प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (तस्वीर क्रेडिट@mukeshdeshka)

ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में बोले पीएम मोदी, ‘पावर टू एंपावर’ से ही बनेगा बेहतर भविष्य, डेटा और इनोवेशन को बताया असली ताकत

नई दिल्ली,13 अक्टूबर (युआईटीवी)- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम को संबोधित करते हुए कहा कि 21वीं सदी में शक्ति के मायने तेजी से बदल रहे हैं। आज डेटा, ज्ञान और नवाचार दुनिया की नई ताकत बनकर उभरे हैं। ऐसे में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह नहीं है कि शक्ति किसके पास है,बल्कि यह है कि उसका इस्तेमाल किस उद्देश्य के लिए किया जा रहा है। प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि तकनीक और ज्ञान का लाभ केवल कुछ लोगों तक सीमित रहने के बजाय समाज के करोड़ों लोगों तक पहुँचना चाहिए। उन्होंने इस सोच को ‘पावर टू एंपावर’ यानी दूसरों को सशक्त बनाने की शक्ति का नाम दिया।

भारत में आयोजित इस वैश्विक कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने दुनिया के अलग-अलग क्षेत्रों से आए विशेषज्ञों और प्रतिनिधियों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम हर वर्ष अर्थव्यवस्था, तकनीक, ऊर्जा और वैश्विक मामलों जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा के लिए दुनिया के प्रमुख विचारकों को एक मंच पर लाता है। इस बार पहली बार भारत में इस आयोजन का होना विशेष महत्व रखता है।

प्रधानमंत्री ने फोरम के संस्थापक माइकल ब्लूमबर्ग और उनकी पूरी टीम को भारत में इस कार्यक्रम के आयोजन के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि भारत को इस आयोजन के लिए चुनना सही समय पर सही स्थान का चयन है। अपने संबोधन में मोदी ने ब्लूमबर्ग के साथ अपने संबंधों का भी उल्लेख किया और भारत के प्रति उनके लगाव की सराहना की।

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन की शुरुआत कार्यक्रम में उपस्थित लोगों का स्वागत करते हुए की। उन्होंने कहा कि कुछ समय पहले माइकल ब्लूमबर्ग ने अपने विचार प्रस्तुत किए थे। उनका तीन दशक से अधिक का लंबा सफर रहा है और उन्होंने प्रधानमंत्री से कहा था कि वह उनके मित्र हैं।

मोदी ने ब्लूमबर्ग को मीडिया जगत की एक वरिष्ठ हस्ती, सफल पेशेवर और समर्पित व्यक्तित्व बताया। उन्होंने कहा कि उन्होंने भारत के प्रति ब्लूमबर्ग के प्रेम को गहराई से महसूस किया है। प्रधानमंत्री के अनुसार, यह मंच दुनिया के बेहतरीन विचारों को एक साथ लाने और महत्वपूर्ण आर्थिक एवं वैश्विक विषयों पर विचार-विमर्श करने का अवसर प्रदान करता है।

उन्होंने कहा कि फोरम के माध्यम से अर्थव्यवस्था के साथ-साथ तकनीक, ऊर्जा और अंतर्राष्ट्रीय मामलों पर भी चर्चा होती है। मौजूदा दौर में इन सभी क्षेत्रों में तेजी से बदलाव हो रहे हैं। इसलिए विभिन्न देशों के नीति निर्माताओं, कारोबारियों और विशेषज्ञों के बीच संवाद की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई है।

प्रधानमंत्री ने इस वर्ष फोरम की थीम का उल्लेख करते हुए कहा कि दुनिया में शक्ति के नए स्रोत उभर रहे हैं। इतिहास के प्रत्येक दौर में शक्ति की अपनी परिभाषा और उसके अलग-अलग आधार रहे हैं,लेकिन 21वीं सदी, विशेषकर इसके मौजूदा दशक में, शक्ति के स्वरूप में बड़ा परिवर्तन देखने को मिल रहा है।

उन्होंने कहा कि आज डेटा शक्ति है, ज्ञान शक्ति है और नवाचार भी शक्ति है। आधुनिक अर्थव्यवस्था में इन संसाधनों की भूमिका लगातार बढ़ रही है। तकनीकी विकास, सूचना तक पहुँच और नए विचारों को व्यावहारिक रूप देने की क्षमता अब देशों तथा समाजों की प्रगति को प्रभावित करने वाले महत्वपूर्ण कारक बन गए हैं।

हालाँकि, प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि इन संसाधनों की उपलब्धता अपने आप में पर्याप्त नहीं है। असली महत्व इस बात का है कि उनका उपयोग किस तरह किया जाता है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या तकनीक का लाभ केवल कुछ चुनिंदा लोगों तक सीमित रहेगा या इसके जरिए करोड़ों लोगों के लिए नए अवसर पैदा किए जाएंगे।

इसी तरह,उन्होंने ज्ञान के इस्तेमाल को लेकर भी प्रश्न उठाया। क्या ज्ञान कुछ लोगों के प्रभाव और शक्ति को बढ़ाने का साधन बनेगा या इससे समाज के हर वर्ग की क्षमताओं को विकसित करने में मदद मिलेगी? प्रधानमंत्री के अनुसार,इन सवालों के जवाब में ही विकास की दिशा और उसके वास्तविक लाभार्थियों का निर्धारण होता है।

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण में ‘पावर टू एंपावर’ की अवधारणा पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि शक्ति का वास्तविक उद्देश्य दूसरों को सशक्त बनाना होना चाहिए। तकनीक, ज्ञान, धन और संसाधनों का इस्तेमाल ऐसा होना चाहिए, जिससे अधिक से अधिक लोगों को आगे बढ़ने का अवसर मिले।

उन्होंने स्पष्ट किया कि यह विचार केवल दूसरों को उपदेश देने तक सीमित नहीं है। भारत की हजारों वर्षों पुरानी परंपरा में भी इस सोच को महत्व दिया गया है। प्रधानमंत्री के मुताबिक, भारत ने इस विचार को अपनी शासन व्यवस्था और कार्य संस्कृति में लागू करने का प्रयास किया है।

मोदी ने कहा कि दूसरों को सक्षम बनाने की भावना भारतीय विचार परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा रही है। उनके अनुसार, किसी व्यक्ति या संस्था की वास्तविक भूमिका केवल अपनी ताकत बढ़ाने में नहीं, बल्कि अपनी क्षमताओं से दूसरों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने में भी होती है।

प्रधानमंत्री के इस संदेश का व्यापक संदर्भ आधुनिक अर्थव्यवस्था में अवसरों के समान वितरण से जुड़ा है। डिजिटल तकनीक, शिक्षा और नवाचार के क्षेत्र में प्रगति तभी अधिक उपयोगी हो सकती है,जब समाज के विभिन्न वर्गों को उसका लाभ मिले। यदि ज्ञान और तकनीकी संसाधन सीमित समूहों तक ही पहुँचते हैं,तो विकास के अवसर भी सीमित रह सकते हैं।

प्रधानमंत्री ने अपनी बात को समझाने के लिए संस्कृत के एक प्रसिद्ध श्लोक का उल्लेख किया। उन्होंने कहा, “विद्या विवादाय, धनं मदाय, शक्तिः परेषां परिपीडनाय खलस्य। साधोर्विपरीतमेतत् ज्ञानाय, दानाय च रक्षणाय॥”

इस श्लोक का भावार्थ बताते हुए उन्होंने कहा कि ज्ञान, धन और शक्ति का मूल्यांकन केवल इस आधार पर नहीं किया जाना चाहिए कि वे किसके पास हैं। बल्कि यह देखा जाना चाहिए कि उनका इस्तेमाल किस प्रकार किया जा रहा है।

श्लोक के अनुसार,नकारात्मक प्रवृत्ति वाला व्यक्ति विद्या का उपयोग विवाद करने, धन का इस्तेमाल अहंकार दिखाने और शक्ति का प्रयोग दूसरों को परेशान करने के लिए कर सकता है। इसके विपरीत, सदाचारी व्यक्ति ज्ञान का उपयोग समझ बढ़ाने, धन का इस्तेमाल दान और सहायता के लिए तथा शक्ति का प्रयोग दूसरों की रक्षा करने के लिए करता है।

प्रधानमंत्री ने इस उदाहरण के माध्यम से यह संदेश दिया कि किसी भी संसाधन की वास्तविक उपयोगिता उसके उद्देश्य और प्रभाव से तय होती है। ज्ञान तभी सार्थक है,जब वह लोगों की समझ और क्षमताओं को बढ़ाए। धन तभी व्यापक सामाजिक महत्व प्राप्त करता है,जब उससे जरूरतमंदों की मदद हो सके। इसी तरह, शक्ति का सकारात्मक उपयोग दूसरों को सुरक्षा और अवसर प्रदान करने में निहित है।

ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में प्रधानमंत्री का संबोधन ऐसे समय में हुआ,जब दुनिया तकनीकी बदलाव, ऊर्जा जरूरतों और आर्थिक चुनौतियों के बीच विकास के नए रास्ते तलाश रही है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल अर्थव्यवस्था और डेटा आधारित सेवाओं के विस्तार ने नए अवसर पैदा किए हैं,लेकिन इनके लाभों को व्यापक समाज तक पहुंचाना भी एक बड़ी चुनौती है।

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन के जरिए इस बात पर जोर दिया कि भविष्य की प्रगति केवल तकनीकी क्षमता या आर्थिक संसाधनों से तय नहीं होगी। यह भी महत्वपूर्ण होगा कि इनका इस्तेमाल मानव कल्याण और समाज के व्यापक विकास के लिए किस तरह किया जाता है।

उनके अनुसार, शक्ति का उद्देश्य दूसरों को पीछे छोड़ना नहीं, बल्कि उन्हें आगे बढ़ने में सक्षम बनाना होना चाहिए। ‘पावर टू एंपावर’ की यही अवधारणा उनके भाषण का केंद्रीय संदेश रही। भारत में आयोजित इस वैश्विक मंच से प्रधानमंत्री ने ज्ञान, नवाचार और तकनीक के ऐसे उपयोग की आवश्यकता पर बल दिया, जिससे विकास के अवसर अधिक लोगों तक पहुँच सकें और समाज की सामूहिक क्षमता को मजबूत किया जा सके।