अयातुल्लाह सैय्यद मोजतबा हुसैनी खामेनेई (तस्वीर क्रेडिट@sureshsinghj)

अयातुल्लाह अली खामेनेई के निधन के बाद मोजतबा खामेनेई बने ईरान के नए सुप्रीम लीडर, ‘गरिमा और ताकत के नए युग’ की शुरुआत का दावा

तेहरान,9 मार्च (युआईटीवी)- ईरान की राजनीति में एक ऐतिहासिक मोड़ आ गया है। देश के लंबे समय तक सर्वोच्च धार्मिक और राजनीतिक नेता रहे अली खामेनेई के निधन के बाद उनके उत्तराधिकारी के रूप में उनके बेटे मोजतबा खामेनेई को ईरान का नया सुप्रीम लीडर चुना गया है। इस फैसले की आधिकारिक घोषणा ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन ने की। उन्होंने कहा कि मोजतबा खामेनेई की नियुक्ति देश के लिए “गरिमा और ताकत के नए युग” की शुरुआत है।

ईरान की राजनीतिक व्यवस्था में सुप्रीम लीडर का पद सर्वोच्च माना जाता है और यह देश की राजनीतिक,धार्मिक और सैन्य व्यवस्था पर अंतिम अधिकार रखता है। इसलिए अली खामेनेई के निधन के बाद पूरे देश और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की नजरें इस बात पर टिकी थीं कि उनका उत्तराधिकारी कौन बनेगा। लंबे विचार-विमर्श और मतदान प्रक्रिया के बाद विशेषज्ञों की असेंबली ने मोजतबा खामेनेई को इस महत्वपूर्ण पद के लिए चुना।

अंतर्राष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार,ईरान की धार्मिक संस्था विशेषज्ञों की सभा ने इस फैसले पर मुहर लगाई। यह संस्था 88 वरिष्ठ मौलवियों की एक शक्तिशाली परिषद है,जिसे ईरान के सुप्रीम लीडर का चयन करने की संवैधानिक जिम्मेदारी दी गई है। असेंबली की ओर से जारी बयान में कहा गया कि एक अहम मतदान प्रक्रिया के बाद अयातुल्लाह सैय्यद मोजतबा हुसैनी खामेनेई को इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान का तीसरा सुप्रीम लीडर नियुक्त किया गया है।

ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि यह चुनाव देश की राष्ट्रीय एकता और राजनीतिक स्थिरता को मजबूत करेगा। उन्होंने कहा कि यह फैसला इस बात का प्रमाण है कि ईरान की राजनीतिक व्यवस्था कठिन परिस्थितियों में भी मजबूत और संगठित बनी हुई है। पेजेश्कियान ने अपने बयान में कहा कि यह महत्वपूर्ण निर्णय इस्लामिक गणराज्य की उस सामूहिक इच्छा को दर्शाता है,जो देश की एकता और ताकत को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। उनके अनुसार,यही एकता ईरान को अपने विरोधियों और बाहरी चुनौतियों का सामना करने की क्षमता देती है।

ईरान में सुप्रीम लीडर का पद केवल धार्मिक नेतृत्व तक सीमित नहीं होता,बल्कि यह देश के सबसे शक्तिशाली राजनीतिक पदों में से एक है। सुप्रीम लीडर को सशस्त्र बलों का सर्वोच्च कमांडर माना जाता है और वह न्यायपालिका,सेना,सुरक्षा एजेंसियों तथा कई प्रमुख संस्थानों की नियुक्तियों पर अंतिम निर्णय लेते हैं। इसलिए मोजतबा खामेनेई की नियुक्ति को ईरान की राजनीतिक दिशा और भविष्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

56 वर्षीय मोजतबा खामेनेई लंबे समय से ईरान के राजनीतिक और धार्मिक ढाँचे में प्रभावशाली व्यक्तित्व माने जाते रहे हैं। हालाँकि,उन्होंने कभी कोई निर्वाचित पद नहीं सँभाला और न ही सार्वजनिक रूप से नेतृत्व के लिए प्रचार किया,लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि वे वर्षों से पर्दे के पीछे एक प्रभावशाली भूमिका निभाते रहे हैं। अपने पिता के नेतृत्व के दौरान मोजतबा खामेनेई को अक्सर सुप्रीम लीडर के कार्यालय और रूढ़िवादी राजनीतिक नेटवर्क में एक महत्वपूर्ण शक्ति के रूप में देखा जाता था।

कहा जाता है कि मोजतबा खामेनेई का ईरान की सुरक्षा संस्थाओं और धार्मिक संगठनों में भी व्यापक प्रभाव रहा है। कई रिपोर्टों के अनुसार,वे अपने पिता के नेतृत्व में एक बड़े आर्थिक और कारोबारी नेटवर्क के संचालन से भी जुड़े रहे हैं। इसी कारण उन्हें लंबे समय से संभावित उत्तराधिकारी के रूप में देखा जाता रहा था।

हालाँकि,उनकी नियुक्ति को लेकर देश और विदेश में बहस भी होती रही है। कुछ आलोचकों का मानना रहा है कि यदि मोजतबा खामेनेई सुप्रीम लीडर बनते हैं,तो इससे ईरान में सत्ता का केंद्रीकरण और पारिवारिक उत्तराधिकार की छवि मजबूत हो सकती है। वहीं समर्थकों का कहना है कि मोजतबा को राजनीतिक और धार्मिक मामलों की गहरी समझ है और वे देश की मौजूदा चुनौतियों से निपटने में सक्षम हैं।

सुप्रीम लीडर के पद के लिए चयन प्रक्रिया के दौरान कई अन्य प्रमुख नाम भी चर्चा में थे। संभावित उम्मीदवारों में मोहम्मद मेहदी मीरबाघेरी, हसन खुमैनी, घोलम-होसैन मोहसेनी-एजेई और अलीरेज़ा अराफी जैसे प्रभावशाली धार्मिक और राजनीतिक नेताओं के नाम शामिल थे,लेकिन अंततः असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स ने मोजतबा खामेनेई के नाम पर सहमति जताई।

ईरान में सत्ता परिवर्तन का यह दौर ऐसे समय में आया है,जब देश कई घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय चुनौतियों का सामना कर रहा है। पश्चिमी देशों के साथ तनाव,आर्थिक प्रतिबंध,क्षेत्रीय राजनीति और घरेलू आर्थिक समस्याएँ ईरान की राजनीति को प्रभावित कर रही हैं। ऐसे में नए सुप्रीम लीडर के रूप में मोजतबा खामेनेई के सामने कई बड़ी जिम्मेदारियाँ होंगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि मोजतबा खामेनेई अपने पिता की नीतियों को किस हद तक आगे बढ़ाते हैं और किन क्षेत्रों में नई रणनीति अपनाते हैं। ईरान की विदेश नीति,परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय राजनीति जैसे मुद्दों पर उनके फैसले अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी व्यापक प्रभाव डाल सकते हैं।

अयातुल्लाह अली खामेनेई के लंबे कार्यकाल के बाद यह पहली बार है,जब ईरान में सुप्रीम लीडर का पद नए व्यक्ति के हाथों में गया है। इसलिए यह बदलाव केवल नेतृत्व परिवर्तन नहीं,बल्कि देश की राजनीतिक दिशा में संभावित बदलाव का संकेत भी माना जा रहा है।

फिलहाल ईरान की सरकार और समर्थक गुट इस नियुक्ति को स्थिरता और निरंतरता का प्रतीक बता रहे हैं। राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने कहा है कि नए सुप्रीम लीडर के नेतृत्व में ईरान एक मजबूत और सम्मानजनक भविष्य की ओर बढ़ेगा। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि मोजतबा खामेनेई किस तरह देश के राजनीतिक,धार्मिक और रणनीतिक मामलों को आगे बढ़ाते हैं और वैश्विक मंच पर ईरान की भूमिका को किस दिशा में ले जाते हैं।