नई दिल्ली,24 अक्टूबर (युआईटीवी)- जापान के आइची-नागोया में आयोजित एशियन पैरा गेम्स 2026 में भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए देश को गौरवान्वित किया है। प्रतियोगिता में भारत ने कुल 114 पदक जीतकर पैरा एशियन गेम्स के इतिहास में अपना अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन दर्ज किया। भारतीय खिलाड़ियों ने 30 स्वर्ण, 35 रजत और 49 कांस्य पदक अपने नाम किए। इस उपलब्धि के साथ भारत ने पिछले संस्करण में बनाए गए 108 पदकों के रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ दिया। प्रतियोगिता के अंतिम दिन भारतीय खिलाड़ियों ने नौ स्वर्ण पदक जीतकर अपने अभियान का शानदार समापन किया। इस बार भारत ने पहली बार इन खेलों में 30 स्वर्ण पदक जीतने का आँकड़ा भी पार किया,जो देश के पैरा खेलों के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
भारत की इस सफलता में एथलेटिक्स से लेकर बैडमिंटन,तीरंदाजी, निशानेबाजी और अन्य खेलों के खिलाड़ियों का योगदान रहा। खिलाड़ियों ने अलग-अलग स्पर्धाओं में पदक जीतकर यह दिखाया कि देश में पैरा खेलों का दायरा लगातार बढ़ रहा है। प्रतियोगिता के दौरान कई खिलाड़ियों ने व्यक्तिगत स्पर्धाओं में सफलता हासिल की,जबकि कुछ ने युगल और मिश्रित टीम स्पर्धाओं में पदक जीतकर भारत की पदक तालिका को मजबूत किया। हालाँकि,भारत कुल पदकों की संख्या में अपने पिछले प्रदर्शन से आगे निकल गया, लेकिन स्वर्ण पदकों के आधार पर उसे चौथे स्थान से संतोष करना पड़ा।
एशियन पैरा गेम्स में भारत का पिछला सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 2022 संस्करण में रहा था। कोरोना महामारी के कारण उस संस्करण का आयोजन वर्ष 2023 में चीन के हांगझू में किया गया था। वहाँ भारतीय खिलाड़ियों ने 27 स्वर्ण, 40 रजत और 41 कांस्य सहित कुल 108 पदक जीते थे। इस बार भारत ने कुल पदकों की संख्या बढ़ाकर 114 कर दी। पिछले संस्करण की तुलना में भारतीय दल ने छह पदक अधिक हासिल किए और स्वर्ण पदकों की संख्या भी 27 से बढ़कर 30 हो गई।
इस प्रदर्शन का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है,क्योंकि पैरा खेलों में खिलाड़ियों को अपनी शारीरिक परिस्थितियों के अनुरूप कठिन प्रशिक्षण और प्रतियोगिता की तैयारी करनी पड़ती है। भारतीय खिलाड़ियों ने विभिन्न स्पर्धाओं में लगातार अच्छा प्रदर्शन करते हुए अपनी क्षमता का परिचय दिया। कई खेलों में भारत को पदक मिले, जिससे देश की सफलता केवल किसी एक स्पर्धा तक सीमित नहीं रही।
आखिरी दिन नौ स्वर्ण पदक जीतना भी भारतीय अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा। प्रतियोगिता के अंतिम चरण में खिलाड़ियों ने दबाव के बीच प्रदर्शन करते हुए पदक तालिका में भारत की स्थिति मजबूत बनाए रखी। इस उपलब्धि से भारतीय दल ने अपने अभियान का समापन उत्साहजनक अंदाज में किया।
कुल 114 पदक जीतने के बावजूद भारत पदक तालिका में चौथे स्थान पर रहा। पदक तालिका में स्थान तय करने में स्वर्ण पदकों की संख्या को प्राथमिकता दी जाती है। चीन ने 204 स्वर्ण, 115 रजत और 108 कांस्य सहित कुल 427 पदक जीतकर पहला स्थान हासिल किया। जापान 63 स्वर्ण पदकों के साथ दूसरे स्थान पर रहा,जबकि उज्बेकिस्तान ने 45 स्वर्ण पदक जीतकर तीसरा स्थान प्राप्त किया। भारत के खाते में 30 स्वर्ण पदक आए और वह चौथे स्थान पर रहा।
चीन का प्रदर्शन पदक तालिका में अन्य देशों से काफी आगे रहा। जापान और उज्बेकिस्तान ने भी स्वर्ण पदकों के मामले में भारत से अधिक पदक हासिल किए। हालाँकि,भारत के लिए कुल 114 पदक जीतना और अपने पिछले रिकॉर्ड को पीछे छोड़ना बड़ी उपलब्धि रही। इससे यह भी स्पष्ट हुआ कि भारतीय खिलाड़ी कई खेलों में प्रतिस्पर्धी प्रदर्शन करने में सफल रहे।
भारत को सबसे अधिक पदक पैरा एथलेटिक्स में मिले। इस स्पर्धा में भारतीय खिलाड़ियों ने 22 स्वर्ण,19 रजत और 24 कांस्य पदक सहित कुल 65 पदक हासिल किए। भारत के कुल 114 पदकों में पैरा एथलेटिक्स की हिस्सेदारी सबसे अधिक रही। ट्रैक और फील्ड की विभिन्न स्पर्धाओं में भारतीय खिलाड़ियों ने अपनी ताकत दिखाई और कई पदक जीतकर देश की स्थिति मजबूत की।
पैरा एथलेटिक्स में निशाद कुमार, दीप्ति जीवनजी, प्रवीण कुमार, सचिन सर्जेराव खिलारी, दिलीप गावित और सुमित अंतिल जैसे खिलाड़ियों के नाम पदक विजेताओं में शामिल रहे। इन खिलाड़ियों ने अपनी-अपनी स्पर्धाओं में उल्लेखनीय प्रदर्शन किया। ऊँची कूद,दौड़, भाला फेंक और अन्य फील्ड स्पर्धाओं में भारतीय खिलाड़ियों की सफलता ने देश की पदक तालिका को नई ऊंचाई दी।
पैरा एथलेटिक्स में मिले 65 पदक यह बताते हैं कि इस खेल में भारत की तैयारी और प्रतिस्पर्धा का स्तर मजबूत रहा। खिलाड़ियों की मेहनत, नियमित प्रशिक्षण और अंतर्राष्ट्रीय मुकाबलों का अनुभव इस प्रदर्शन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले कारक रहे।
पैरा बैडमिंटन में भारत ने कुल 16 पदक जीते। इनमें तीन स्वर्ण,पाँच रजत और आठ कांस्य पदक शामिल रहे। इस खेल में भारतीय खिलाड़ियों ने एकल और युगल सहित विभिन्न स्पर्धाओं में मुकाबला किया। पैरा बैडमिंटन लंबे समय से भारत के लिए महत्वपूर्ण खेल रहा है और इस बार भी खिलाड़ियों ने पदक जीतकर देश की सफलता में योगदान दिया।
प्रमोद भगत,सुहास लालिनकेरे यथिराज, तुलसिमथी मुरुगेसन, नित्या श्री सिवन और मनीषा रामदास जैसे खिलाड़ियों के नाम पदक विजेताओं की सूची में शामिल रहे। कुछ खिलाड़ियों ने व्यक्तिगत स्पर्धाओं में पदक हासिल किए,जबकि कुछ ने जोड़ीदारों के साथ मिलकर सफलता प्राप्त की। युगल और मिश्रित युगल मुकाबलों में भी भारतीय खिलाड़ियों ने पदक जीते।
पैरा बैडमिंटन में मिले 16 पदकों ने भारत के कुल प्रदर्शन को मजबूती दी। इस खेल में खिलाड़ियों की तकनीक,कोर्ट पर गति और दबाव में निर्णय लेने की क्षमता अहम रही।
पैरा तैराकी में भारत ने कुल 11 पदक हासिल किए,जिनमें तीन रजत और आठ कांस्य पदक शामिल थे। इस स्पर्धा में भारतीय खिलाड़ियों ने विभिन्न तैराकी मुकाबलों में हिस्सा लेकर देश के खाते में पदक जोड़े। इसके अलावा पैरा तीरंदाजी में भारतीय दल ने तीन स्वर्ण और तीन रजत सहित छह पदक जीते। तीरंदाजी में खिलाड़ियों ने निशाने की सटीकता और एकाग्रता के दम पर सफलता हासिल की।
पैरा निशानेबाजी में भारत को दो स्वर्ण,दो रजत और एक कांस्य सहित पाँच पदक मिले। मोना अग्रवाल और अवनि लेखरा जैसे खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर विशेष चर्चा रही। इन दोनों खिलाड़ियों ने निशानेबाजी में अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। इसके अलावा कपिल परमार सहित अन्य खिलाड़ियों ने भी पदक जीतकर भारतीय दल की उपलब्धियों में योगदान दिया।
पैरा टेबल टेनिस में भारत को सात कांस्य पदक मिले। पैरा जूडो में एक रजत और एक कांस्य पदक हासिल हुआ,जबकि पैरा पावरलिफ्टिंग में भारतीय खिलाड़ियों ने दो रजत पदक जीते। अलग-अलग खेलों में मिली इन सफलताओं ने भारत की पदक तालिका को व्यापक बनाया।
भारतीय दल के प्रदर्शन में कई खिलाड़ियों ने महत्वपूर्ण योगदान दिया। निशानेबाजी में मोना अग्रवाल ने स्वर्ण पदक जीता, जबकि अवनि लेखरा ने रजत पदक हासिल किया। पैरा एथलेटिक्स में निशाद कुमार ने स्वर्ण पदक जीतकर देश को सफलता दिलाई। दीप्ति जीवनजी, प्रवीण कुमार, सचिन सर्जेराव खिलारी, दिलीप गावित और सुमित अंतिल जैसे खिलाड़ियों ने भी स्वर्ण पदक जीतकर भारत की उपलब्धियों में इजाफा किया।
शीतल देवी ने भी अपने प्रदर्शन से ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने पायल नाग के साथ रजत पदक जीता और टोमन कुमार के साथ मिश्रित टीम स्पर्धा में स्वर्ण पदक हासिल किया। यह उपलब्धियाँ दिखाती हैं कि भारतीय खिलाड़ियों ने व्यक्तिगत मुकाबलों के साथ-साथ टीम स्पर्धाओं में भी अच्छा प्रदर्शन किया।
बैडमिंटन में प्रमोद भगत और सुहास लालिनकेरे यथिराज जैसे अनुभवी खिलाड़ियों ने पदक जीतकर योगदान दिया। वहीं, अन्य खिलाड़ियों ने भी अलग-अलग स्पर्धाओं में रजत और कांस्य पदक हासिल किए। इस तरह भारतीय दल की सफलता में अनुभवी खिलाड़ियों के साथ कई अन्य प्रतिभागियों की भूमिका भी अहम रही।
एशियन पैरा गेम्स 2026 में भारत का प्रदर्शन देश में पैरा खेलों के विकास के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा सकता है। कुल पदकों की संख्या में सुधार और पहली बार 30 स्वर्ण पदक जीतना इस अभियान की प्रमुख उपलब्धियाँ रहीं। पैरा एथलेटिक्स और बैडमिंटन जैसे खेलों में बड़ी संख्या में पदक मिलने से यह भी पता चलता है कि भारतीय खिलाड़ी कई स्पर्धाओं में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मुकाबला करने की क्षमता रखते हैं।
हालाँकि,पदक तालिका में चौथे स्थान पर रहने के कारण भारत के सामने स्वर्ण पदकों की संख्या बढ़ाने की चुनौती बनी हुई है। भविष्य की प्रतियोगिताओं में खिलाड़ियों की तैयारी, प्रशिक्षण सुविधाओं,तकनीकी सहयोग और अंतर्राष्ट्रीय अनुभव को और मजबूत करना उपयोगी हो सकता है।
कुल मिलाकर,आइची-नागोया में भारतीय खिलाड़ियों ने 114 पदक जीतकर अपने पिछले रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया। अंतिम दिन नौ स्वर्ण पदकों के साथ अभियान का समापन और कुल 30 स्वर्ण पदकों की उपलब्धि भारतीय पैरा खेलों के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। खिलाड़ियों के इस प्रदर्शन ने देश को गौरवान्वित किया और आने वाली अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए नई उम्मीदें जगाई हैं।
