नई दिल्ली,28 सितंबर (युआईटीवी)- मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक और याचिका दाखिल की गई है। याचिका में भारतीय निर्वाचन आयोग के कामकाज और उससे जुड़े रिकॉर्ड की न्यायिक या विशेष जाँच दल यानी एसआईटी से जाँच कराने की माँग की गई है। याचिकाकर्ता राकेश कुमार सिंह उर्फ राकेश सिंह ने चुनाव आयोग की निर्णय लेने की प्रक्रिया और विशेष गहन पुनरीक्षण से संबंधित विभिन्न कार्रवाइयों पर सवाल उठाए हैं।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि बहुसदस्यीय संस्था के तौर पर चुनाव आयोग को मिली शक्तियों का इस्तेमाल संविधान के अनुच्छेद 324 और मुख्य चुनाव आयुक्त तथा अन्य चुनाव आयुक्त अधिनियम,2023 की धारा 18 के तहत निर्धारित सामूहिक निर्णय प्रक्रिया का पालन किए बिना किया गया। याचिकाकर्ता ने इस संबंध में आयोग के रिकॉर्ड और निर्णय प्रक्रिया की न्यायिक जाँच कराने की माँग की है।
याचिका में जुलाई 2026 में फॉर्म-6 में किए गए बदलावों और कुछ अन्य कार्रवाइयों को रद्द करने की माँग भी की गई है। फॉर्म-6 का इस्तेमाल मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए किया जाता है। याचिकाकर्ता का दावा है कि यदि चुनाव आयोग के रिकॉर्ड की जाँच के दौरान बिना अधिकृत प्रक्रिया के फैसले लिए जाने की बात सामने आती है,तो इसकी जाँच किसी न्यायिक आयोग या विशेष जाँच दल से कराई जानी चाहिए।
याचिका में मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों के बीच निर्णय लेने की प्रक्रिया का भी उल्लेख किया गया है। इसमें कहा गया है कि वर्ष 2023 के कानून के अनुसार आयोग का कामकाज जहाँ तक संभव हो,आम सहमति के आधार पर होना चाहिए। यदि मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की राय किसी मामले पर अलग-अलग होती है,तो कानून के अनुसार बहुमत की राय के आधार पर निर्णय किया जाना चाहिए।
याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि कुछ महत्वपूर्ण फैसलों में इस सामूहिक व्यवस्था का पालन नहीं किया गया। हालाँकि,इन आरोपों की सत्यता का निर्धारण अभी अदालत के समक्ष होना बाकी है। याचिका में इन्हीं आरोपों से जुड़े रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने का निर्देश देने की माँग की गई है,ताकि बाद में उनकी जाँच की जा सके।
याचिका में फॉर्म-6 में आगे किसी बड़े बदलाव पर रोक लगाने की माँग भी की गई है। इसके अलावा याचिकाकर्ता ने मुख्य चुनाव आयुक्त को मामले के लंबित रहने तक अपने कार्यों से दूर रखने के निर्देश की माँग की है।
याचिका में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर के तहत की गई कार्रवाइयों को भी चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ता ने माँग की है कि एसआईआर के तहत जारी किए गए सभी फैसलों, निर्देशों, कार्रवाइयों और संबंधित उपायों को शुरुआत से ही शून्य और बिना कानूनी अधिकार के माना जाए।
याचिका में कहा गया है कि एसआईआर से जुड़ी प्रक्रिया और उससे संबंधित निर्णयों की वैधानिकता की न्यायिक समीक्षा आवश्यक है। इसके लिए आयोग के रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने और निर्णय प्रक्रिया की जाँच कराने की माँग की गई है।
यह मामला ऐसे समय में सामने आया है,जब चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, मतदाता सूची और पुनरीक्षण प्रक्रिया को लेकर सार्वजनिक और न्यायिक स्तर पर चर्चा चल रही है। ऐसे मामलों में चुनाव आयोग की संवैधानिक भूमिका और उसके निर्णयों की न्यायिक समीक्षा का प्रश्न भी महत्वपूर्ण हो जाता है।
याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से संबंधित सभी रिकॉर्ड सुरक्षित रखने का निर्देश देने की माँग की है। याचिका के अनुसार,यदि रिकॉर्ड सुरक्षित नहीं रखे गए तो बाद में निर्णय प्रक्रिया और उससे संबंधित दस्तावेजों की स्वतंत्र जाँच करना कठिन हो सकता है।
याचिका में यह भी कहा गया है कि यदि जाँच के दौरान यह सामने आता है कि आयोग के किसी निर्णय को निर्धारित सामूहिक प्रक्रिया के बाहर जाकर लिया गया था,तो उसकी विस्तृत जाँच कराई जानी चाहिए। इसके लिए न्यायिक आयोग या विशेष जाँच दल गठित करने की माँग की गई है।
इससे पहले भी राकेश कुमार सिंह की ओर से चुनाव आयोग से जुड़े मामले अदालतों में उठाए जा चुके हैं। पटना हाई कोर्ट में दाखिल एक मामले में मई और जून 2026 में सुनवाई हुई थी। 25 जून के आदेश में अदालत ने संबंधित मामले को आगे सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया था।
नई याचिका के जरिए सुप्रीम कोर्ट के सामने चुनाव आयोग की निर्णय प्रक्रिया, बहुसदस्यीय आयोग में सामूहिक निर्णय, फॉर्म-6 में किए गए बदलाव और विशेष गहन पुनरीक्षण से जुड़े कई कानूनी सवाल रखे गए हैं। हालाँकि,याचिका में लगाए गए आरोप अभी केवल याचिकाकर्ता के दावे हैं और उन पर अदालत का अंतिम निर्णय आना बाकी है।
मामले में यह भी महत्वपूर्ण होगा कि सुप्रीम कोर्ट चुनाव आयोग की संवैधानिक शक्तियों, 2023 के कानून में निर्धारित निर्णय प्रक्रिया और याचिकाकर्ता की ओर से उठाए गए रिकॉर्ड संबंधी सवालों को किस तरह देखता है। अदालत यदि रिकॉर्ड की जाँच या किसी स्वतंत्र जाँच की आवश्यकता मानती है,तो आगे की प्रक्रिया उसी के अनुरूप तय होगी।
फिलहाल याचिका में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सीधे कार्रवाई के साथ-साथ चुनाव आयोग के कामकाज से जुड़े दस्तावेजों को सुरक्षित रखने,फॉर्म-6 में आगे बदलाव रोकने और एसआईआर से संबंधित कार्रवाइयों की वैधानिकता की समीक्षा की माँग की गई है। मामले में अदालत का रुख आगे की सुनवाई के दौरान स्पष्ट होगा।
