मुंबई,29 जुलाई (युआईटीवी)- टेलीविजन की दुनिया में रियलिटी शो अक्सर मनोरंजन, हँसी-मजाक,विवादों और रोजमर्रा के ड्रामे के लिए जाने जाते हैं। दर्शक इन शोज को अपनी दिनचर्या की थकान मिटाने और कुछ हल्का-फुल्का देखने के उद्देश्य से देखते हैं। लेकिन कभी-कभी इन रियलिटी शोज के मंच पर कुछ ऐसी सच्चाइयाँ सामने आ जाती हैं, जो न केवल वहाँ मौजूद लोगों को बल्कि टेलीविजन स्क्रीन के उस पार बैठे लाखों दर्शकों को भी भीतर तक झकझोर कर रख देती हैं। लोकप्रिय और चर्चित रियलिटी शो ‘लॉक अप: सच या सजा’ के हालिया एपिसोड में बिल्कुल ऐसा ही देखने को मिला। इस शो का यह एपिसोड मनोरंजन से कोसों दूर,एक गहरी और रुला देने वाली वास्तविकता का गवाह बना। शो के इस भावुक कर देने वाले एपिसोड में मनोरंजन जगत के तीन जाने-माने चेहरों— अभिनेत्री शिवांगी जोशी,अभिनेत्री और कंटेंट क्रिएटर श्रेया कालरा और लोकप्रिय टेलीविजन अभिनेता हर्षद चोपड़ा— ने अपने जीवन के उन काले और खौफनाक पन्नों को खोला,जिन्हें उन्होंने सालों से दुनिया की नजरों से छिपा कर रखा था। इन तीनों ने पूरे देश के सामने यह स्वीकार किया कि बचपन के मासूम दिनों में वे यौन उत्पीड़न जैसी भयानक और दर्दनाक त्रासदी का शिकार हुए थे। उनके इन खुलासों ने शो में मौजूद सभी प्रतियोगियों,होस्ट और दर्शकों को आंसुओं में डुबो दिया।
हमारे समाज में आज भी बाल यौन शोषण एक ऐसा विषय है,जिस पर लोग खुलकर बात करने से कतराते हैं। इसे एक कलंक की तरह देखा जाता है और अक्सर पीड़ित को ही चुप रहने की सलाह दी जाती है,ताकि परिवार की ‘इज्जत’ बनी रहे,लेकिन राष्ट्रीय टेलीविजन पर इन तीन सितारों का अपने डर और आघात से बाहर निकलकर अपनी आपबीती सुनाना एक बेहद साहसिक कदम है। यह इस बात का प्रमाण है कि शोहरत और चकाचौंध के पीछे भी गहरे घाव छिपे हो सकते हैं। इन तीनों की कहानियों में एक बात जो सबसे ज्यादा डराने वाली और समान थी,वह यह कि उनके साथ यह घिनौनी हरकत किसी अजनबी ने नहीं,बल्कि उन लोगों ने की थी जिन पर उनके परिवार सबसे ज्यादा भरोसा करते थे। यह विश्वासघात की वह पराकाष्ठा है जो एक बच्चे के मन में हमेशा के लिए दुनिया के प्रति डर पैदा कर देती है।
अभिनेत्री शिवांगी जोशी,जिन्होंने अपनी बेहतरीन अदाकारी से लाखों दिलों में जगह बनाई है,ने शो में अपने अतीत के एक बेहद दर्दनाक अध्याय को साझा किया। शो के फॉर्मेट के अनुसार, जब शिवांगी जोशी को ‘ब्रेड और बटर’ (रोजी-रोटी) कोड वर्ड से जुड़ा अपना सबसे गहरा राज बताने के लिए कहा गया,तो उनकी आंखें नम हो गईं। उन्होंने अपने बचपन के संघर्षों को याद करते हुए बताया कि एक समय ऐसा था,जब उनके पिता को उनके व्यापार में भारी नुकसान का सामना करना पड़ा था। उस आर्थिक तंगी के दौर में परिवार को कई तरह की परेशानियों से जूझना पड़ा था। ऐसे कठिन और चुनौतीपूर्ण समय में उनके कुछ रिश्तेदारों ने आगे आकर उनके परिवार की मदद की थी और बुनियादी जरूरतें पूरी करने में उनका साथ दिया था। इन्ही रिश्तेदारों में से एक व्यक्ति था,जिसे शिवांगी की माँ अपना मुँह बोला भाई मानती थीं। एक ऐसा रिश्ता जो रक्षा और सुरक्षा का प्रतीक होना चाहिए,वही शिवांगी के लिए जिंदगी का सबसे बड़ा दुःस्वप्न बन गया।
शिवांगी ने भारी मन से बताया कि जब उन्होंने अपने परिवार के सामने मुंबई जाने और अभिनय की दुनिया में अपना करियर बनाने की इच्छा जाहिर की,तो उनकी माँ के उसी मुँह बोले भाई ने इस स्थिति का फायदा उठाने की कोशिश की। वह व्यक्ति शिवांगी के पास आता था और उन्हें समझाता था कि अगर वह मुंबई जाकर एक सफल अभिनेत्री बनना चाहती हैं,तो उन्हें कार चलाना जरूर आना चाहिए। कार सिखाने के इसी बहाने उसने अपनी घिनौनी साजिश रची। शिवांगी ने बताया कि वह उन्हें कार चलाना सिखाने के बहाने अपने पास बिठाता था और शारीरिक रूप से उनके करीब आने की कोशिश करता था। वह कहता था कि पास बैठने से ड्राइविंग जल्दी सीखी जा सकती है। उस समय शिवांगी बहुत छोटी थीं। एक मासूम बच्ची होने के नाते उन्हें पूरी तरह से यह समझ नहीं आता था कि उस व्यक्ति के इरादे क्या हैं,लेकिन उन्हें अंदर से यह बिल्कुल अच्छा नहीं लगता था। उनका मन गवाही नहीं देता था कि जो हो रहा है वह सही है। एक दिन जब शिवांगी घर में बिल्कुल अकेली थीं,तब उस व्यक्ति ने सारी हदें पार कर दीं। उसने एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री के काम करने के तरीके और वहाँ के संघर्षों को समझाने के बहाने उनके साथ जबरदस्ती करने और गलत हरकत करने की कोशिश की।
शिवांगी ने हिम्मत दिखाते हुए उस व्यक्ति को जोर से धक्का दे दिया। इस आत्मरक्षा के कदम से वह दरिंदा बौखला गया और गुस्से में आकर उसने शिवांगी को जमीन पर पटक दिया। वह पल शिवांगी के लिए किसी मौत के साये से कम नहीं था,लेकिन उसी वक्त, जैसे किसी चमत्कार की तरह,उनके माता-पिता घर लौट आए। शिवांगी के पिता ने उनकी चीख और गिरने की आवाज सुन ली थी। वे तुरंत वहाँ पहुँचे और अपनी बेटी को उस भयानक स्थिति से बचाया। हालाँकि,शिवांगी शारीरिक रूप से बच गई थीं,लेकिन इस घटना ने उनके बाल मन पर एक गहरा मानसिक आघात छोड़ दिया था। शिवांगी ने रोते हुए बताया कि इस घटना के बाद वह इतनी ज्यादा डर गई थीं कि कई दिनों तक उन्होंने घर से बाहर कदम तक नहीं निकाला था। किसी भी इंसान पर से उनका भरोसा पूरी तरह उठ गया था।
शिवांगी की इस दर्दनाक कहानी के बाद,शो की एक अन्य कंटेस्टेंट और मशहूर कंटेंट क्रिएटर श्रेया कालरा ने भी अपनी चुप्पी तोड़ी। श्रेया कालरा की कहानी भी यह साबित करती है कि घर की चारदीवारी,जिसे दुनिया की सबसे सुरक्षित जगह माना जाता है, कभी-कभी वहीं सबसे बड़े खतरे पनप रहे होते हैं। श्रेया ने अपनी आपबीती सुनाते हुए बताया कि जब वह महज तेरह साल की एक किशोर अवस्था में थीं,तब उनके अपने ही चचेरे भाई (कजिन) ने उनके साथ छेड़छाड़ की थी। यह घटना इतनी व्यक्तिगत और संवेदनशील है कि श्रेया ने आज तक यह बात अपने माता-पिता को नहीं बताई है। उनके परिवार में इस दर्दनाक सच के बारे में कोई नहीं जानता। श्रेया ने बताया कि केवल उनके पार्टनर ऋषभ जायसवाल ही इस राज से वाकिफ हैं,जिन्होंने इस मुश्किल सफर में उनका साथ दिया है।
श्रेया ने उस मनहूस समय को याद करते हुए बताया कि वह अक्सर अपनी नानी के घर जाया करती थीं। वहाँ का माहौल बहुत पारिवारिक हुआ करता था और सभी लोग हॉल में एक साथ जमीन पर या गद्दों पर सोते थे। रात के उसी अँधेरे और परिवार की मौजूदगी के बीच उनके कजिन ने उनके साथ गलत हरकत की। श्रेया ने बताया कि उस समय नींद में उन्हें ठीक से एहसास भी नहीं हो पाता था कि उनके साथ क्या हो रहा है। उनका कजिन उन्हें गलत तरीके से पकड़ता था। श्रेया के लिए यह खुलासा करना इसलिए भी ज्यादा कठिन था क्योंकि इसके पीछे एक बहुत बड़ी पारिवारिक उलझन और उनकी माँ की भावनाएँ जुड़ी हुई हैं। श्रेया ने स्पष्ट किया कि वह राष्ट्रीय टेलीविजन पर यह सब सहानुभूति बटोरने के लिए नहीं कह रही हैं। वह खुद को एक बेचारी या पीड़ित की तरह पेश नहीं करना चाहतीं। उनका मकसद सिर्फ सच को सामने लाना है,लेकिन वह यह भी नहीं चाहतीं कि उनकी माँ को इस बात की भनक लगे। इसके पीछे का कारण बताते हुए श्रेया ने कहा कि जिस चचेरे भाई ने उनके साथ यह घिनौना कृत्य किया था,उसकी अपनी माँ का देहांत हो चुका था। उसकी माँ की मौत के बाद,श्रेया की माँ ने ही उस लड़के को लगभग तीन साल तक अपने सगे बेटे की तरह पाला था और उसकी देखभाल की थी। श्रेया जानती हैं कि अगर उनकी माँ को यह सच्चाई पता चली कि जिस बच्चे को उन्होंने इतनी ममता दी, उसी ने उनकी अपनी बेटी की जिंदगी बर्बाद करने की कोशिश की,तो उनकी माँ पूरी तरह टूट जाएँगी। इसी डर और अपनी माँ को दुख से बचाने के लिए श्रेया ने सालों तक इस भारी दर्द को अपने सीने में दबाए रखा।
शो का माहौल उस समय और भी ज्यादा बोझिल और गमगीन हो गया जब टेलीविजन के सबसे चहेते और सफल अभिनेताओं में से एक,हर्षद चोपड़ा ने भी अपने जीवन का सबसे कड़वा सच दुनिया के सामने रखा। हर्षद चोपड़ा,जिन्हें दर्शक हमेशा एक मजबूत और रोमांटिक हीरो के रूप में पर्दे पर देखते आए हैं,उन्होंने बताया कि लड़कों के साथ भी बचपन में ऐसे अपराध होते हैं और समाज अक्सर इसे नजरअंदाज कर देता है। हर्षद चोपड़ा ने रुंधे हुए गले से बताया कि बचपन में वह भी यौन उत्पीड़न का शिकार हुए थे। इस घटना ने उनके दिमाग पर ऐसा असर डाला था कि उन्हें इस आघात से पूरी तरह बाहर निकलने में सालों का लंबा वक्त लग गया। उन्होंने जीवन में कभी किसी से इस बारे में बात करने की हिम्मत नहीं जुटाई क्योंकि वह अंदर से पूरी तरह ‘डर गए थे।’
शो के फॉर्मेट के अनुसार जब हर्षद के सामने ‘बचपन’ का कोड वर्ड आया,तो उनके अतीत के घाव हरे हो गए। उन्होंने अपनी उस छिपी हुई खौफनाक याद को ताजा करते हुए कहा कि वह उस समय लगभग नौ या दस साल के एक छोटे बच्चे थे। हर्षद ने समाज की एक बहुत बड़ी सच्चाई की तरफ इशारा करते हुए कहा कि हमारे माता-पिता अक्सर अपने बच्चों को उन लोगों के भरोसे छोड़ देते हैं,जिन्हें वे अपना मानते हैं या जिन पर वे बहुत ज्यादा भरोसा करते हैं। हर्षद के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ था। एक बार उनके माता-पिता ने उन्हें कुछ ऐसे ही भरोसेमंद लोगों के पास छोड़ दिया था। ये वे लोग थे जिन पर केवल हर्षद का परिवार ही नहीं,बल्कि उनकी पूरी कम्युनिटी (समुदाय) आँख मूँदकर भरोसा करती थी। हर्षद ने बताया कि वह बचपन में बहुत ज्यादा शांत और दब्बू किस्म के बच्चे थे, जो अपनी बात आसानी से किसी के सामने नहीं रख पाते थे।
हर्षद ने उस काली रात का जिक्र करते हुए कहा कि जब वह उन्हीं परिचित और भरोसेमंद लोगों के घर पर सो रहे थे,तो आधी रात को उन्हें अचानक एहसास हुआ कि उनके साथ कुछ बहुत ही गलत हो रहा है। नींद से जागने के बावजूद,एक छोटे बच्चे के रूप में वह इतने ज्यादा घबरा गए थे कि उन्होंने कुछ भी न कहने का फैसला किया। उन्होंने डर के मारे ऐसा बर्ताव किया जैसे वह गहरी नींद में सो रहे हों। हर्षद ने बताया कि उन्होंने इसके बारे में पहले कभी किसी को इसलिए नहीं बताया क्योंकि उन्हें उस उम्र में इस बात की बिल्कुल भी समझ नहीं थी कि उनके साथ असल में क्या घटा था। हर्षद ने अपनी उस दर्दनाक स्मृति को और कुरेदते हुए बताया कि उनका घर का निकनेम ‘मोनू’ है। उस रात,उस दरिंदे ने उन्हें कुछ दिखाने के बहाने बालकनी में बुलाया। मजबूरी में हर्षद को उठकर वहाँ जाना पड़ा। बालकनी में ले जाकर उस व्यक्ति ने हर्षद को उठाया और उनके साथ कुछ ऐसी गंदी हरकतें कीं जो उस मासूम बच्चे की समझ से पूरी तरह परे थीं। हर्षद को यह समझ नहीं आ रहा था कि वह इस बारे में किससे पूछें,कैसे पूछें और क्या पूछें। वह बस बुरी तरह से खौफजदा थे।
अपनी कहानी सुनाते-सुनाते हर्षद चोपड़ा पूरी तरह से टूट गए और उनके आँसू छलक पड़े। इस दौरान वहाँ मौजूद हर एक शख्स रो रहा था। भावनाओं से भरे हर्षद ने टेलीविजन के माध्यम से देश के सभी माता-पिता से एक बहुत ही मार्मिक और महत्वपूर्ण अपील की। उन्होंने हाथ जोड़कर और रोते हुए सभी अभिभावकों से विनती की कि वे अपने छोटे बच्चों को कभी भी,किसी भी परिस्थिति में किसी और के पास अकेला न छोड़ें,चाहे वह व्यक्ति कितना भी करीबी या भरोसेमंद क्यों न हो। हर्षद ने माता-पिता से यह भी अनुरोध किया कि वे अपने बच्चों के साथ संवाद स्थापित करें,उनसे बात करें और उन्हें ‘गुड टच’ और ‘बैड टच’ के बारे में जागरूक करें। एक बच्चे का अपने माता-पिता के साथ ऐसा रिश्ता होना चाहिए कि वह बिना किसी डर के अपनी हर बात उनसे साझा कर सके।
‘लॉक अप: सच या सजा’ का यह एपिसोड केवल एक टेलीविजन कार्यक्रम का हिस्सा नहीं रह गया,बल्कि यह हमारे समाज के लिए एक बहुत बड़ा आइना बन गया है। शिवांगी जोशी,श्रेया कालरा और हर्षद चोपड़ा का यह दर्द केवल इन तीन व्यक्तियों का दर्द नहीं है, बल्कि यह उन हजारों-लाखों मासूम बच्चों की अनकही चीख है,जिनका बचपन किसी करीबी के विश्वासघात तले कुचल दिया जाता है। इन तीनों सितारों ने अपने दर्द को दुनिया के सामने रखकर जो हिम्मत दिखाई है,वह काबिले तारीफ है। उनका यह कदम समाज में एक नई बहस को जन्म दे रहा है और माता-पिता को यह सोचने पर मजबूर कर रहा है कि बच्चों की सुरक्षा केवल बाहरी दुनिया से नहीं,बल्कि घर की चारदीवारी और अपनों के बीच भी सुनिश्चित की जानी चाहिए। यह एपिसोड हमेशा याद दिलाता रहेगा कि बच्चों की सुरक्षा में किसी भी प्रकार की लापरवाही या अंधे विश्वास की कीमत एक बच्चे को अपने पूरे जीवन के मानसिक आघात के रूप में चुकानी पड़ सकती है।
