संयुक्त राष्ट्र,14 जनवरी (युआईटीवी)- ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर तेज हो गया है। ईरान ने अमेरिका पर अपने देश में हिंसा भड़काने और बल प्रयोग की खुली धमकी देने का आरोप लगाते हुए संयुक्त राष्ट्र का दरवाजा खटखटाया है। ईरान ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव और सुरक्षा परिषद से औपचारिक रूप से माँग की है कि वे अमेरिका की ओर से दिए गए बयानों और कथित उकसावे की कड़ी निंदा करें। तेहरान का कहना है कि अमेरिकी नेतृत्व, खासकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप,ईरान के आंतरिक मामलों में दखल देने और अस्थिरता फैलाने की कोशिश कर रहे हैं।
ईरान ने अपनी शिकायत में अमेरिकी राष्ट्रपति के एक सोशल मीडिया पोस्ट का विशेष रूप से हवाला दिया है। इस पोस्ट में डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान में चल रहे विरोध प्रदर्शनों का जिक्र करते हुए लिखा था, “ईरानी देशभक्तों, विरोध जारी रखें। अपनी संस्थाओं पर कब्जा करें। मदद आ रही है।” ईरान का कहना है कि यह बयान न केवल हिंसा को भड़काने वाला है,बल्कि यह एक संप्रभु देश के खिलाफ बल प्रयोग की धमकी के समान है। ईरानी अधिकारियों के मुताबिक,इस तरह के संदेश अंतर्राष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर का खुला उल्लंघन हैं।
ईरान ने संयुक्त राष्ट्र से यह भी आग्रह किया है कि अमेरिका को ऐसे बयान देने से रोका जाए,जो देश में अस्थिरता पैदा कर सकते हैं और आम नागरिकों की जान को खतरे में डालते हैं। तेहरान का आरोप है कि अमेरिका लंबे समय से आर्थिक प्रतिबंधों,राजनीतिक दबाव और अब खुले उकसावे के जरिए ईरान पर दबाव बनाने की नीति अपना रहा है।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी तीखा रुख अपनाया है। मंगलवार को डेट्रॉइट इकोनॉमिक क्लब में बोलते हुए ट्रंप ने घोषणा की कि उन्होंने ईरानी अधिकारियों के साथ होने वाली सभी बैठकों को रद्द कर दिया है। उन्होंने कहा कि यह फैसला ईरान में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित हिंसा को देखते हुए लिया गया है। ट्रंप ने कहा, “जब तक प्रदर्शनकारियों की बेमतलब हत्याएँ बंद नहीं हो जातीं,मैंने ईरानी अधिकारियों के साथ सभी बैठकें रद्द कर दी हैं।” उनके इस बयान को कूटनीतिक संवाद के रास्ते बंद करने के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
ट्रंप का यह ऐलान ऐसे समय में आया है,जब एक दिन पहले ही उन्होंने ईरान के खिलाफ कड़ा आर्थिक कदम उठाने की बात कही थी। उन्होंने चेतावनी दी थी कि जो भी देश ईरान के साथ व्यापार करेगा,उस पर अमेरिका के साथ होने वाले सभी व्यावसायिक लेन-देन पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाया जाएगा। इस बयान ने वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ा दी है,क्योंकि इससे न केवल ईरान बल्कि उन देशों की अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ सकता है,जिनके ईरान के साथ व्यापारिक संबंध हैं।
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया संदेशों में ईरान में प्रदर्शन कर रहे लोगों को ‘ईरानी देशभक्त’ कहकर संबोधित किया और उनसे विरोध जारी रखने की अपील की। उन्होंने प्रदर्शनकारियों से यह भी कहा कि वे हिंसा के लिए जिम्मेदार लोगों का दस्तावेजीकरण करें और उनके नाम सुरक्षित रखें। ट्रंप ने लिखा कि अगर संभव हो तो वे अपनी संस्थाओं पर कब्जा करें और अत्याचार करने वालों को बेनकाब करें। इन बयानों को ईरान ने सीधे तौर पर विद्रोह और हिंसा को बढ़ावा देने वाला बताया है।
ट्रंप ने ईरान में हुई मौतों को लेकर भी बयान दिया और कहा कि अलग-अलग आँकड़ें सामने आ रहे हैं। उन्होंने कहा, “मैं पाँच अलग-अलग संख्याएँ सुन रहा हूँ,लेकिन एक मौत भी बहुत ज्यादा है।” उन्होंने हिंसा के लिए जिम्मेदार लोगों को चेतावनी देते हुए कहा कि उन्हें इसके परिणाम भुगतने होंगे और जवाबदेही तय की जाएगी। ट्रंप के इस बयान को ईरान के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप के तौर पर देखा जा रहा है।
इससे पहले व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने सोमवार को कहा था कि ईरान से निपटने के लिए अमेरिका की प्राथमिकता अब भी कूटनीति ही है। हालाँकि,उन्होंने यह भी साफ किया कि ट्रंप प्रशासन जरूरत पड़ने पर सैन्य विकल्पों को पूरी तरह से खारिज नहीं करता। इस बयान ने यह संकेत दिया कि अमेरिका एक तरफ बातचीत की बात कर रहा है,तो दूसरी ओर दबाव और ताकत के इस्तेमाल का विकल्प भी खुला रखे हुए है।
ईरान का कहना है कि अमेरिका का यह दोहरा रवैया क्षेत्रीय और वैश्विक शांति के लिए खतरनाक है। संयुक्त राष्ट्र में उठाया गया यह मुद्दा अब अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि संयुक्त राष्ट्र इस पर क्या रुख अपनाता है और क्या अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ता तनाव किसी नए कूटनीतिक या राजनीतिक मोड़ पर पहुँचता है। फिलहाल,दोनों देशों के बयानों और कदमों से यह साफ है कि रिश्तों में तल्खी और गहराने वाली है।
