जैव-चिकित्सा अपशिष्ट खुले में फेंकने वालों पर सरकार दर्ज करेगी केस

चेन्नई, 17 फरवरी (युआईटीवी/आईएएनएस)| तमिलनाडु सरकार राज्य के विभिन्न हिस्सों में बायो-मेडिकल वेस्ट डंप करने वालों पर गुंडा एक्ट के तहत मामला दर्ज करने की योजना बना रही है। तमिलनाडु के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग में प्रधान सचिव और अवर सचिव ने राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (दक्षिणी बेंच) को लिखा है कि वे 1982 के टीएन अधिनियम 14 के तहत उन लोगों को शामिल करेंगे, जो बायो मेडिकल वेस्ट को खुले में फेंकते हैं।

उल्लेखनीय है कि तमिलनाडु के महाधिवक्ता पहले ही खुले में बायो-मेडिकल कचरे के अवैध डंपिंग से होने वाले खतरे पर सरकार को आवाज उठा चुके हैं।

तमिलनाडु स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव पी. सेंथिल कुमार ने राज्य के उन सभी जिलों की समीक्षा की है, जहां मार्च 2021 से इसके खिलाफ मामले दर्ज किए गए थे।

कोयम्बटूर, थेनी, तिरुनेलवेली, तिरुपुर, डिंडीगुल जिलों और अन्नामलाई टाइगर रिजर्व और केरल की सीमा से लगे अन्य क्षेत्रों में समीक्षा की गई।

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (दक्षिणी बेंच) ने 23 मई, 2022 को कहा था कि जब दोषियों को गिरफ्तार किया जाएगा, तो उनके खिलाफ उचित कार्रवाई शुरू की जाएगी।

राज्य के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग ने मामले की जांच के लिए पुलिस अधीक्षक, क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी, पंचायतों के अतिरिक्त निदेशक, पशुपालन के संयुक्त निदेशक और नगर निगम के आयुक्त की एक समिति गठित की है। समिति की बैठक हर महीने होगी और इसकी अध्यक्षता जिलाधिकारी करेंगे।

समिति राज्य के प्रत्येक जिले में बॉयो मेडिकल वेस्ट डंपिंग के खिलाफ पंजीकृत मामलों की संख्या की निगरानी करेगी और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेगी।

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