डोनाल्ड ट्रंप (तस्वीर क्रेडिट@wsyx6)

होर्मुज स्ट्रेट पर ट्रंप का बड़ा दावा,बोले- ‘100% अमेरिकी नियंत्रण’; ईरान से मुआवजे की भी माँग,बढ़ा तनाव

वाशिंगटन,11 अगस्त (युआईटीवी)- ईरान और अमेरिका के बीच जारी सैन्य तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बड़ा दावा किया है। ट्रंप ने कहा है कि फिलहाल होर्मुज स्ट्रेट पर केवल अमेरिकी नौसेना का नियंत्रण है और अमेरिका ने इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग की नाकाबंदी को बेहद मजबूत कर दिया है। उन्होंने इसकी तुलना स्टील की दीवार से करते हुए कहा कि इस रास्ते से केवल उन्हीं लोगों को आने-जाने की अनुमति दी जा रही है,जिन्हें अमेरिका अनुमति देना चाहता है। ट्रंप के इस बयान से क्षेत्र में पहले से जारी तनाव के और बढ़ने के संकेत मिले हैं।

ट्रंप ने सोशल मीडिया मंच ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट के जरिए होर्मुज स्ट्रेट की स्थिति को लेकर अपना दावा सामने रखा। उन्होंने कहा कि अमेरिका इस समुद्री मार्ग पर पूरी तरह नियंत्रण रखता है। ट्रंप के मुताबिक,अमेरिकी नौसेना की मौजूदगी के कारण होर्मुज स्ट्रेट पर आवाजाही अब अमेरिका की अनुमति के आधार पर हो रही है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी नाकाबंदी इतनी मजबूत है कि वह स्टील की दीवार की तरह काम कर रही है।

अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपने बयान में कहा कि अमेरिका उन लोगों को ही होर्मुज स्ट्रेट के भीतर आने की अनुमति देता है,जिन्हें वह आने देना चाहता है। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका ईरान को वहाँ से बाहर निकलने या अपने हितों के अनुरूप गतिविधियाँ करने की अनुमति नहीं देगा। ट्रंप का यह बयान ऐसे समय में आया है जब होर्मुज स्ट्रेट में समुद्री यातायात को लेकर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है।

होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल और गैस परिवहन मार्गों में से एक है। फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच स्थित यह समुद्री मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इस मार्ग से बड़ी मात्रा में कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस का परिवहन होता है। ऐसे में यहाँ किसी भी तरह की सैन्य गतिविधि, नाकाबंदी या समुद्री यातायात में बाधा का सीधा असर अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है।

ईरान और अमेरिका के बीच जारी सैन्य संघर्ष के दौरान इस क्षेत्र में मिसाइल और ड्रोन हमलों की खबरों ने समुद्री यातायात को प्रभावित किया है। इसके कारण जहाजों की आवाजाही और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ी है। वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों और आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता भी देखने को मिली है। दुनिया के कई देश होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ते सैन्य तनाव पर नजर बनाए हुए हैं,क्योंकि लंबे समय तक समुद्री यातायात बाधित होने की स्थिति में वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इसका व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।

इस बीच ट्रंप ने ईरान से मुआवजे की मांग को लेकर भी कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि ईरान की ओर से युद्ध के दौरान हुए नुकसान को लेकर अमेरिका को मुआवजा देने की बात उठाई गई है,लेकिन अमेरिका ईरान को किसी भी तरह का मुआवजा देने के लिए तैयार नहीं है। इसके उलट ट्रंप ने कहा कि युद्ध में अमेरिका को हुए नुकसान की भरपाई के लिए ईरान को ही मुआवजा देना होगा।

ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में ईरान की ओर से मुआवजे की माँग को खारिज करते हुए कहा कि इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के प्रतिनिधि पिछले पाँच महीने की सैन्य लड़ाई के दौरान हुए नुकसान के लिए मुआवजा माँग रहे हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच हुई बातचीत और बैठकों में इस माँग का कोई उल्लेख नहीं किया गया है। हालाँकि,ट्रंप ने इस माँग को अपने अंदाज में ‘दिलचस्प विचार’ बताते हुए कहा कि अब वह भी ईरान से मुआवजे की माँग करेंगे।

अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि युद्ध में मारे गए या घायल हुए लोगों के लिए भी मुआवजे की माँग की जाएगी। उन्होंने ईरान पर पिछले कई दशकों में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हिंसा करने का आरोप लगाते हुए कहा कि उन लोगों के परिवारों को भी मुआवजा दिया जाना चाहिए,जिन्हें ईरानी शासन ने पिछले 50 वर्षों में कथित तौर पर मारा है। इसके अलावा ट्रंप ने पिछले पाँच महीनों में मारे गए हजारों लोगों का भी उल्लेख किया और कहा कि इन मामलों को भी भविष्य की बातचीत में शामिल किया जाएगा।

ट्रंप ने कहा कि उन्होंने अपने प्रतिनिधियों को निर्देश दिया है कि वे भविष्य में ईरान के साथ होने वाली किसी भी बातचीत में मुआवजे की माँग को मजबूती से उठाएँ। इस बयान से संकेत मिलता है कि अमेरिका और ईरान के बीच यदि भविष्य में कूटनीतिक वार्ता होती है,तो आर्थिक मुआवजा भी बातचीत का एक महत्वपूर्ण मुद्दा बन सकता है।

ईरान की ओर से होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोलने के लिए अमेरिका के सामने कई मांगें रखे जाने की बात सामने आई है। इनमें अरबों डॉलर के भुगतान,अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी समाप्त करने,अमेरिकी सैन्य बलों को क्षेत्र से वापस बुलाने और अन्य रियायतों की माँग शामिल बताई गई है। हालाँकि,ट्रंप ने इन मांगों पर कोई नरमी दिखाने के बजाय ईरान को ही मुआवजा देने की बात कही है।

होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण को लेकर ट्रंप का दावा अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह समुद्री मार्ग लंबे समय से क्षेत्रीय सुरक्षा और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के केंद्र में रहा है। ईरान की भौगोलिक स्थिति के कारण भी इस समुद्री मार्ग पर उसकी भूमिका महत्वपूर्ण है। ऐसे में अमेरिका की ओर से इस मार्ग पर पूर्ण नियंत्रण का दावा क्षेत्रीय शक्ति संतुलन को लेकर भी कई सवाल खड़े करता है।

विशेषज्ञों के लिए सबसे बड़ी चिंता यह है कि यदि होर्मुज स्ट्रेट में सैन्य तनाव लंबे समय तक जारी रहता है तो इसका असर केवल अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं रहेगा। तेल और गैस की वैश्विक आपूर्ति प्रभावित होने से कई देशों में ऊर्जा की कीमतें बढ़ सकती हैं। आयात पर निर्भर अर्थव्यवस्थाओं के लिए यह स्थिति और अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकती है। समुद्री बीमा की लागत बढ़ने और जहाजों की आवाजाही में जोखिम बढ़ने से अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर भी असर पड़ने की आशंका है।

अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच ट्रंप के ताजा बयान ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि वाशिंगटन फिलहाल ईरान के प्रति अपने रुख में नरमी लाने के मूड में नहीं है। एक तरफ अमेरिका होर्मुज स्ट्रेट पर अपने नियंत्रण का दावा कर रहा है,वहीं दूसरी ओर ईरान से युद्ध के नुकसान की भरपाई की माँग कर रहा है। इसके विपरीत ईरान अपनी ओर से अमेरिकी सैन्य मौजूदगी और नाकाबंदी समाप्त करने सहित कई रियायतों की मांग कर रहा है।

ऐसे में दोनों देशों के बीच किसी संभावित समझौते की राह आसान नजर नहीं आ रही है। होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बढ़ता विवाद आने वाले दिनों में वैश्विक कूटनीति और ऊर्जा बाजार दोनों के लिए महत्वपूर्ण मुद्दा बन सकता है। फिलहाल ट्रंप के बयान ने यह संकेत दिया है कि अमेरिका इस समुद्री मार्ग को लेकर अपने रणनीतिक नियंत्रण को बनाए रखना चाहता है और भविष्य की किसी भी बातचीत में ईरान से मुआवजे की माँग को भी प्रमुखता से उठाने की तैयारी कर रहा है। अब दुनिया की नजर इस बात पर है कि ईरान इस कड़े अमेरिकी रुख का क्या जवाब देता है और होर्मुज स्ट्रेट में समुद्री यातायात को सामान्य करने की दिशा में दोनों देशों के बीच कोई रास्ता निकल पाता है या नहीं।