नई दिल्ली,7 अक्टूबर (युआईटीवी)- सुप्रीम कोर्ट में सोमवार सुबह घटित एक अप्रत्याशित घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया,जब एक वकील ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) न्यायमूर्ति बीआर गवई के साथ अदालत कक्ष में दुर्व्यवहार किया। इस घटना की पूरे देश में तीखी निंदा हो रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इसे लोकतंत्र और न्यायपालिका पर हमला बताते हुए सख्त प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि ऐसे निंदनीय कृत्य न केवल अस्वीकार्य हैं,बल्कि हर भारतीय के आत्मसम्मान को ठेस पहुँचाते हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए लिखा, “भारत के मुख्य न्यायाधीश,न्यायमूर्ति बीआर गवई से बात की। आज सुबह सुप्रीम कोर्ट परिसर में उन पर हुए हमले से हर भारतीय क्षुब्ध है। हमारे समाज में ऐसे निंदनीय कृत्यों के लिए कोई स्थान नहीं है। यह अत्यंत शर्मनाक है। ऐसी स्थिति में न्यायमूर्ति गवई द्वारा प्रदर्शित धैर्य और संयम की मैं सराहना करता हूँ। उनका यह व्यवहार न्याय के मूल्यों और संविधान की भावना के प्रति उनकी गहरी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।”
प्रधानमंत्री की यह प्रतिक्रिया उस समय आई,जब पूरा न्यायिक तंत्र और देश के नागरिक इस घटना से आहत थे। सुप्रीम कोर्ट जैसी सर्वोच्च संस्था में ऐसा व्यवहार भारतीय लोकतंत्र की गरिमा पर प्रश्नचिह्न लगाता है।
घटना के अनुसार,सोमवार सुबह जब मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ वकीलों के मामलों की मेंशनिंग (तत्काल सुनवाई के अनुरोध) सुन रही थी,तभी वकील राकेश किशोर अचानक खड़े हो गए और ज़ोर-ज़ोर से बोलने लगे। बताया जा रहा है कि उन्होंने “सनातन का अपमान नहीं सहेंगे” का नारा लगाया और मुख्य न्यायाधीश से असभ्य भाषा में संवाद किया। अदालत कक्ष में मौजूद लोग इस अप्रत्याशित व्यवहार से स्तब्ध रह गए।
Spoke to Chief Justice of India, Justice BR Gavai Ji. The attack on him earlier today in the Supreme Court premises has angered every Indian. There is no place for such reprehensible acts in our society. It is utterly condemnable.
I appreciated the calm displayed by Justice…
— Narendra Modi (@narendramodi) October 6, 2025
सुरक्षा कर्मियों ने तत्काल हस्तक्षेप किया और राकेश किशोर को काबू में लेकर सुप्रीम कोर्ट परिसर से बाहर निकाल दिया। बाद में उन्हें हिरासत में ले लिया गया और उनसे पूछताछ की जा रही है। यह घटना कुछ ही मिनटों की थी,लेकिन उसने अदालत के भीतर का माहौल तनावपूर्ण बना दिया। इसके बावजूद मुख्य न्यायाधीश गवई ने पूरी शांति और संयम के साथ कार्यवाही जारी रखी,जिससे न्यायपालिका की गरिमा और अनुशासन का उच्च उदाहरण स्थापित हुआ।
सीजेआई गवई ने उस समय किसी प्रकार की कठोर प्रतिक्रिया नहीं दी और अदालत की कार्यवाही को प्रभावित नहीं होने दिया। उन्होंने न्यायिक मर्यादा का पालन करते हुए शांति बनाए रखी,जो उनके परिपक्व नेतृत्व और संतुलन का परिचायक है। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि अगर न्यायमूर्ति गवई उस क्षण भावनाओं में बह जाते,तो यह न्यायपालिका की गरिमा पर और अधिक असर डाल सकता था।
घटना के बाद सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन (एस.सी.ए.ओ.आर.ए.) ने एक आपात बैठक बुलाकर इस पूरे मामले की कड़ी निंदा की। एसोसिएशन ने एक प्रस्ताव पारित करते हुए कहा कि एक वकील द्वारा न्यायालय के अंदर इस प्रकार का असंयमित और अपमानजनक आचरण न केवल मुख्य न्यायाधीश का अपमान है,बल्कि यह न्यायपालिका की स्वतंत्रता और जनता के विश्वास पर भी सीधा आघात है।
एसोसिएशन ने अपने बयान में कहा, “कोर्ट और बार के बीच परस्पर सम्मान भारतीय न्याय प्रणाली की नींव है। ऐसे व्यवहार को किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता। यह न केवल पेशेवर नैतिकता का उल्लंघन है,बल्कि न्यायिक संस्थाओं की गरिमा के लिए भी खतरा है।” एसोसिएशन ने यह भी अपील की कि सभी वकील अपने आचरण में संयम बरतें और न्यायपालिका के प्रति सम्मान का भाव बनाए रखें।
इस घटना को लेकर वरिष्ठ अधिवक्ताओं और न्यायिक समुदाय में भी गहरा रोष देखा गया। कई वरिष्ठ वकीलों ने कहा कि अदालत में इस तरह का हंगामा न केवल अनुचित है,बल्कि यह उस आचरण का भी उल्लंघन है,जो एक वकील से अपेक्षित होता है।
वहीं,कानूनी विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि सुप्रीम कोर्ट परिसर में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की आवश्यकता है। कोर्ट के अंदर किसी भी व्यक्ति द्वारा इस तरह की हरकत से यह सवाल उठता है कि क्या अदालत की गरिमा और सुरक्षा पर्याप्त रूप से सुनिश्चित है। इस दिशा में आने वाले दिनों में न्यायपालिका और गृह मंत्रालय के बीच चर्चा होने की संभावना जताई जा रही है।
राजनीतिक दलों और नागरिक समाज के विभिन्न वर्गों ने भी इस घटना पर नाराजगी व्यक्त की है। सभी ने एक सुर में कहा कि यह सिर्फ मुख्य न्यायाधीश पर हमला नहीं,बल्कि भारतीय न्यायपालिका की गरिमा पर प्रहार है।
प्रधानमंत्री मोदी के वक्तव्य ने इस घटना को राष्ट्रीय स्तर पर गंभीरता से लिए जाने का संकेत दिया है। उन्होंने जिस तरह सीजेआई से बात कर उन्हें समर्थन और सम्मान व्यक्त किया,उससे यह संदेश गया है कि सरकार न्यायपालिका की स्वतंत्रता और गरिमा की रक्षा के प्रति पूर्ण रूप से प्रतिबद्ध है।
सीजेआई गवई ने जिस शांति और संतुलन के साथ इस स्थिति को संभाला,उसने देशभर में न्यायपालिका की प्रतिष्ठा को और मजबूत किया है। इस घटना ने भले ही देश को क्षुब्ध किया हो,लेकिन साथ ही इसने यह भी दिखाया कि भारतीय न्याय व्यवस्था अपने मूल्यों और मर्यादा के प्रति कितनी दृढ़ है।
अब यह देखना होगा कि सुप्रीम कोर्ट प्रशासन और बार काउंसिल इस मामले में वकील राकेश किशोर के खिलाफ क्या अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हैं। परंतु इतना तय है कि यह घटना भविष्य में न्यायालयों में आचरण की मर्यादाओं पर एक नई चर्चा को जन्म दे चुकी है।
