है।
अमेरिकी उपराष्ट्रपति ने दावा किया कि वॉशिंगटन और तेहरान के बीच हाल के महीनों में कई स्तरों पर बातचीत हुई है और कुछ मामलों में प्रगति भी देखने को मिली है। हालाँकि,उन्होंने यह भी कहा कि किसी समझौते की सफलता का आकलन तभी किया जा सकता है जब उस पर आधिकारिक हस्ताक्षर हो जाएँ।
वेंस ने कहा, “हमें लगता है कि ईरान समझौता करना चाहता है। हाल की बातचीत में कुछ सकारात्मक संकेत भी मिले हैं,लेकिन यह तभी साबित होगा जब वास्तव में कोई समझौता सामने आएगा।” उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका बातचीत के जरिए समाधान चाहता है और उसने हमेशा कूटनीतिक रास्ते को प्राथमिकता दी है।
उन्होंने अपनी हालिया कूटनीतिक यात्रा का जिक्र करते हुए कहा कि उसका उद्देश्य दुनिया को यह दिखाना था कि अमेरिका पूरी ईमानदारी और गंभीरता के साथ बातचीत करना चाहता है। वेंस के अनुसार,ट्रंप प्रशासन किसी युद्ध की तलाश में नहीं है,लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर समझौता भी नहीं करेगा।
उन्होंने कहा, “हम यह दिखाना चाहते थे कि हम अच्छे इरादे से बातचीत कर रहे हैं,लेकिन अगर बातचीत नाकाम रही,तो राष्ट्रपति ट्रंप सैन्य दबाव बढ़ाने के लिए तैयार हैं।” वेंस ने यह भी स्पष्ट किया कि सैन्य विकल्प अमेरिका की रणनीति से बाहर नहीं है और जरूरत पड़ने पर उसे फिर से सक्रिय किया जा सकता है।
उपराष्ट्रपति ने कहा, “दूसरा विकल्प यह है कि हम फिर से सैन्य अभियान शुरू कर सकते हैं। हम ऐसा नहीं करना चाहते,लेकिन अगर जरूरत पड़ी तो राष्ट्रपति इसके लिए पूरी तरह तैयार हैं।” उनके इस बयान को ईरान के लिए स्पष्ट चेतावनी के तौर पर देखा जा रहा है।
जेडी वेंस ने ईरान को एक “बहुत जटिल देश” बताते हुए कहा कि वहाँ कई अलग-अलग ताकतवर समूह सक्रिय हैं और यही कारण है कि अमेरिका के लिए यह समझना मुश्किल हो जाता है कि बातचीत में ईरान वास्तव में क्या चाहता है। उन्होंने कहा कि कई बार तेहरान की रणनीति अस्पष्ट नजर आती है।
उन्होंने कहा, “कई बार यह समझना कठिन हो जाता है कि ईरान बातचीत से आखिर हासिल क्या करना चाहता है।” वेंस के अनुसार,ईरान के भीतर अलग-अलग शक्ति केंद्र होने की वजह से बातचीत की प्रक्रिया और अधिक जटिल हो जाती है।
इस दौरान उन्होंने उन रिपोर्टों को भी खारिज किया जिनमें दावा किया जा रहा था कि भविष्य के किसी समझौते के तहत रूस,ईरान के समृद्ध यूरेनियम भंडार को अपने नियंत्रण में ले सकता है। वेंस ने कहा कि यह अमेरिका की मौजूदा योजना का हिस्सा नहीं है और न ही कभी ऐसा प्रस्ताव आधिकारिक रूप से रखा गया है।
उन्होंने कहा, “यह हमारी मौजूदा योजना नहीं है और न ही कभी हमारी योजना रही है।” उनके इस बयान को रूस और ईरान के बीच संभावित परमाणु सहयोग को लेकर उठ रही अटकलों को शांत करने की कोशिश माना जा रहा है।
प्रेस ब्रीफिंग के दौरान जेडी वेंस ने ट्रंप प्रशासन की व्यापक संघर्ष नीति का भी बचाव किया। उन्होंने कहा कि मौजूदा संघर्ष विराम को “अंतहीन युद्ध” के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। वेंस ने कहा कि अमेरिका की रणनीति सीमित और स्पष्ट लक्ष्यों पर आधारित है।
उन्होंने कहा, “सक्रिय संघर्ष करीब पाँच से साढ़े पाँच हफ्ते चला। यह कोई हमेशा चलने वाला युद्ध नहीं है। हम अपना काम पूरा करेंगे और वापस घर आएँगे।” वेंस का यह बयान उन आलोचनाओं के जवाब के तौर पर देखा जा रहा है,जिनमें ट्रंप प्रशासन पर सैन्य हस्तक्षेप बढ़ाने का आरोप लगाया जा रहा था।
अमेरिकी उपराष्ट्रपति ने घरेलू मुद्दों पर भी विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि व्हाइट हाउस की एंटी-फ्रॉड टीम ने मेडिकेयर,मेडिकेड और इमिग्रेशन सिस्टम में अरबों डॉलर की धोखाधड़ी का पता लगाया है। वेंस ने दावा किया कि सरकार अब इन मामलों में कड़ी कार्रवाई कर रही है और सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता बढ़ाने पर काम कर रही है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के मुद्दे पर बोलते हुए वेंस ने कहा कि ट्रंप प्रशासन चाहता है कि अमेरिका इस तकनीकी दौड़ में दुनिया से आगे रहे। उन्होंने कहा कि सरकार इनोवेशन को बढ़ावा देना चाहती है,लेकिन साथ ही नागरिकों की निजता और राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा भी उसकी प्राथमिकता है।
उन्होंने कहा, “राष्ट्रपति चाहते हैं कि हम इनोवेशन के पक्ष में रहें। वे चाहते हैं कि एआई की दौड़ में अमेरिका दुनिया के बाकी देशों से आगे रहे।” वेंस ने कहा कि अमेरिका आने वाले वर्षों में एआई तकनीक को आर्थिक और रणनीतिक ताकत के रूप में इस्तेमाल करना चाहता है।
इस दौरान वेंस ने हाल में हुई राजनीतिक और धार्मिक हिंसा की घटनाओं की भी कड़ी निंदा की। उन्होंने कैलिफोर्निया में एक मुस्लिम कम्युनिटी सेंटर के पास हुई घातक गोलीबारी और रूढ़िवादी कार्यकर्ता चार्ली किर्क की हत्या जैसी घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि अमेरिका में किसी भी प्रकार की राजनीतिक हिंसा स्वीकार नहीं की जा सकती।
उन्होंने कहा, “राजनीतिक हिंसा,चाहे किसी भी तरफ से हो,अमेरिका में स्वीकार नहीं की जा सकती। हमें एक-दूसरे से बात करनी चाहिए,मतभेद होने पर गोली नहीं चलानी चाहिए।” वेंस ने समाज में बढ़ती कट्टरता और ध्रुवीकरण पर भी चिंता जताई।
हाल के महीनों में ट्रंप प्रशासन ने ईरान पर आर्थिक और कूटनीतिक दबाव लगातार बढ़ाया है। इसकी मुख्य वजह ईरान का परमाणु कार्यक्रम और मध्य पूर्व में बढ़ती अस्थिरता है। राष्ट्रपति ट्रंप कई बार सार्वजनिक रूप से कह चुके हैं कि अमेरिका किसी भी हालत में ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देगा।
हालाँकि,ट्रंप प्रशासन ने बातचीत के रास्ते भी खुले रखे हैं और कई बार संकेत दिए हैं कि यदि ईरान परमाणु गतिविधियों पर नियंत्रण को लेकर ठोस कदम उठाता है,तो समझौते की संभावना बनी रह सकती है,लेकिन जेडी वेंस के ताजा बयान से साफ है कि अमेरिका अब “कूटनीति और दबाव” दोनों रणनीतियों को साथ लेकर चल रहा है।
विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले हफ्तों में अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत की दिशा तय करेगी कि क्षेत्र में तनाव कम होगा या फिर हालात एक बार फिर सैन्य टकराव की ओर बढ़ सकते हैं। फिलहाल ट्रंप प्रशासन ने यह स्पष्ट संकेत दे दिया है कि अगर कूटनीतिक प्रयास विफल रहे,तो अमेरिका कठोर कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा।
