नई दिल्ली,28 जनवरी (युआईटीवी)- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने मंगलवार को भारत और यूरोपीय संघ के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) पर बातचीत पूरी होने का स्वागत करते हुए इसे द्विपक्षीय संबंधों के इतिहास की एक बड़ी उपलब्धि करार दिया। 16वें भारत-ईयू शिखर सम्मेलन के बाद जारी संयुक्त बयान में तीनों नेताओं ने स्पष्ट किया कि यह समझौता केवल व्यापारिक करार नहीं,बल्कि भारत और यूरोपीय संघ के बीच रणनीतिक साझेदारी को एक नई दिशा देने वाला कदम है,जो आने वाले दशकों में दोनों पक्षों की आर्थिक और तकनीकी क्षमता को मजबूती देगा।
संयुक्त बयान में कहा गया कि एफटीए के जरिए भारत और यूरोपीय संघ के बीच व्यापार और निवेश को नई गति मिलेगी। इससे न केवल बाजारों तक पहुँच आसान होगी,बल्कि दोनों अर्थव्यवस्थाओं के बीच भरोसेमंद और विविध सप्लाई चेन विकसित करने में भी मदद मिलेगी। नेताओं ने माना कि मौजूदा वैश्विक हालात में,जब दुनिया अनिश्चितता,भू-राजनीतिक तनाव और आपूर्ति व्यवधानों से जूझ रही है,तब भारत और ईयू जैसे लोकतांत्रिक और नियम-आधारित साझेदारों के बीच मजबूत आर्थिक रिश्ते पहले से कहीं ज्यादा जरूरी हो गए हैं।
बयान में इस बात पर जोर दिया गया कि यह समझौता साझा समृद्धि को बढ़ावा देगा और रोजगार सृजन,औद्योगिक विकास तथा हरित बदलाव जैसे अहम क्षेत्रों में सहयोग को मजबूत करेगा। दोनों पक्षों ने यह भी स्पष्ट किया कि एफटीए का उद्देश्य केवल टैरिफ कम करना नहीं है,बल्कि व्यापार को सरल बनाना,निवेश के लिए अनुकूल माहौल तैयार करना और दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित करना भी है। नेताओं ने एफटीए को पूरी तरह और प्रभावी ढंग से लागू करने का संकल्प दोहराया,ताकि इसके लाभ जमीनी स्तर तक पहुँच सकें।
विश्व व्यापार संगठन की भूमिका पर भी नेताओं ने विस्तार से चर्चा की। संयुक्त बयान में कहा गया कि वैश्विक व्यापार व्यवस्था को मजबूत और भरोसेमंद बनाए रखने के लिए डब्ल्यूटीओ में जरूरी और व्यापक सुधार अनिवार्य हैं। भारत और यूरोपीय संघ ने इस बात पर सहमति जताई कि नियम-आधारित बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली सभी देशों के हित में है और इसमें सुधार कर उसे अधिक समावेशी,पारदर्शी और प्रभावी बनाया जाना चाहिए। दोनों पक्षों ने संकेत दिया कि वे इस दिशा में मिलकर काम करेंगे और वैश्विक व्यापार को अधिक स्थिर बनाने में योगदान देंगे।
एफटीए के साथ-साथ नेताओं ने निवेश संरक्षण समझौते और भौगोलिक संकेत समझौते पर भी जल्द बातचीत पूरी करने का आह्वान किया। उनका मानना है कि इन समझौतों से निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा और भारतीय व यूरोपीय उत्पादों को वैश्विक बाजार में बेहतर पहचान मिलेगी। संयुक्त बयान में द्विपक्षीय निवेश बढ़ाने और निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहित करने पर विशेष जोर दिया गया,ताकि व्यापारिक सहयोग केवल सरकारी स्तर तक सीमित न रहे,बल्कि उद्योग और उद्यमिता के स्तर पर भी मजबूत हो।
तकनीकी सहयोग को भारत-ईयू साझेदारी का एक अहम स्तंभ बताया गया। नेताओं ने कहा कि भारत और यूरोपीय संघ की तकनीकी क्षमताएँ एक-दूसरे को पूरक हैं और यदि इन्हें सही तरीके से जोड़ा जाए,तो यह वैश्विक स्तर पर नवाचार और विकास का नया मॉडल पेश कर सकती हैं। इसी सोच के तहत रिसर्च,इनोवेशन और कारोबार को आपस में जोड़ते हुए पूरे वैल्यू चेन में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी। भारत-ईयू ट्रेड एंड टेक्नोलॉजी काउंसिल को इस तकनीकी साझेदारी का केंद्रीय मंच बताया गया,जिसके जरिए उभरती तकनीकों,डिजिटल अर्थव्यवस्था और औद्योगिक सहयोग को आगे बढ़ाया जाएगा।
डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में भी सहयोग को मजबूत करने पर जोर दिया गया। नेताओं ने माना कि डिजिटल तकनीकें भविष्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं और इस क्षेत्र में साझा प्रयास दोनों पक्षों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में आगे रख सकते हैं। इसी उद्देश्य से भारत-ईयू इनोवेशन हब और भारत-ईयू स्टार्टअप पार्टनरशिप शुरू करने पर सहमति बनी,ताकि नवाचार को बढ़ावा मिले और युवा उद्यमियों को नए अवसर मिल सकें। इसके अलावा,भारत-ईयू वैज्ञानिक और तकनीकी सहयोग समझौते को 2030 तक बढ़ाने का स्वागत किया गया और ईयू के प्रमुख रिसर्च प्रोग्राम ‘होराइजन यूरोप’ से भारत को जोड़ने पर बातचीत शुरू करने का फैसला लिया गया।
स्वच्छ ऊर्जा और जलवायु बदलाव के मुद्दे भी शिखर सम्मेलन के एजेंडे में प्रमुख रहे। संयुक्त बयान में कहा गया कि भारत और यूरोपीय संघ जलवायु परिवर्तन से निपटने और सतत विकास के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए अपने सहयोग को और तेज करेंगे। इस संदर्भ में भारत-ईयू ग्रीन हाइड्रोजन टास्क फोर्स के गठन का स्वागत किया गया,जिसे भविष्य की स्वच्छ ऊर्जा जरूरतों के लिए एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। इसके साथ ही 2026 में भारत-ईयू विंड बिजनेस समिट के आयोजन पर सहमति जताई गई,जिससे नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में निवेश और तकनीकी सहयोग को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
क्षेत्रीय संपर्क और कनेक्टिविटी को लेकर भी दोनों पक्षों के विचार एक जैसे नजर आए। नेताओं ने माना कि बेहतर कनेक्टिविटी से न केवल व्यापार बढ़ेगा,बल्कि लोगों के बीच संपर्क और आपसी समझ भी मजबूत होगी। भारत-ईयू कनेक्टिविटी पार्टनरशिप,एविएशन डायलॉग और समुद्री परिवहन सहयोग का उल्लेख करते हुए कहा गया कि इन पहलों के जरिए भारतीय और यूरोपीय कंपनियों के लिए नए व्यापारिक अवसर खुलेंगे। भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक कॉरिडोर में हो रही प्रगति को भी इस दिशा में एक अहम कदम बताया गया।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता और उभरती तकनीकों पर सहयोग को लेकर भी सकारात्मक संकेत दिए गए। ईयू नेताओं ने 19-20 फरवरी को नई दिल्ली में होने वाले एआई इम्पैक्ट समिट का स्वागत किया और उम्मीद जताई कि यह मंच वैश्विक स्तर पर जिम्मेदार और मानव-केंद्रित एआई के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। दोनों पक्षों ने इस बात पर सहमति जताई कि तकनीकी प्रगति के साथ-साथ नैतिकता, पारदर्शिता और सुरक्षा का ध्यान रखना भी उतना ही जरूरी है।
शिखर सम्मेलन के दौरान नेताओं ने भारत-ईयू बिजनेस फोरम को भी संबोधित किया, जहाँ दोनों पक्षों के उद्योग जगत के प्रमुख प्रतिनिधि मौजूद थे। उन्होंने निजी निवेश बढ़ाने,नए व्यापारिक प्रयास शुरू करने और भारत-ईयू व्यापार संबंधों को और मजबूत करने का आह्वान किया। नेताओं का मानना है कि सरकारों के बीच बनी सहमति तभी सफल होगी,जब उद्योग और उद्यमी इसे जमीन पर उतारने में सक्रिय भूमिका निभाएंगे।
भारत और यूरोपीय संघ के बीच एफटीए पर बातचीत पूरी होना केवल एक कूटनीतिक उपलब्धि नहीं,बल्कि बदलते वैश्विक परिदृश्य में साझेदारी की नई परिभाषा है। यह समझौता न सिर्फ दोनों अर्थव्यवस्थाओं को मजबूती देगा,बल्कि एक स्थिर,समावेशी और टिकाऊ वैश्विक आर्थिक व्यवस्था के निर्माण में भी अहम योगदान करेगा।
