नई दिल्ली,14 जनवरी (युआईटीवी)- साल 2026 भारतीय यात्रियों के लिए एक सकारात्मक खबर लेकर आया है। हेनले पासपोर्ट इंडेक्स की ताजा रैंकिंग में भारतीय पासपोर्ट ने वैश्विक स्तर पर पाँच पायदान की छलांग लगाई है। इस साल भारत को 80वां स्थान मिला है,जो पिछले वर्ष की तुलना में बेहतर स्थिति को दर्शाता है। इस रैंकिंग के साथ भारतीय पासपोर्ट धारकों को अब दुनिया के 55 देशों में बिना वीजा,वीजा-ऑन-अराइवल या इलेक्ट्रॉनिक ट्रैवल अथॉराइजेशन (ईटीए) के जरिए यात्रा की सुविधा मिल रही है। यह बदलाव न सिर्फ भारतीय यात्रियों की बढ़ती वैश्विक पहुंच को दर्शाता है,बल्कि देश की अंतर्राष्ट्रीय साख में भी धीरे-धीरे हो रहे सुधार की ओर इशारा करता है।
हेनले पासपोर्ट इंडेक्स हर साल दुनिया के अलग-अलग देशों के पासपोर्ट की ताकत को इस आधार पर मापता है कि उनके नागरिक कितने देशों में बिना पूर्व वीजा के यात्रा कर सकते हैं। 2026 की इस सूची में भारत को अल्जीरिया और नाइजर के साथ 80वें स्थान पर रखा गया है। हालाँकि,यह रैंकिंग अभी भी शीर्ष देशों से काफी नीचे है,लेकिन इसमें हुई पाँच स्थानों की बढ़ोतरी को विशेषज्ञ एक सकारात्मक संकेत मान रहे हैं। इसका सीधा लाभ उन भारतीय यात्रियों को मिलेगा,जो पर्यटन,व्यापार,शिक्षा या निजी कारणों से विदेश यात्रा की योजना बनाते हैं।
इस साल की सूची में सिंगापुर एक बार फिर दुनिया का सबसे ताकतवर पासपोर्ट बनकर उभरा है। सिंगापुर के नागरिक 192 देशों में बिना वीजा यात्रा कर सकते हैं,जो किसी भी देश के लिए अब तक की सबसे ऊँची संख्या मानी जा रही है। जापान दूसरे स्थान पर है,जिसके पासपोर्ट से 188 देशों में यात्रा संभव है,जबकि दक्षिण कोरिया भी लगभग इसी स्तर पर बना हुआ है। इन आँकड़ों से यह साफ होता है कि आर्थिक मजबूती,राजनीतिक स्थिरता और मजबूत कूटनीतिक संबंध किसी देश के पासपोर्ट की ताकत बढ़ाने में अहम भूमिका निभाते हैं।
भारतीय पासपोर्ट धारकों के लिए फिलहाल दक्षिण-पूर्व एशिया,अफ्रीका,कैरिबियन और कुछ द्वीपीय देशों में यात्रा अपेक्षाकृत आसान है। थाईलैंड,इंडोनेशिया,मालदीव,मॉरीशस जैसे लोकप्रिय पर्यटन स्थल भारतीय यात्रियों के लिए बिना वीजा या आसान वीजा प्रक्रिया के तहत उपलब्ध हैं। इससे भारतीय पर्यटकों की अंतर्राष्ट्रीय यात्रा में बढ़ोतरी देखी जा रही है। हालाँकि,यूरोप के अधिकांश देश,ब्रिटेन,अमेरिका,कनाडा और पूर्वी एशिया के कई प्रमुख देशों में जाने के लिए भारतीय नागरिकों को अभी भी पहले से वीजा लेना अनिवार्य है। यह एक बड़ी चुनौती बनी हुई है,खासकर उन लोगों के लिए जो काम या पढ़ाई के सिलसिले में इन देशों की ओर रुख करते हैं।
हेनले पासपोर्ट इंडेक्स की शीर्ष 10 रैंकिंग पर नजर डालें तो यहाँ यूरोपीय देशों का दबदबा साफ दिखाई देता है। जर्मनी,फ्रांस,इटली,स्पेन और स्वीडन जैसे देशों के पासपोर्ट दुनिया के 180 से अधिक देशों में बिना वीजा यात्रा की सुविधा देते हैं। डेनमार्क,लक्जमबर्ग,स्पेन,स्वीडन और स्विट्जरलैंड को संयुक्त रूप से तीसरा स्थान मिला है, जहाँ से 186 देशों में यात्रा संभव है। इसके बाद लगभग 10 यूरोपीय देशों ने मिलकर चौथा स्थान साझा किया है। यह स्थिति दर्शाती है कि यूरोप में क्षेत्रीय सहयोग और मजबूत कूटनीतिक रिश्तों का पासपोर्ट की ताकत पर सीधा असर पड़ता है।
इस सूची में संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की प्रगति को खास तौर पर उल्लेखनीय माना जा रहा है। पिछले 20 वर्षों में यूएई ने सबसे तेज छलांग लगाई है। साल 2006 से अब तक यूएई ने 149 नए देशों में बिना वीजा यात्रा की सुविधा जोड़ी है और अब वह पाँचवें स्थान पर पहुँच चुका है। यह उपलब्धि दिखाती है कि कैसे रणनीतिक विदेश नीति और वैश्विक साझेदारियों के जरिए किसी देश का पासपोर्ट बेहद मजबूत बनाया जा सकता है।
दूसरी ओर,कुछ देशों की स्थिति अब भी बेहद कमजोर बनी हुई है। अफगानिस्तान इस सूची में सबसे निचले पायदान पर है। अफगान पासपोर्ट धारक सिर्फ 24 देशों में ही यात्रा कर सकते हैं। यह आँकड़ा उस देश की राजनीतिक अस्थिरता,सुरक्षा चुनौतियों और अंतर्राष्ट्रीय अलगाव को दर्शाता है। वहीं,अमेरिका एक बार फिर शीर्ष 10 देशों में लौट आया है,हालाँकि अमेरिका और ब्रिटेन दोनों के पासपोर्ट की सुविधाओं में पिछले साल की तुलना में हल्की गिरावट भी दर्ज की गई है। इसे वैश्विक राजनीति में बदलते समीकरणों और सख्त इमिग्रेशन नीतियों से जोड़कर देखा जा रहा है।
हेनले एंड पार्टनर्स के चेयरमैन और हेनले पासपोर्ट इंडेक्स के निर्माता डॉ. क्रिश्चियन एच. केलिन ने इस मौके पर कहा कि पिछले दो दशकों में वैश्विक यात्रा की सुविधा में कुल मिलाकर बढ़ोतरी हुई है,लेकिन इसका लाभ सभी देशों को समान रूप से नहीं मिला है। उनके अनुसार,आज के दौर में पासपोर्ट सिर्फ यात्रा का दस्तावेज नहीं रहा,बल्कि यह लोगों के अवसरों,सुरक्षा और आर्थिक भागीदारी को भी तय करता है। मजबूत और स्थिर देशों के नागरिकों को इसका सबसे ज्यादा फायदा मिलता है,जबकि कमजोर अर्थव्यवस्था और अस्थिर राजनीतिक हालात वाले देशों के लोग पीछे रह जाते हैं।
भारत के संदर्भ में देखा जाए तो पासपोर्ट रैंकिंग में सुधार एक सकारात्मक संकेत है,लेकिन अभी लंबा रास्ता तय करना बाकी है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर भारत अपनी आर्थिक स्थिति को और मजबूत करता है,अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर अपनी भूमिका को प्रभावी बनाता है और द्विपक्षीय समझौतों के जरिए वीजा छूट की दिशा में काम करता है,तो आने वाले वर्षों में भारतीय पासपोर्ट की रैंकिंग में और सुधार हो सकता है। फिलहाल, 2026 की यह रैंकिंग भारतीय यात्रियों के लिए उम्मीद की एक नई किरण जरूर लेकर आई है।
