टाइगर श्रॉफ की कार पर फायरिंग मामले में बड़ा खुलासा,दिल्ली पुलिस ने चार आरोपियों को किया गिरफ्तार (तस्वीर क्रेडिट@BJournalist0143)

टाइगर श्रॉफ की कार पर फायरिंग मामले में बड़ा खुलासा,दिल्ली पुलिस ने चार आरोपियों को किया गिरफ्तार; अमृतसर से मुंबई तक फैला हथियारों का नेटवर्क

नई दिल्ली,21 अक्टूबर (युआईटीवी)- बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ की कार से जुड़ी फायरिंग की घटना की जाँच में दिल्ली पुलिस को अहम सफलता मिली है। दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल की एनडीआर यूनिट ने मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस को संदेह है कि इन लोगों ने कथित तौर पर हथियारों की सप्लाई करने और गोलीबारी की घटना के बाद हमलावरों को भागने में मदद करने में भूमिका निभाई। जाँच में अमृतसर से मुंबई तक पिस्तौल और कारतूस पहुँचाने,हथियारों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने के लिए बिचौलियों का इस्तेमाल करने और आरोपियों के फरार होने की योजना जैसे पहलुओं की पड़ताल की जा रही है। पुलिस के मुताबिक,गिरफ्तार आरोपियों के बीच संपर्क और उनकी गतिविधियों की जाँच से घटना के पीछे हथियारों की आपूर्ति से जुड़े नेटवर्क के बारे में जानकारी जुटाने की कोशिश की जा रही है।

दिल्ली पुलिस ने मंगलवार को चार आरोपियों को गिरफ्तार किया। इनकी पहचान हरियाणा के सोनीपत निवासी कुणाल,जिसकी उम्र 21 वर्ष है, और सुमित,जिसकी उम्र 19 वर्ष है, के रूप में हुई है। इनके अलावा उत्तर प्रदेश के सीतापुर की रहने वाली 23 वर्षीय राधा और आजमगढ़ की रहने वाली 23 वर्षीय बबीता को भी गिरफ्तार किया गया है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन चारों ने कथित तौर पर किस तरह हथियारों को मुंबई तक पहुँचाने और घटना के बाद आरोपियों की आवाजाही में मदद करने का काम किया।

पुलिस की जाँच में सामने आया है कि कुणाल हाल ही में जमानत पर जेल से बाहर आया था। बताया जा रहा है कि एक दोस्त के माध्यम से उसकी मुलाकात अनिल पंडित से हुई थी। इसके बाद दोनों के बीच एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप के जरिए बातचीत शुरू हुई। पुलिस का आरोप है कि अनिल पंडित के कहने पर कुणाल अमृतसर से एक पिस्तौल और 20 कारतूस लेकर आया था। इस यात्रा में सुमित भी कथित तौर पर उसके साथ था।

जाँच एजेंसियाँ यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि हथियारों की व्यवस्था किसने की थी और उन्हें अमृतसर से मुंबई तक पहुँचाने की जिम्मेदारी किन लोगों को सौंपी गई थी। पुलिस के अनुसार,इस मामले में हथियारों की आपूर्ति करने वालों और उन्हें आगे पहुँचाने वाले लोगों की भूमिका की जाँच की जा रही है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि हथियारों को ले जाने के दौरान आरोपियों ने किन माध्यमों का इस्तेमाल किया और उनके बीच किस तरह संपर्क बना हुआ था।

पुलिस का मानना है कि मामले की कड़ियाँ जोड़ने के लिए आरोपियों के आपसी संपर्क, यात्रा और घटनाक्रम से जुड़ी जानकारियाँ महत्वपूर्ण हैं। हालाँकि,गिरफ्तार लोगों की कथित भूमिका और हथियारों के इस्तेमाल से संबंधित सभी पहलुओं की पुष्टि जाँच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।

पुलिस के मुताबिक,घटना से करीब दो महीने पहले कुणाल की मुलाकात राधा से हुई थी। आरोप है कि कुणाल ने राधा को अपनी गतिविधियों के बारे में जानकारी दी और बाद में उसे हथियार लेकर मुंबई जाने के लिए राजी किया। जाँच में यह भी सामने आया है कि 15 अक्टूबर को कुणाल,राधा और बबीता को नई दिल्ली रेलवे स्टेशन लेकर गया था।

पुलिस का आरोप है कि इस दौरान पिस्तौल को राधा के बैग में रखा गया था। इसके बाद 17 अक्टूबर को राधा और बबीता मुंबई के दादर इलाके में पहुँचीं और एक होटल में ठहरीं। उसी दिन सुबह करीब 11 बजे एक नाबालिग लड़का होटल के पास आया और कथित तौर पर राधा से वह बैग लेकर चला गया।

अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि बैग ले जाने वाला नाबालिग कौन था,उसने हथियार किसे सौंपा और इसके बाद पिस्तौल गोलीबारी की घटना तक कैसे पहुँची। जाँचकर्ताओं के लिए यह पता लगाना भी महत्वपूर्ण है कि हथियारों की आपूर्ति और उन्हें इस्तेमाल करने वाले लोगों के बीच संपर्क किसने स्थापित कराया था।

इस पूरे घटनाक्रम में पुलिस अलग-अलग लोगों की भूमिका की जाँच कर रही है। अधिकारियों का उद्देश्य यह स्पष्ट करना है कि हथियारों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचाने की प्रक्रिया किस तरह पूरी हुई और इस दौरान किसने क्या जिम्मेदारी निभाई।

पुलिस के अनुसार,गोलीबारी की घटना 18 अक्टूबर की शाम को हुई थी। इसके बाद अनिल पंडित ने कथित तौर पर कुणाल को बताया कि शूटर मुंबई में फँस गए हैं। पुलिस का आरोप है कि इसके बाद कुणाल से उन्हें शहर से बाहर निकालने की व्यवस्था करने के लिए कहा गया।

जाँच में सामने आए घटनाक्रम के अनुसार, घटना वाले दिन राधा और बबीता दादर से हरिद्वार एक्सप्रेस में सवार होकर दिल्ली के लिए रवाना हुई थीं। पुलिस ने दोनों महिलाओं को 20 अक्टूबर को नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर पकड़ लिया। वहीं,कुणाल और सुमित को हरियाणा के सोनीपत से हिरासत में लिया गया।

जाँच एजेंसियाँ इस बात की पड़ताल कर रही हैं कि घटना के बाद आरोपियों की आवाजाही की योजना किसने बनाई थी और क्या हथियारों की आपूर्ति करने वाले लोगों को गोलीबारी के बारे में पहले से कोई जानकारी थी। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आरोपियों के बीच संपर्क किस माध्यम से बना रहा और फरार होने की योजना को अमल में लाने में किन लोगों ने मदद की।

गोलीबारी की घटना के बाद हमलावरों के भागने को लेकर भी महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक,आरोपी कथित तौर पर मुंबई से निकलकर गुजरात के सूरत पहुँचे थे। वहाँ से उन्होंने जयपुर जाने वाली ट्रेन में सफर किया। पुलिस के अनुसार,उनकी योजना बस के जरिए नई दिल्ली पहुँचने और इसके बाद नेपाल भाग जाने की थी।

इस कथित योजना से यह सवाल उठता है कि घटना के बाद आरोपियों ने किन रास्तों का इस्तेमाल किया और क्या उन्हें पहले से अलग-अलग स्थानों पर पहुँचने की व्यवस्था के बारे में निर्देश दिए गए थे। जाँच एजेंसियाँ फरार होने के इस पूरे घटनाक्रम की कड़ियाँ जोड़ने में जुटी हैं।

इधर,मुंबई पुलिस ने भी इस मामले में कार्रवाई करते हुए राजस्थान के कोटा से तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। अलग-अलग पुलिस इकाइयाँ मामले से संबंधित लोगों की भूमिका और उनके आपसी संपर्कों की जाँच कर रही हैं। जाँच का एक महत्वपूर्ण हिस्सा यह पता लगाना है कि गोलीबारी में इस्तेमाल किए गए हथियार का स्रोत क्या था और उसे हमलावरों तक पहुँचाने में किन लोगों ने मदद की।

टाइगर श्रॉफ की कार से जुड़ी फायरिंग की घटना की जाँच अब केवल गोलीबारी करने वालों तक सीमित नहीं रह गई है। पुलिस हथियारों की कथित सप्लाई,उन्हें मुंबई तक पहुँचाने वाले लोगों और घटना के बाद आरोपियों को शहर से बाहर निकालने के प्रयासों की भी पड़ताल कर रही है।

चार लोगों की गिरफ्तारी के बाद जाँच एजेंसियों को उम्मीद है कि हथियारों की आवाजाही और आरोपियों के बीच संपर्क से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियाँ सामने आ सकती हैं। हालाँकि,मामले में गिरफ्तार लोगों पर लगाए गए आरोपों की न्यायिक प्रक्रिया के तहत जाँच होनी बाकी है। उनकी भूमिका को लेकर अंतिम निष्कर्ष जाँच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही निकाला जाएगा।

फिलहाल पुलिस का ध्यान इस बात पर है कि अमृतसर से मुंबई तक हथियार कैसे पहुँचा, होटल के पास बैग किसने लिया,गोलीबारी में उस हथियार का इस्तेमाल किस तरह हुआ और घटना के बाद आरोपियों को फरार होने में किसने मदद की। इन सवालों के जवाब मिलने के बाद मामले में कथित हथियार आपूर्ति नेटवर्क और गोलीबारी से जुड़े घटनाक्रम की तस्वीर अधिक स्पष्ट हो सकती है।