नई दिल्ली,6 मार्च (युआईटीवी)- भारत और फिनलैंड के बीच आर्थिक सहयोग लगातार मजबूत होता दिखाई दे रहा है। वित्त वर्ष 2026 की अप्रैल से दिसंबर अवधि के दौरान दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार इस अवधि में भारत-फिनलैंड व्यापार पिछले साल की समान अवधि की तुलना में लगभग 19 प्रतिशत बढ़ा है। विशेषज्ञों का मानना है कि फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब की आधिकारिक भारत यात्रा से दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को और गति मिलने की संभावना है,जिससे व्यापार और निवेश के नए अवसर खुल सकते हैं।
यह जानकारी डेटा एनालिटिक्स कंपनी रूबिक्स डेटा साइंसेज की एक रिपोर्ट में सामने आई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत से फिनलैंड को होने वाला निर्यात इस बढ़ोतरी का सबसे बड़ा कारण रहा है। वित्त वर्ष 2026 की अप्रैल-दिसंबर अवधि में भारतीय निर्यात सालाना आधार पर करीब 11 प्रतिशत की दर से बढ़ा है। विशेषज्ञों के मुताबिक यह वृद्धि सिर्फ आँकड़ों तक सीमित नहीं है,बल्कि यह इस बात का संकेत भी है कि भारत और फिनलैंड के बीच व्यापारिक संबंध धीरे-धीरे अधिक विविध और मजबूत होते जा रहे हैं।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि दोनों देशों की सरकारें आने वाले वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार की मात्रा को दोगुना करने का लक्ष्य लेकर चल रही हैं। ऐसे में राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब की यह यात्रा सिर्फ औपचारिक राजनयिक कार्यक्रम नहीं मानी जा रही,बल्कि इसे आर्थिक सहयोग को नई दिशा देने वाले महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर इस यात्रा के दौरान व्यापार,प्रौद्योगिकी और औद्योगिक सहयोग से जुड़े ठोस समझौते होते हैं,तो इससे दोनों देशों के आर्थिक संबंधों में दीर्घकालिक मजबूती आ सकती है।
आँकड़ों पर नजर डालें तो पिछले कुछ वर्षों में भारत से फिनलैंड को निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। वित्त वर्ष 2022 में भारत का निर्यात लगभग 30 करोड़ डॉलर था,जो बढ़कर वित्त वर्ष 2024 में लगभग 60 करोड़ डॉलर तक पहुँच गया। यह वृद्धि दर्शाती है कि भारतीय उत्पादों की माँग फिनलैंड के बाजार में लगातार बढ़ रही है। दूसरी ओर आयात की स्थिति अपेक्षाकृत स्थिर रही है। वित्त वर्ष 2022 से लेकर वित्त वर्ष 2025 के बीच भारत का फिनलैंड से आयात लगभग 800 से 900 करोड़ डॉलर के बीच बना रहा।
इस स्थिर आयात और बढ़ते निर्यात का एक बड़ा असर यह हुआ है कि दोनों देशों के बीच व्यापार घाटा धीरे-धीरे कम हुआ है। हाल के वर्षों में भारत का व्यापार घाटा घटकर लगभग 300 से 400 करोड़ डॉलर के बीच रह गया है। विशेषज्ञों के अनुसार यह स्थिति पहले की तुलना में अधिक संतुलित मानी जा रही है और यह दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों के स्वस्थ विकास का संकेत देती है।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि भारत के निर्यात ढाँचे में पिछले कुछ वर्षों में तेज बदलाव देखने को मिला है। खासतौर पर रासायनिक उत्पादों के क्षेत्र में भारत की हिस्सेदारी तेजी से बढ़ी है। उदाहरण के तौर पर हेटेरोसाइक्लिक कंपाउंड्स का हिस्सा भारत के कुल निर्यात में पहले लगभग 1 प्रतिशत था,जो अब बढ़कर करीब 28 प्रतिशत हो गया है। इस बदलाव के साथ यह श्रेणी भारत से फिनलैंड को निर्यात होने वाले प्रमुख उत्पादों में सबसे बड़ी बन गई है।
इसके अलावा यात्री और मालवाहक जहाजों का निर्यात भी तेजी से बढ़ा है और अब इसकी हिस्सेदारी करीब 10 प्रतिशत तक पहुँच गई है। वहीं फार्मास्यूटिकल उत्पादों की हिस्सेदारी पहले 18 प्रतिशत थी,जो अब घटकर लगभग 12 प्रतिशत रह गई है। विशेषज्ञों के अनुसार यह बदलाव यह दर्शाता है कि भारत धीरे-धीरे अधिक विविध और तकनीकी रूप से उन्नत उत्पादों के निर्यात की ओर बढ़ रहा है।
दूसरी ओर फिनलैंड से भारत को होने वाले आयात में भी कुछ महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिले हैं। पहले नाइट्रोजन उर्वरकों का हिस्सा आयात में करीब 28 प्रतिशत था,जो अब घटकर लगभग 19 प्रतिशत रह गया है। इसका मतलब है कि भारत का आयात अब केवल एक या दो वस्तुओं पर केंद्रित नहीं रहा,बल्कि इसमें विविधता बढ़ रही है।
इसके साथ ही इलेक्ट्रॉनिक इंटीग्रेटेड सर्किट का आयात लगभग 15 प्रतिशत के स्तर पर स्थिर बना हुआ है। वहीं विद्युत ट्रांसफार्मर का हिस्सा 3 प्रतिशत से बढ़कर लगभग 5 प्रतिशत तक पहुँच गया है। इसके अलावा रासायनिक लकड़ी लुगदी का व्यापार भी बढ़ा है और इसका हिस्सा 1 प्रतिशत से बढ़कर करीब 4 प्रतिशत हो गया है। यह संकेत देता है कि दोनों देशों के बीच औद्योगिक और विनिर्माण क्षेत्रों में सहयोग बढ़ रहा है।
हालाँकि,व्यापार में यह वृद्धि उत्साहजनक है,लेकिन आँकड़ें यह भी बताते हैं कि अभी भी सुधार की काफी गुंजाइश मौजूद है। वर्तमान में यूरोपीय संघ के साथ भारत के कुल माल व्यापार में फिनलैंड की हिस्सेदारी केवल लगभग 1 प्रतिशत है। इसका मतलब यह है कि दोनों देशों के बीच व्यापारिक संभावनाएं अभी पूरी तरह से इस्तेमाल नहीं हुई हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रौद्योगिकी,स्वच्छ ऊर्जा,डिजिटल नवाचार,शिक्षा और हरित उद्योग जैसे क्षेत्रों में भारत और फिनलैंड के बीच सहयोग की अपार संभावनाएँ मौजूद हैं। फिनलैंड को उन्नत तकनीक,शिक्षा प्रणाली और हरित प्रौद्योगिकी के लिए जाना जाता है,जबकि भारत तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था और विशाल बाजार के रूप में दुनिया का ध्यान आकर्षित कर रहा है।
ऐसे में राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब की भारत यात्रा को दोनों देशों के बीच आर्थिक और रणनीतिक सहयोग को नई दिशा देने वाले अवसर के रूप में देखा जा रहा है। यदि इस यात्रा के दौरान व्यापार और निवेश से जुड़े ठोस समझौते होते हैं,तो आने वाले वर्षों में भारत-फिनलैंड संबंध न केवल राजनयिक स्तर पर,बल्कि आर्थिक मोर्चे पर भी कहीं अधिक मजबूत दिखाई दे सकते हैं।
