नई दिल्ली,28 जनवरी (युआईटीवी)- महाराष्ट्र की राजनीति को बुधवार को एक ऐसा झटका लगा,जिसने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया। उपमुख्यमंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रमुख अजित पवार का एक विमान दुर्घटना में निधन हो गया। यह हादसा बारामती के पास हुआ,जहाँ उनका विमान लैंडिंग के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस हादसे में अजित पवार समेत विमान में सवार अन्य लोगों की भी जान चली गई। जैसे ही यह खबर सामने आई,महाराष्ट्र से लेकर दिल्ली तक शोक की लहर दौड़ गई।
अजित पवार का नाम केवल एक पद या राजनीतिक कुर्सी तक सीमित नहीं था। वे दशकों से महाराष्ट्र की राजनीति का एक मजबूत स्तंभ माने जाते रहे। प्रशासनिक फैसलों में उनकी पकड़,बजट और वित्तीय मामलों की गहरी समझ और जमीनी स्तर तक उनकी सक्रियता उन्हें समकालीन नेताओं से अलग पहचान देती थी। उनके असमय निधन को केवल एक व्यक्ति की मौत नहीं,बल्कि सार्वजनिक जीवन में एक बड़े खालीपन के रूप में देखा जा रहा है।
महाराष्ट्र के बारामती में एक विमान दुर्घटना में महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री, श्री अजित पवार समेत कई लोगों की मृत्यु का समाचार अत्यंत दुखद है। अजित पवार जी का असामयिक निधन एक अपूरणीय क्षति है। उन्हें महाराष्ट्र के विकास में, विशेषकर सहकारी क्षेत्र में, विशेष योगदान के लिए सदैव…
— President of India (@rashtrapatibhvn) January 28, 2026
इस दुखद हादसे के बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा कि अजित पवार का जाना देश और विशेष रूप से महाराष्ट्र के लिए अपूरणीय क्षति है। उन्होंने कहा कि सहकारी क्षेत्र और राज्य के विकास में अजित पवार का योगदान लंबे समय तक याद किया जाएगा। राष्ट्रपति ने इस दुर्घटना में जान गंवाने वाले अन्य लोगों के परिवारों के प्रति भी संवेदना व्यक्त की और उन्हें इस कठिन समय में संबल मिलने की कामना की।
Shri Ajit Pawar Ji was a leader of the people, having a strong grassroots level connect. He was widely respected as a hardworking personality at the forefront of serving the people of Maharashtra. His understanding of administrative matters and passion for empowering the poor and… pic.twitter.com/mdgwwGzw4R
— Narendra Modi (@narendramodi) January 28, 2026
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस दुखद घटना पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि अजित पवार एक ऐसे नेता थे जिनका सीधा जुड़ाव आम जनता से था। उन्होंने उल्लेख किया कि अजित पवार प्रशासनिक कामकाज की गहरी समझ रखते थे और समाज के कमजोर वर्गों को आगे बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयासरत रहते थे। प्रधानमंत्री ने इसे बेहद पीड़ादायक और चौंकाने वाली घटना बताया और शोकाकुल परिवार के प्रति संवेदना प्रकट की।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि अजित पवार ने अपने सार्वजनिक जीवन में राज्य के विकास और जनकल्याण को हमेशा प्राथमिकता दी। उन्होंने उन्हें एक संवेदनशील और समर्पित जनसेवक के रूप में याद किया,जिनका योगदान केवल सत्ता तक सीमित नहीं रहा,बल्कि नीति और प्रशासन में भी स्पष्ट रूप से दिखा।
महाराष्ट्र के बाहर भी इस खबर ने राजनीतिक दलों और नेताओं को झकझोर कर रख दिया। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इसे बेहद दुखद और स्तब्ध करने वाली घटना बताते हुए कहा कि इस हादसे की गंभीरता से जाँच होनी चाहिए। उन्होंने पवार परिवार और उनके समर्थकों के प्रति संवेदना व्यक्त की और कहा कि यह केवल महाराष्ट्र ही नहीं,बल्कि पूरे देश के लिए क्षति है।
बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी इस हादसे को हृदयविदारक बताया और कहा कि इतने अनुभवी नेता का इस तरह जाना देश के लोकतांत्रिक ढाँचे के लिए बड़ा नुकसान है। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने अजित पवार को राजनीति का समर्पित योद्धा बताते हुए कहा कि उन्होंने अपना पूरा जीवन जनता की सेवा में लगाया।
आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया ने इस घटना को बेहद पीड़ादायक बताया और कहा कि इस हादसे से कई परिवारों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। उन्होंने दिवंगत आत्माओं को श्रद्धांजलि देते हुए शोक संतप्त परिवारों को शक्ति मिलने की कामना की।
भाजपा और अन्य दलों के नेताओं ने भी अजित पवार को एक मजबूत, स्पष्टवादी और जुझारू नेता के रूप में याद किया। कई नेताओं ने कहा कि अजित पवार ने राजनीति में संघर्ष, मतभेद और जिम्मेदारी—तीनों को करीब से देखा और हर परिस्थिति में अपने फैसलों के लिए जाने गए। वे ऐसे नेता थे जो अपनी तेज़ आवाज़ और स्पष्ट रुख के लिए पहचाने जाते थे,लेकिन जरूरत पड़ने पर चुपचाप काम करना भी जानते थे।
अजित पवार का राजनीतिक सफर लंबा और उतार-चढ़ाव से भरा रहा। वे न केवल महाराष्ट्र की सत्ता संरचना का अहम हिस्सा रहे,बल्कि सहकारी आंदोलन,कृषि नीति और राज्य के वित्तीय प्रबंधन में भी उनकी भूमिका निर्णायक रही। कई बार विवादों में रहने के बावजूद,उनके समर्थक उन्हें एक निर्णायक और परिणाम देने वाला नेता मानते रहे।
बारामती,जो उनका राजनीतिक गढ़ माना जाता था, वहाँ शोक का माहौल है। समर्थक,कार्यकर्ता और आम लोग इस हादसे को स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं। स्थानीय लोगों के लिए अजित पवार केवल एक नेता नहीं,बल्कि अपनी मिट्टी से जुड़ा हुआ चेहरा थे,जो हर सुख-दुख में उनके बीच मौजूद रहता था।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अजित पवार का जाना महाराष्ट्र की राजनीति में एक बड़ा शून्य पैदा करेगा। मौजूदा राजनीतिक समीकरणों में उनकी भूमिका बेहद अहम थी और आने वाले समय में इसका असर राज्य की सियासत पर साफ दिखाई दे सकता है।
इस दुखद हादसे ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि सार्वजनिक जीवन में सक्रिय नेताओं की सुरक्षा और यात्रा व्यवस्था को लेकर कितनी सतर्कता बरती जा रही है। हालाँकि,फिलहाल पूरा देश शोक में डूबा है और हर ओर से केवल एक ही भावना सामने आ रही है—एक अनुभवी,प्रभावशाली और जमीनी नेता को श्रद्धांजलि।
अजित पवार भले ही अब हमारे बीच न हों,लेकिन उनका राजनीतिक योगदान, उनकी कार्यशैली और उनका प्रभाव महाराष्ट्र की राजनीति में लंबे समय तक महसूस किया जाता रहेगा। उनके निधन से जो खालीपन पैदा हुआ है,उसे भर पाना आसान नहीं होगा। यह केवल एक व्यक्ति की विदाई नहीं,बल्कि एक पूरे दौर का अंत माना जा रहा है।
