फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो

फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो पर बढ़ा इस्तीफे का दबाव,नॉर्वे फुटबॉल महासंघ ने खुले तौर पर की पद छोड़ने की माँग

ओस्लो,8 अगस्त (युआईटीवी)- फीफा विश्व कप 2026 के समाप्त होने के बाद विश्व फुटबॉल की सर्वोच्च संस्था फीफा के अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। नॉर्वे फुटबॉल महासंघ की अध्यक्ष लिसे क्लेवनेस ने खुले तौर पर इन्फेंटिनो से पद छोड़ने की माँग करने का ऐलान किया है। उनका कहना है कि मौजूदा गवर्नेंस संकट के बीच फीफा का नेतृत्व करने के लिए इन्फेंटिनो के पास अब वह संस्थागत भरोसा नहीं रह गया है,जिसकी जरूरत एक वैश्विक खेल संस्था को स्थिर और पारदर्शी तरीके से चलाने के लिए होती है।

नॉर्वे फुटबॉल महासंघ की बोर्ड बैठक के बाद क्लेवनेस ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि फीफा और उसके महत्वपूर्ण हितधारकों के बीच भरोसा बुरी तरह प्रभावित हुआ है। उन्होंने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय फुटबॉल समुदाय इस समय कठिन दौर से गुजर रहा है और ऐसी स्थिति में नए नेतृत्व की आवश्यकता है। क्लेवनेस के मुताबिक,नॉर्वे फुटबॉल महासंघ इन्फेंटिनो से सीधे तौर पर अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने का अनुरोध करेगा।

क्लेवनेस ने कहा कि जियानी इन्फेंटिनो में अब फीफा का स्थिर तरीके से नेतृत्व करने के लिए जरूरी संस्थागत विश्वास नहीं बचा है। उन्होंने कहा कि फुटबॉल की वैश्विक संस्था इस समय शासन और पारदर्शिता से जुड़े गंभीर सवालों का सामना कर रही है। ऐसे समय में नेतृत्व को लेकर भरोसा बेहद महत्वपूर्ण है और नॉर्वे का मानना है कि फीफा को नई दिशा देने के लिए नए नेतृत्व की जरूरत है।

नॉर्वे की ओर से इन्फेंटिनो के इस्तीफे की माँग फीफा की एक विवादित निवेश योजना को वापस लिए जाने के बाद सामने आई है। फीफा ने एक प्रस्तावित निवेश योजना के तहत विश्व कप से जुड़े वाणिज्यिक अधिकारों में अल्पांश हिस्सेदारी बेचने की संभावना पर विचार किया था। इस प्रस्ताव को लेकर यूरोप सहित कई फुटबॉल महासंघों और परिसंघों ने कड़ी आपत्ति जताई थी।

विरोध करने वाले पक्षों ने इस योजना को लेकर पारदर्शिता,निर्णय लेने की प्रक्रिया और फीफा के सबसे बड़े टूर्नामेंट विश्व कप के भविष्य के नियंत्रण से जुड़े सवाल उठाए थे। कई संगठनों का मानना था कि इतने महत्वपूर्ण फैसले से पहले फीफा को अपने सदस्य महासंघों और संबंधित हितधारकों के साथ पर्याप्त चर्चा करनी चाहिए थी। इसी मुद्दे ने फीफा के शासन तंत्र को लेकर पुराने सवालों को फिर से सामने ला दिया।

बढ़ते विरोध के बीच फीफा ने अंततः प्रस्तावित निवेश योजना को वापस ले लिया। इन्फेंटिनो ने फीफा के सभी 211 सदस्य महासंघों से माफी भी माँगी। हालाँकि,योजना वापस लिए जाने के बावजूद विवाद समाप्त नहीं हुआ। आलोचकों का कहना है कि केवल प्रस्ताव वापस लेना पर्याप्त नहीं है और फीफा की निर्णय लेने की प्रक्रिया में व्यापक सुधार की आवश्यकता है।

नॉर्वे फुटबॉल महासंघ की अध्यक्ष लिसे क्लेवनेस ने कहा कि उनका महासंघ आने वाले हफ्तों में अन्य यूरोपीय फुटबॉल महासंघों से अपने रुख पर समर्थन हासिल करने की कोशिश करेगा। उन्होंने कहा कि नॉर्वे पहले से ही यूरोपीय फुटबॉल संघ और अन्य सदस्य महासंघों के साथ लगातार बातचीत कर रहा है। हालाँकि,कितने देश आधिकारिक रूप से इन्फेंटिनो के इस्तीफे की माँग का समर्थन करेंगे,यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।

क्लेवनेस ने कहा कि नॉर्वे का इरादा सीधे फीफा से बात करने का है। वह चाहती हैं कि महासंघ अपनी स्थिति स्पष्ट रूप से फीफा नेतृत्व के सामने रखे और इन्फेंटिनो से अध्यक्ष पद छोड़ने का अनुरोध करे। उन्होंने संकेत दिया कि नॉर्वे अकेले इस मुद्दे को उठाने के बजाय अन्य सदस्य देशों के साथ भी संवाद जारी रखेगा।

नॉर्वे फुटबॉल महासंघ लंबे समय से फीफा की कार्यप्रणाली और शासन व्यवस्था से जुड़े मुद्दे उठाता रहा है। लिसे क्लेवनेस ने 2022 में महासंघ की कमान संभाली थी और तब से उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय फुटबॉल प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही की जरूरत पर जोर दिया है। मौजूदा विवाद को भी नॉर्वे की ओर से पिछले कई वर्षों में फीफा के सामने उठाई गई चिंताओं की व्यापक कड़ी का हिस्सा माना जा रहा है।

यूरोपीय फुटबॉल संघ भी पहले ही फीफा के नेतृत्व और निर्णय प्रक्रिया को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर कर चुका है। उसका कहना है कि फीफा ने प्रस्तावित निवेश योजना को सामने लाने से पहले सदस्य महासंघों से पर्याप्त सलाह-मशविरा नहीं किया। यूरोप के कई फुटबॉल संगठनों के लिए यह मुद्दा सिर्फ एक निवेश प्रस्ताव तक सीमित नहीं है,बल्कि इससे फीफा के शासन और बड़े फैसलों में सदस्य देशों की भूमिका से जुड़े व्यापक सवाल जुड़े हैं।

यूरोपीय फुटबॉल संघ की ओर से यह भी संकेत दिया गया है कि यदि उचित सुधार नहीं किए गए तो भविष्य में बहिष्कार जैसे कड़े कदमों की संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता। हालाँकि,इस स्तर पर किसी व्यापक बहिष्कार का अंतिम फैसला सामने नहीं आया है,लेकिन इस तरह की चेतावनी फीफा के लिए गंभीर राजनीतिक और प्रशासनिक दबाव का संकेत मानी जा रही है।

विश्व कप जैसे दुनिया के सबसे बड़े खेल आयोजनों में से एक का संचालन फीफा के लिए सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों में शामिल है। ऐसे में विश्व कप से जुड़े वाणिज्यिक अधिकारों और उनके भविष्य के इस्तेमाल से संबंधित किसी भी फैसले का प्रभाव केवल आर्थिक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता। इसका सीधा संबंध टूर्नामेंट के प्रशासन,प्रसारण अधिकारों,प्रायोजन और वैश्विक फुटबॉल की दीर्घकालिक दिशा से भी होता है।

इसी वजह से प्रस्तावित निवेश योजना ने इतना बड़ा विवाद खड़ा किया। आलोचकों की चिंता थी कि यदि विश्व कप के वाणिज्यिक अधिकारों में बाहरी निवेशकों को हिस्सेदारी दी जाती है,तो इससे भविष्य में टूर्नामेंट के नियंत्रण और निर्णय लेने की प्रक्रिया पर प्रभाव पड़ सकता है। फीफा ने योजना वापस लेकर तत्काल विवाद को शांत करने की कोशिश जरूर की,लेकिन सदस्य महासंघों के बीच भरोसे का सवाल अभी भी बना हुआ है।

इन्फेंटिनो के लिए नॉर्वे की खुली इस्तीफे की माँग ऐसे समय आई है,जब फीफा विश्व कप 2026 के बाद अपने अगले चरण में प्रवेश कर रहा है। विश्व कप के बाद वैश्विक फुटबॉल समुदाय का ध्यान अब टूर्नामेंट से जुड़े प्रशासनिक और वित्तीय मुद्दों पर भी केंद्रित हो रहा है। नॉर्वे की पहल से आने वाले दिनों में फीफा नेतृत्व को लेकर बहस और तेज हो सकती है।

हालाँकि,अभी यह स्पष्ट नहीं है कि नॉर्वे के अलावा कितने फुटबॉल महासंघ इन्फेंटिनो के इस्तीफे की मांग का औपचारिक रूप से समर्थन करेंगे। नॉर्वे को उम्मीद है कि यूरोपीय फुटबॉल संघ के सदस्य महासंघों और अन्य देशों के साथ बातचीत से उसके रुख को व्यापक समर्थन मिल सकता है। यदि अधिक महासंघ इस माँग के साथ आते हैं,तो इन्फेंटिनो पर राजनीतिक और प्रशासनिक दबाव काफी बढ़ सकता है।

फिलहाल फीफा की ओर से नॉर्वे की इस माँग पर कोई अंतिम प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। लेकिन प्रस्तावित निवेश योजना,सदस्य महासंघों से कथित तौर पर पर्याप्त सलाह न लेने और पारदर्शिता से जुड़े सवालों ने फीफा के शासन मॉडल को बहस के केंद्र में ला दिया है। इन्फेंटिनो द्वारा सभी 211 सदस्य महासंघों से माफी माँगने के बावजूद विवाद पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।

नॉर्वे फुटबॉल महासंघ का रुख स्पष्ट है कि केवल प्रस्ताव वापस लेना पर्याप्त नहीं है और संस्था को नेतृत्व तथा शासन व्यवस्था में बदलाव की जरूरत है। अब आने वाले सप्ताह यह तय करने में महत्वपूर्ण होंगे कि नॉर्वे की माँग को कितने देश समर्थन देते हैं और फीफा नेतृत्व इस बढ़ते दबाव का किस तरह जवाब देता है। विश्व कप 2026 के बाद शुरू हुआ यह विवाद अंतर्राष्ट्रीय फुटबॉल प्रशासन के भविष्य और फीफा की निर्णय प्रक्रिया के लिए एक महत्वपूर्ण परीक्षा बनता दिखाई दे रहा है।