चेन्नई,22 मई (युआईटीवी)- तमिलनाडु की राजनीति में इन दिनों बड़े प्रशासनिक और संगठनात्मक बदलावों का दौर जारी है। राज्य सरकार ने मंत्रिपरिषद विस्तार की प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए दो और विधायकों को कैबिनेट में शामिल करने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री की अनुशंसा पर राज्यपाल ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इस कदम को राज्य की सत्ताधारी पार्टी की उस रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है,जिसके तहत क्षेत्रीय संतुलन मजबूत करने,नए चेहरों को अवसर देने और प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने की कोशिश की जा रही है। हाल ही में बड़ी संख्या में नए मंत्रियों को शामिल किए जाने के बाद यह विस्तार राज्य की राजनीति में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
लोक भवन से जारी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार,मुख्यमंत्री ने पापनासम विधानसभा क्षेत्र से विधायक ए.एम. शाहजहां और तिंडीवनम विधानसभा क्षेत्र से विधायक वन्नी अरसु को मंत्रिपरिषद में शामिल करने की सिफारिश की थी। राज्यपाल ने इस प्रस्ताव को तुरंत मंजूरी प्रदान कर दी। इसके बाद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई कि सरकार आगामी चुनावी और प्रशासनिक चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए अपने मंत्रिमंडल को नए स्वरूप में ढालने की तैयारी कर रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार,इन दोनों नेताओं का चयन केवल मंत्रिमंडल विस्तार तक सीमित नहीं है,बल्कि इसके पीछे व्यापक राजनीतिक संदेश भी छिपा है। ए.एम. शाहजहां दक्षिण तमिलनाडु के पापनासम क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं,जबकि वन्नी अरसु उत्तर-पूर्वी तमिलनाडु के तिंडीवनम क्षेत्र से आते हैं। ऐसे में सरकार ने राज्य के अलग-अलग हिस्सों को प्रतिनिधित्व देने की कोशिश की है। माना जा रहा है कि इससे क्षेत्रीय असंतुलन की शिकायतों को कम करने में मदद मिलेगी और पार्टी संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूती मिलेगी।
इससे पहले गुरुवार को राज्य सरकार ने 23 नए मंत्रियों को मंत्रिपरिषद में शामिल किया था। राज्यपाल द्वारा विभागों के आवंटन को मंजूरी दिए जाने के बाद अब नई टीम ने अपने-अपने विभागों का कामकाज सँभालना शुरू कर दिया है। इस बड़े फेरबदल को सरकार की प्रशासनिक प्राथमिकताओं में बदलाव और शासन प्रणाली को अधिक परिणामकारी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
नए मंत्रियों को विभिन्न महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। श्रीनाथ को मत्स्य पालन विभाग का प्रभार दिया गया है,जबकि कमाली एस. को पशुपालन विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई है। सी. विजयलक्ष्मी को दुग्ध और डेयरी विकास विभाग दिया गया है और आरवी रंजीत कुमार को वन विभाग सौंपा गया है। इसी तरह विनोद को कृषि और किसान कल्याण विभाग की जिम्मेदारी मिली है,जबकि राजीव को पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन विभाग का कार्यभार दिया गया है।
सरकार ने शहरी विकास और बुनियादी ढाँचे से जुड़े विभागों में भी नए चेहरों को जिम्मेदारी दी है। बी. राजकुमार को आवास और शहरी विकास विभाग का प्रभार मिला है,जबकि वी. गांधीराज को सहकारिता विभाग सौंपा गया है। मथन राजा पी. को सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं जगदीश्वरी के. को समाज कल्याण और महिला सशक्तीकरण विभाग का कार्यभार मिला है। पर्यटन विभाग की जिम्मेदारी राजेश कुमार एस. को दी गई है।
इसके अलावा सरकार ने पारंपरिक उद्योगों और आर्थिक गतिविधियों से जुड़े विभागों में भी फेरबदल किया है। एम. विजय बालाजी को हथकरघा और वस्त्र विभाग सौंपा गया है। लोगेश तमिलसेल्वन डी. को वाणिज्यिक कर और पंजीकरण विभाग की जिम्मेदारी मिली है,जबकि विजय तमिलन पार्थिबन ए. को परिवहन विभाग का प्रभार दिया गया है। रमेश को हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती विभाग सौंपा गया है।
राज्य सरकार ने शिक्षा और तकनीक जैसे आधुनिक क्षेत्रों पर भी विशेष ध्यान दिया है। पी. विश्वनाथन को उच्च शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं राज्य में पहली बार गठित कृत्रिम बुद्धिमत्ता,सूचना प्रौद्योगिकी और डिजिटल सेवा विभाग का नेतृत्व कुमार आर. को सौंपा गया है। इसे राज्य सरकार की भविष्य की तकनीकी और डिजिटल रणनीति के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।
इसके अलावा सामाजिक और श्रम कल्याण से जुड़े विभागों में भी नए चेहरों को मौका मिला है। थेन्नारासु के. को अनिवासी तमिल कल्याण विभाग का प्रभार दिया गया है,जबकि वी. संपत कुमार को पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग सौंपा गया है। मोहम्मद फरवास को श्रम कल्याण और कौशल विकास विभाग की जिम्मेदारी मिली है। वहीं डी. सरथकुमार को मानव संसाधन प्रबंधन विभाग दिया गया है।
वित्त और विकास जैसे अहम विभाग भी नए मंत्रियों को सौंपे गए हैं। एन. मैरी विल्सन को वित्त,योजना और विकास विभाग का कार्यभार दिया गया है, जबकि विघ्नेश के. को निषेध और आबकारी विभाग की जिम्मेदारी मिली है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इन नियुक्तियों के जरिए सरकार प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने के साथ-साथ सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरणों को भी संतुलित करने की कोशिश कर रही है।
तमिलनाडु में हुए इस व्यापक मंत्रिपरिषद विस्तार को आने वाले समय की राजनीति से जोड़कर भी देखा जा रहा है। राज्य सरकार यह संदेश देना चाहती है कि वह अनुभव और नए नेतृत्व के बीच संतुलन बनाकर शासन चलाने के पक्ष में है। साथ ही अलग-अलग क्षेत्रों और सामाजिक वर्गों को प्रतिनिधित्व देकर पार्टी अपने जनाधार को और मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है। आने वाले महीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि नई टीम सरकार की योजनाओं और प्रशासनिक लक्ष्यों को किस तरह आगे बढ़ाती है।
