नई दिल्ली,2 दिसंबर (युआईटीवी)- श्रीलंका में चक्रवात ‘दित्वाह’ से आई विनाशकारी तबाही के बाद भारत एक बार फिर अपने पड़ोसी देशों के संकट में सबसे आगे खड़े होने की परंपरा को निभा रहा है। सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके से फोन पर बातचीत कर उन्हें हर संभव सहायता प्रदान करने का भरोसा दिया। पीएम मोदी ने श्रीलंका में आए भीषण चक्रवात से हुई भारी जान-माल की हानि पर गहरी संवेदना व्यक्त की और कहा कि भारत इस कठिन समय में श्रीलंका के लोगों के साथ पूरी मजबूती और एकजुटता के साथ खड़ा है।
चक्रवात ‘दित्वाह’ ने पिछले सप्ताह श्रीलंका के कई हिस्सों में भारी तबाही मचाई थी। तेज हवाओं,बाढ़ और भूस्खलन की वजह से पूरे देश के लाखों लोग प्रभावित हुए। आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार,अब तक 316,366 परिवारों के लगभग 11,51,776 लोग प्रभावित हुए हैं। सोमवार शाम तक मरने वालों की संख्या बढ़कर 366 हो गई,जबकि 367 लोग अभी भी लापता हैं। हजारों घर बर्बाद हो चुके हैं और कई इलाकों में जनजीवन ठप पड़ा है। ऐसे वक्त में भारत द्वारा तत्काल राहत सामग्री और बचाव दल भेजना श्रीलंका के लिए बड़ी राहत साबित हुआ है।
प्रधानमंत्री मोदी ने बातचीत में बताया कि भारत की ओर से चलाया जा रहा ‘ऑपरेशन सागर बंधु’ पूरी गति से जारी रहेगा। यह अभियान भारतीय नौसेना,वायु सेना और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) के विशेषज्ञों के माध्यम से पड़ोसी देशों को मानवीय सहायता प्रदान करने का एक स्थापित तंत्र है। पीएम मोदी ने कहा कि भारत ‘महासागर’ विजन और ‘फर्स्ट रिस्पॉन्डर’ की अपनी भूमिका के अनुरूप,श्रीलंका के पुनर्वास और बहाली के प्रयासों में निरंतर सहयोग करता रहेगा,ताकि प्रभावित क्षेत्रों में सामान्य जीवन जल्द बहाल हो सके।
प्रधानमंत्री ने यह भी रेखांकित किया कि भारत न केवल वर्तमान राहत कार्यों में सहायता करेगा,बल्कि श्रीलंका की दीर्घकालिक जरूरतों—जैसे सार्वजनिक सेवाओं की बहाली,बुनियादी ढाँचे की मरम्मत और आजीविका के पुनर्निर्माण में भी हर संभव मदद देगा। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदा से जूझ रहे श्रीलंका के लोगों की पीड़ा को भारत हमेशा अपनी जिम्मेदारी समझता है और यही कारण है कि आपदा के कुछ ही घंटों के भीतर भारतीय सहायता दल मौके पर पहुँच गए।
इस बातचीत का आधिकारिक विवरण जारी करते हुए भारत सरकार ने बताया कि राष्ट्रपति दिसानायके ने प्रधानमंत्री मोदी और भारतीय सरकार के प्रति गहरा आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि भारत की त्वरित प्रतिक्रिया ने कई जिंदगियों को बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और संकट की इस घड़ी में भारतीय सहायता ने श्रीलंका के लोगों को नई उम्मीद दी है। श्रीलंकाई राष्ट्रपति ने विशेष रूप से बचाव दलों और राहत सामग्री के तत्काल प्रेषण की सराहना की और कहा कि भारत की यह मानवीय पहल दोनों देशों की दोस्ती को और मजबूत बनाती है।
राष्ट्रपति दिसानायके ने यह भी कहा कि हाल के वर्षों में भारत द्वारा अपनाए गए “पड़ोसी प्रथम” सिद्धांत और क्षेत्रीय सहयोग की नीति ने दक्षिण एशिया में मानवीय साझेदारी का नया मानक स्थापित किया है। उन्होंने आशा जताई कि पुनर्वास प्रक्रिया के दौरान भी भारत का मार्गदर्शन और सहयोग मिलता रहेगा,जिससे प्रभावित क्षेत्रों में जल्दी स्थिति सामान्य हो सके।
भारत की ओर से दिए गए सहयोग में खाद्य सामग्री,दवाइयाँ,तंबू,पानी शुद्धिकरण उपकरण,बिजली जनरेटर,रेडी-टू-ईट पैकेट और जीवनरक्षक उपकरण शामिल हैं। भारतीय नौसेना के कई जहाज श्रीलंका के तटीय इलाकों में राहत सामग्री पहुँचा रहे हैं,जबकि हवाई मार्ग से भी जरुरी आपूर्ति भेजी जा रही है। एनडीआरएफ की टीमें उन इलाकों में तैनात हैं,जहाँ भूस्खलन और जलजमाव की वजह से लोगों का निकलना मुश्किल हो गया है।
बातचीत के अंत में दोनों नेताओं ने वर्तमान स्थिति की निगरानी और भविष्य में आवश्यक कदमों के लिए नियमित संपर्क बनाए रखने पर सहमति जताई। यह बातचीत न केवल एक मानवीय आपदा के समय सहयोग का प्रतीक है,बल्कि भारत और श्रीलंका के ऐतिहासिक,सांस्कृतिक और भौगोलिक संबंधों को भी मजबूत बनाती है।
चक्रवात ‘दित्वाह’ ने श्रीलंका के सामने अभूतपूर्व चुनौती खड़ी कर दी है। कई ग्रामीण और तटीय क्षेत्रों में तबाही इतनी व्यापक है कि पुनर्वास कार्यों में महीनों लग सकते हैं। हालाँकि,भारत जैसे करीबी मित्र और क्षेत्रीय साझेदार की त्वरित और प्रभावी सहायता ने श्रीलंका के लोगों में उम्मीद जगाई है। आने वाले दिनों में जब देश पुनर्निर्माण की ओर बढ़ेगा,भारत का सहयोग उसके लिए एक अहम सहारा साबित होगा।
