हैदराबाद,1 जुलाई (युआईटीवी)- तेलंगाना के संगारेड्डी जिले के पाशमैलारम औद्योगिक क्षेत्र में सोमवार सुबह हुए एक भीषण औद्योगिक हादसे में मृतकों की संख्या मंगलवार को बढ़कर 42 हो गई है। यह दुर्घटना सिगाची इंडस्ट्रीज लिमिटेड की फार्मास्यूटिकल फैक्ट्री में हुए विस्फोट के कारण हुई,जिसे राज्य के अब तक के सबसे खतरनाक औद्योगिक हादसों में से एक माना जा रहा है।
सोमवार सुबह फैक्ट्री के माइक्रोक्रिस्टलाइन सेलुलोज ड्राइंग यूनिट में जोरदार विस्फोट हुआ। फैक्ट्री में उस समय 108 कर्मचारी कार्यरत थे। विस्फोट इतना जबरदस्त था कि इसकी आवाज़ लगभग 5 किलोमीटर दूर तक सुनी गई। विस्फोट के बाद तुरंत भीषण आग लग गई,जिसे बुझाने के लिए 15 दमकल गाड़ियों को मौके पर बुलाया गया।
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि धमाका इतना तेज था कि कई मजदूर हवा में उछलकर दूर जा गिरे और कुछ के शव टुकड़ों में बिखर गए या पूरी तरह से जल गए,जिससे उनकी पहचान कर पाना मुश्किल हो गया है। अधिकारियों ने पुष्टि की है कि डीएनए जाँच के माध्यम से मृतकों की पहचान की जा रही है।
विस्फोट में अब तक 35 कर्मचारी घायल हुए हैं,जिनमें से 11 की हालत गंभीर बताई जा रही है। गंभीर रूप से घायल लोगों को हैदराबाद के अस्पतालों में भर्ती किया गया है। वहीं 27 मजदूर अब भी लापता हैं। अधिकारियों को आशंका है कि ये लोग ढही हुई तीन मंज़िला इमारत के मलबे में फँसे हो सकते हैं।
राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ),हैदराबाद आपदा प्रतिक्रिया और संपत्ति संरक्षण एजेंसी,पुलिस,राजस्व विभाग और अन्य सुरक्षा एजेंसियाँ मलबा हटाने का काम लगातार कर रही हैं।
मृतकों में अधिकांश प्रवासी मजदूर थे,जो बिहार,उत्तर प्रदेश और ओडिशा जैसे राज्यों से रोजगार की तलाश में तेलंगाना आए थे। इस हादसे ने न केवल उनके परिवारों को गहरा आघात पहुँचाया है,बल्कि औद्योगिक सुरक्षा के बुनियादी सवाल भी खड़े कर दिए हैं।
स्वास्थ्य मंत्री दामोदर राजा नरसिम्हा ने घटनास्थल का दौरा करने के बाद कहा कि अब तक विस्फोट का कारण स्पष्ट नहीं हो सका है। उन्होंने बताया कि यह कंपनी करीब 40-45 साल पुरानी है और माइक्रोक्रिस्टलाइन सेलुलोज का निर्माण करती है, जिसका उपयोग दवा निर्माण में किया जाता है।
श्रम मंत्री जी. विवेक ने कहा कि प्रारंभिक जानकारी के अनुसार यह रिएक्टर विस्फोट नहीं था,बल्कि एयर ड्रायर सिस्टम में आई खराबी से यह हादसा हुआ माना जा रहा है। फिर भी,तकनीकी विशेषज्ञों की मदद से विस्तृत जाँच की जा रही है।
राज्य सरकार ने हादसे की गंभीरता और सार्वजनिक आक्रोश को देखते हुए एक उच्च स्तरीय जाँच समिति गठित की है। इस समिति में मुख्य सचिव,विशेष मुख्य सचिव (आपदा प्रबंधन),प्रधान सचिव (श्रम),प्रधान सचिव (स्वास्थ्य),अतिरिक्त डीजीपी (अग्निशमन सेवाएँ) शामिल हैं।
मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार,यह समिति हादसे के कारणों की विस्तृत जाँच करेगी और भविष्य में ऐसी घटनाओं की रोकथाम के उपाय भी सुझाएगी।
मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने मंगलवार को घटनास्थल का दौरा करने और सरकारी अस्पताल में घायलों से मिलने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से पीड़ितों को संवेदनाएँ व्यक्त करते हुए यह भी कहा गया कि सरकार प्रभावित परिवारों को वित्तीय और चिकित्सीय सहायता उपलब्ध कराएगी।
इस हादसे ने तेलंगाना और पूरे देश में औद्योगिक इकाइयों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कई विशेषज्ञों का कहना है कि पुरानी फैक्ट्रियों में तकनीकी निगरानी और सुरक्षा प्रशिक्षण की कमी अक्सर इस तरह के हादसों का कारण बनती है।
तेलंगाना के पाशमैलारम में हुआ यह फार्मा फैक्ट्री विस्फोट सिर्फ एक औद्योगिक दुर्घटना नहीं,बल्कि एक मानव त्रासदी है,जिसमें दर्जनों निर्दोष मजदूरों की जान गई और सैकड़ों परिवार प्रभावित हुए। अब जरूरी है कि राज्य और केंद्र सरकार इस घटना से सबक लें और औद्योगिक सुरक्षा नियमों को कड़ाई से लागू करें।
इस हादसे ने यह भी दिखा दिया है कि प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा को लेकर अब और ज्यादा सजग रहने की आवश्यकता है। जाँच समिति की रिपोर्ट के बाद उम्मीद की जा रही है कि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं को रोका जा सकेगा और दोषियों को कठोर सज़ा दी जाएगी।
