मुंबई,26 मार्च (युआईटीवी)- डिजिटल युग में जहाँ तकनीक ने लोगों के जीवन को पहले से कहीं अधिक आसान बना दिया है,वहीं इसके दुरुपयोग की घटनाएँ भी तेजी से सामने आ रही हैं। खासतौर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के जरिए फर्जी तस्वीरें और वीडियो तैयार कर सोशल मीडिया पर फैलाने का चलन बढ़ता जा रहा है। इसी कड़ी में फिल्म धुरंधर: द रिवेंज को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है,जिसमें एआई से बनाए गए कथित फेक विजुअल्स ने फिल्म की छवि को प्रभावित करने की कोशिश की है।
इस पूरे मामले पर फिल्म के निर्देशक आदित्य धर ने खुलकर अपनी प्रतिक्रिया दी है और सोशल मीडिया पर फैलाए जा रहे कंटेंट को पूरी तरह भ्रामक और झूठा बताया है। उन्होंने इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट साझा करते हुए कहा कि कुछ लोग फिल्म के आधिकारिक प्रमोशनल मैटेरियल के साथ छेड़छाड़ कर रहे हैं और एआई की मदद से उसे इस तरह बदल रहे हैं कि उससे गलत संदेश फैलाया जा सके।
आदित्य धर ने अपने बयान की शुरुआत दर्शकों का आभार जताते हुए की। उन्होंने कहा कि फिल्म को देश और विदेश दोनों जगहों पर जबरदस्त प्रतिक्रिया मिल रही है,जो उनके लिए बेहद खुशी की बात है,लेकिन इसी सकारात्मक माहौल के बीच कुछ लोग जानबूझकर नकारात्मकता फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। उनके मुताबिक,असली फुटेज और तस्वीरों को एडिट कर इस तरह का कंटेंट तैयार किया जा रहा है,जिससे फिल्म की छवि को नुकसान पहुँचाया जा सके।
इस विवाद के केंद्र में एक खास तस्वीर रही,जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई। इस तस्वीर में अभिनेता रणवीर सिंह के किरदार ‘हमजा’ यानी ‘जसकीरत’ को पगड़ी पहनकर स्मोकिंग करते हुए दिखाया गया था। इस तस्वीर को लेकर कई तरह की प्रतिक्रियाएँ सामने आईं और कुछ वर्गों में नाराजगी भी देखने को मिली। हालाँकि,निर्देशक ने साफ तौर पर कहा कि यह तस्वीर पूरी तरह फर्जी है और फिल्म या उसके किसी भी आधिकारिक प्रमोशनल कंटेंट का हिस्सा नहीं है।
आदित्य धर ने इस पूरे मामले को एक सोची-समझी साजिश करार दिया। उन्होंने कहा कि इस तरह के फेक विजुअल्स जानबूझकर तैयार किए जा रहे हैं,ताकि लोगों को भड़काया जा सके और समाज में गलतफहमियाँ पैदा की जा सकें। उनके अनुसार,यह केवल फिल्म के खिलाफ नहीं,बल्कि व्यापक स्तर पर सामाजिक माहौल को भी प्रभावित करने की कोशिश है।
निर्देशक ने यह भी स्पष्ट किया कि फिल्म में हर किरदार और हर दृश्य को पूरी संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ पेश किया गया है। उन्होंने कहा कि जो लोग इस तरह की गलत तस्वीरें और वीडियो फैला रहे हैं,वे सच्चाई से पूरी तरह दूर हैं और उनका उद्देश्य केवल भ्रम फैलाना है। उन्होंने दर्शकों से अपील की कि वे केवल आधिकारिक स्रोतों पर ही भरोसा करें और सोशल मीडिया पर फैल रहे किसी भी संदिग्ध कंटेंट से सावधान रहें।
इस घटना ने एक बार फिर एआई तकनीक के दुरुपयोग को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि एआई के जरिए बनाए गए फेक कंटेंट इतने वास्तविक दिखते हैं कि आम लोगों के लिए असली और नकली में फर्क करना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में यह जरूरी हो जाता है कि लोग डिजिटल साक्षरता को बढ़ाएँ और किसी भी जानकारी को साझा करने से पहले उसकी सत्यता की जांच करें।
आदित्य धर ने अपने बयान में यह भी चेतावनी दी कि इस तरह के फर्जी कंटेंट बनाने और फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि उनकी टीम इस मामले पर नजर रखे हुए है और जो भी लोग इस तरह की गतिविधियों में शामिल पाए जाएँगे,उनके खिलाफ उचित कदम उठाए जाएँगे।
फिल्म इंडस्ट्री के लिए भी यह मामला एक चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है,जहाँ प्रमोशनल कंटेंट और क्रिएटिव मैटेरियल के साथ छेड़छाड़ कर गलत नैरेटिव बनाने की कोशिश की जा रही है। डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के बढ़ते प्रभाव के बीच इस तरह की घटनाएँ फिल्मों की छवि और उनकी व्यावसायिक सफलता को प्रभावित कर सकती हैं।
‘धुरंधर: द रिवेंज’ से जुड़ा यह विवाद केवल एक फिल्म तक सीमित नहीं है,बल्कि यह पूरे डिजिटल इकोसिस्टम के लिए एक चुनौती बनकर सामने आया है। एआई तकनीक जहाँ एक ओर संभावनाओं के नए द्वार खोल रही है,वहीं दूसरी ओर इसके दुरुपयोग को रोकने के लिए सख्त नियमों और जागरूकता की भी उतनी ही जरूरत है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस तरह के मामलों से निपटने के लिए सरकार,तकनीकी कंपनियाँ और समाज मिलकर क्या कदम उठाते हैं।
