रेडवुड सिटी,22 अक्टूबर (युआईटीवी)- भारतीय स्क्वैश खिलाड़ी अनाहत सिंह ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर शानदार प्रदर्शन करते हुए अपने करियर की सबसे बड़ी जीत दर्ज की है। अमेरिका के रेडवुड सिटी में खेले जा रहे सिलिकॉन वैली ओपन स्क्वैश टूर्नामेंट में 18 वर्षीय अनाहत ने मिस्र की दिग्गज खिलाड़ी और आठ बार की विश्व चैंपियन नूर एलशेरबिनी को सीधे गेमों में हराकर क्वार्टर फाइनल में जगह बना ली। इस मुकाबले में अनाहत ने अपने आत्मविश्वास,आक्रामक खेल और बेहतरीन रणनीति से दुनिया की शीर्ष खिलाड़ियों में शामिल एलशेरबिनी को कोई मौका नहीं दिया। उनकी इस जीत को भारतीय स्क्वैश के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
महिला वर्ग में विश्व रैंकिंग में 15वें स्थान पर मौजूद अनाहत ने पीएसए गोल्ड श्रेणी के इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट के दूसरे दौर में तीसरी विश्व वरीयता प्राप्त एलशेरबिनी को 11-8, 11-8, 11-7 से शिकस्त दी। करीब 30 मिनट तक चले मुकाबले में भारतीय खिलाड़ी ने लगातार तीन गेम जीतकर अपनी श्रेष्ठता साबित की। इस प्रतियोगिता की कुल पुरस्कार राशि एक लाख 43 हजार 500 अमेरिकी डॉलर है। इतने बड़े टूर्नामेंट में शीर्ष वरीयता प्राप्त खिलाड़ियों में से एक को हराना अनाहत के बढ़ते कद को दर्शाता है।
मुकाबले की शुरुआत से ही अनाहत सिंह ने संयम और आक्रामकता का अच्छा संतुलन बनाए रखा। उनके सामने एलशेरबिनी जैसी अनुभवी खिलाड़ी थीं,जिन्होंने अपने करियर में आठ बार विश्व चैंपियन बनने की उपलब्धि हासिल की है। ऐसे खिलाड़ी के खिलाफ खेलना किसी भी युवा खिलाड़ी के लिए बड़ी चुनौती होती है,लेकिन अनाहत ने दबाव में बिखरने के बजाय अपनी रणनीति पर भरोसा बनाए रखा।
पहले गेम में दोनों खिलाड़ियों के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला। हालाँकि,अनाहत ने अहम अंकों पर बेहतर खेल दिखाते हुए 11-8 से गेम अपने नाम किया। पहले गेम की जीत ने भारतीय खिलाड़ी का आत्मविश्वास बढ़ाया और उन्होंने दूसरे गेम में भी उसी लय को कायम रखा। एलशेरबिनी ने वापसी की कोशिश की,लेकिन अनाहत ने उन्हें लगातार दबाव में रखा और दूसरा गेम भी 11-8 से जीत लिया।
तीसरे गेम में भारतीय खिलाड़ी ने अपनी बढ़त का प्रभावी ढंग से इस्तेमाल किया। अनाहत ने शानदार शॉट्स और सटीक खेल के दम पर 11-7 से गेम जीतते हुए मुकाबला अपने नाम कर लिया। इस तरह उन्होंने बिना कोई गेम गंवाए क्वार्टर फाइनल में प्रवेश किया।
यह जीत इसलिए भी महत्वपूर्ण है,क्योंकि एलशेरबिनी विश्व स्क्वैश की सबसे सफल खिलाड़ियों में शामिल रही हैं। उनके अनुभव और उपलब्धियों को देखते हुए अनाहत की यह सफलता उनके करियर में एक बड़ा पड़ाव मानी जा रही है।
मुकाबले के बाद अनाहत सिंह ने अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा कि वह एलशेरबिनी के मैच देखकर बड़ी हुई हैं। उन्होंने बताया कि मिस्र की दिग्गज खिलाड़ी ने अपने करियर में जो उपलब्धियाँ हासिल की हैं,वह भी वैसा ही मुकाम प्राप्त करना चाहती हैं।
अनाहत के मुताबिक,एलशेरबिनी दुनिया भर के स्क्वैश खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा हैं। उनके साथ पहली बार कोर्ट साझा करना अपने आप में खास अनुभव था। भारतीय खिलाड़ी ने स्वीकार किया कि उन्हें उम्मीद नहीं थी कि मुकाबले का परिणाम इस तरह उनके पक्ष में आएगा। उन्हें लगा था कि खेल की गति और प्रतिद्वंद्वी की शैली को समझने में कुछ समय लगेगा,लेकिन उनकी रणनीति ने बेहतर तरीके से काम किया।
अनाहत की इस प्रतिक्रिया से पता चलता है कि वह अपनी उपलब्धियों के साथ-साथ खेल के दिग्गज खिलाड़ियों से सीखने को भी महत्व देती हैं। कम उम्र में विश्व स्तर की अनुभवी खिलाड़ियों को चुनौती देना उनके आत्मविश्वास और मेहनत का प्रमाण है।
अब क्वार्टर फाइनल में अनाहत का सामना मिस्र की विश्व रैंकिंग में 14वें स्थान पर मौजूद सलमा हनी से होगा। इस मुकाबले में भी भारतीय खिलाड़ी की कोशिश अपनी जीत की लय को बरकरार रखने और टूर्नामेंट में आगे बढ़ने की होगी।
अनाहत सिंह पिछले कुछ समय से लगातार शानदार प्रदर्शन कर रही हैं। हाल ही में एशियन गेम्स 2026 में उन्होंने महिला एकल स्पर्धा के फाइनल में पहुँचकर इतिहास रचा था। वह एशियाई खेलों में स्क्वैश महिला एकल के फाइनल तक पहुँचने वाली पहली भारतीय महिला बनीं। हालाँकि,खिताबी मुकाबले में उन्हें मलेशिया की सिवासंगरी सुब्रमण्यम के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा और रजत पदक से संतोष करना पड़ा।
इससे पहले वर्ष 2023 में हांग्जो में आयोजित एशियन गेम्स में भी अनाहत ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया था। उस प्रतियोगिता में उन्होंने महिला टीम और मिश्रित युगल स्पर्धाओं में कांस्य पदक जीते थे। इन उपलब्धियों ने अंतर्राष्ट्रीय स्क्वैश में उनकी पहचान को मजबूत किया है।
अनाहत की उपलब्धियों में वर्ष 2026 की विश्व जूनियर स्क्वैश चैंपियनशिप का खिताब भी शामिल है। उन्होंने लड़कियों की एकल स्पर्धा जीतकर इतिहास रचा और इस प्रतियोगिता में खिताब हासिल करने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बनीं। उनकी इस सफलता के साथ टूर्नामेंट में मिस्र के खिलाड़ियों का 15 साल से चला आ रहा दबदबा भी समाप्त हुआ।
जूनियर स्तर पर विश्व चैंपियन बनने के बाद अब अनाहत सीनियर अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज करा रही हैं। सिलिकॉन वैली ओपन में नूर एलशेरबिनी जैसी दिग्गज खिलाड़ी को हराना इसी प्रगति का महत्वपूर्ण उदाहरण है।
18 वर्ष की उम्र में अनाहत ने जिस तरह अंतर्राष्ट्रीय मंच पर अपनी पहचान बनाई है,उससे भारतीय स्क्वैश के भविष्य को लेकर उम्मीदें बढ़ी हैं। हालाँकि,आगे की राह में उन्हें लगातार कठिन मुकाबलों का सामना करना होगा,लेकिन उनकी मौजूदा फॉर्म और उपलब्धियाँ बताती हैं कि वह शीर्ष स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने की क्षमता रखती हैं। अब सभी की नजरें सलमा हनी के खिलाफ होने वाले उनके अगले मुकाबले पर रहेंगी,जहाँ अनाहत की कोशिश एक और जीत के साथ टूर्नामेंट के सेमीफाइनल की ओर कदम बढ़ाने की होगी।
