नई दिल्ली,3 फरवरी (युआईटीवी)- केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह गुरुवार से तीन दिनों के लिए जम्मू-कश्मीर के दौरे पर जा रहे हैं। इस अहम यात्रा के दौरान उनका मुख्य जोर केंद्र शासित प्रदेश की समग्र सुरक्षा स्थिति की समीक्षा,अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर घुसपैठ रोधी इंतजामों का आकलन,विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और स्थानीय राजनीतिक नेतृत्व के साथ संवाद पर रहेगा। अधिकारियों के अनुसार,यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब केंद्र सरकार जम्मू-कश्मीर में शांति,स्थिरता और विकास को लेकर अपनी रणनीति को और मजबूत करने में जुटी हुई है।
अधिकारियों ने बताया कि केंद्रीय गृह मंत्री 5 फरवरी की शाम को जम्मू पहुँचेंगे। जम्मू पहुँचते ही वे उसी शाम लोक भवन में विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं और प्रतिनिधियों से मुलाकात करेंगे। इन बैठकों को जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक हालात,विकास की प्राथमिकताओं और जमीनी स्तर पर सामने आ रही चुनौतियों को समझने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक,इन बैठकों में स्थानीय मुद्दों,सुरक्षा से जुड़े सवालों और केंद्र द्वारा चलाए जा रहे विकास कार्यक्रमों की प्रगति पर चर्चा होने की संभावना है।
6 फरवरी की सुबह अमित शाह कठुआ जिले के हीरानगर सेक्टर में अंतर्राष्ट्रीय सीमा का दौरा करेंगे। यह इलाका रणनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील माना जाता है और यहाँ घुसपैठ की आशंकाओं को लेकर सुरक्षा एजेंसियाँ लगातार सतर्क रहती हैं। सीमा के दौरे के दौरान गृह मंत्री सीमा सुरक्षा बल द्वारा घुसपैठ रोकने के लिए लगाए गए आधुनिक उपकरणों और तकनीकों का निरीक्षण करेंगे। अधिकारियों के अनुसार,इस दौरान उन्हें सीमा पर तैनात जवानों से सीधे बातचीत करने और उनकी चुनौतियों को समझने का भी अवसर मिलेगा। माना जा रहा है कि यह दौरा सीमा पर सुरक्षा प्रबंधों को और मजबूत करने के लिए अहम इनपुट देगा।
उसी दिन दोपहर में केंद्रीय गृह मंत्री जम्मू में एक उच्चस्तरीय सुरक्षा समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करेंगे। इस बैठक में जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा,गृह मंत्रालय और इंटेलिजेंस ब्यूरो के वरिष्ठ अधिकारी,केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के प्रमुख,जम्मू-कश्मीर पुलिस,सिविल प्रशासन और खुफिया एजेंसियों के शीर्ष अधिकारी शामिल होंगे। बैठक में जम्मू-कश्मीर की मौजूदा सुरक्षा स्थिति,आतंकवाद रोधी अभियानों की प्रगति,सीमा और आंतरिक सुरक्षा से जुड़े खतरों तथा आने वाले महीनों की रणनीति पर विस्तार से चर्चा होने की उम्मीद है।
अधिकारियों का कहना है कि इस समीक्षा बैठक में खास तौर पर जम्मू डिवीजन के कुछ इलाकों में हाल के समय में सामने आई सुरक्षा चुनौतियों,आतंकियों की गतिविधियों और ओवर-ग्राउंड वर्कर्स के नेटवर्क को लेकर मंथन किया जाएगा। इसके अलावा,लाइन ऑफ कंट्रोल और अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर घुसपैठ को पूरी तरह रोकने के उपायों पर भी चर्चा होगी। केंद्र सरकार का स्पष्ट लक्ष्य जम्मू-कश्मीर में शांति को स्थायी बनाना और किसी भी तरह की आतंकवादी गतिविधि के लिए जगह न छोड़ना है।
7 फरवरी की सुबह अमित शाह श्रीनगर के लिए रवाना होंगे। श्रीनगर में वे कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे। इन परियोजनाओं को जम्मू-कश्मीर में बुनियादी ढाँचे को मजबूत करने,रोजगार के अवसर बढ़ाने और आम लोगों के जीवन स्तर में सुधार लाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक,इन विकास कार्यों का उद्देश्य यह संदेश देना भी है कि सुरक्षा के साथ-साथ विकास केंद्र सरकार की प्राथमिकता में बराबर का स्थान रखता है।
श्रीनगर में कार्यक्रमों के बाद केंद्रीय गृह मंत्री दोपहर में छत्तीसगढ़ के लिए रवाना हो जाएँगे। गौर करने वाली बात यह है कि यह एक महीने से भी कम समय में अमित शाह का दूसरा जम्मू-कश्मीर दौरा है। इससे पहले 8 जनवरी को उन्होंने नई दिल्ली में जम्मू-कश्मीर पर एक उच्चस्तरीय सुरक्षा समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की थी। उस बैठक में लिए गए फैसलों और दिए गए निर्देशों के बाद,केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन,इंटेलिजेंस ब्यूरो के प्रमुख तपन डेका,केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के प्रमुखों और अन्य एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारियों ने 14 और 15 जनवरी को जम्मू का दौरा किया था।
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार,इस बार के दौरे में भी गृह मंत्री जम्मू डिवीजन के ऊपरी इलाकों,जैसे कठुआ,डोडा,किश्तवाड़ और उधमपुर जिलों का दौरा कर सकते हैं। इन इलाकों को हाल के वर्षों में सुरक्षा के लिहाज से संवेदनशील माना गया है और यहाँ आतंकवाद रोधी अभियानों को लेकर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। गृह मंत्री का इन क्षेत्रों में जाना जमीनी हालात को सीधे समझने और सुरक्षा बलों का मनोबल बढ़ाने के तौर पर देखा जा रहा है।
8 जनवरी को हुई सुरक्षा समीक्षा बैठक में अमित शाह ने स्पष्ट रूप से कहा था कि ‘आतंकवाद-मुक्त जम्मू और कश्मीर’ के लक्ष्य को हासिल करने के लिए सुरक्षा बलों को सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए जाएँगे। उन्होंने सभी सुरक्षा एजेंसियों को पूरी तरह सतर्क रहने और आपसी तालमेल के साथ काम करने का निर्देश दिया था,ताकि आर्टिकल 370 हटाए जाने के बाद जम्मू-कश्मीर में जो उपलब्धियां हासिल हुई हैं,उन्हें बनाए रखा जा सके।
केंद्रीय गृह मंत्री ने यह भी निर्देश दिया था कि आतंकवादियों,उनके ओवर-ग्राउंड वर्कर्स और मददगारों के खिलाफ आक्रामक कार्रवाई जारी रखी जाए। उन्होंने लाइन ऑफ कंट्रोल और अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर ‘जीरो घुसपैठ’ सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया था। अमित शाह का मानना है कि जब तक सीमा पूरी तरह सुरक्षित नहीं होगी और आतंकी नेटवर्क को जड़ से खत्म नहीं किया जाएगा,तब तक स्थायी शांति संभव नहीं है।
अमित शाह का यह तीन दिवसीय जम्मू-कश्मीर दौरा सुरक्षा,विकास और राजनीतिक संवाद—तीनों ही मोर्चों पर बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह दौरा न केवल केंद्र सरकार की जम्मू-कश्मीर को लेकर गंभीरता को दर्शाता है,बल्कि यह भी संकेत देता है कि आने वाले समय में आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई और विकास की गति दोनों को और तेज किया जाएगा।
