प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों (तस्वीर क्रेडिट@DDNewsUP)

भारत-फ्रांस रणनीतिक साझेदारी को नई ऊँचाई देगा राष्ट्रपति मैक्रों का भारत दौरा,एआई और इंडो-पैसिफिक सहयोग पर होगी अहम चर्चा

नई दिल्ली,11 फरवरी (युआईटीवी)- फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों 17 से 19 फरवरी तक तीन दिवसीय आधिकारिक दौरे पर भारत आ रहे हैं। यह दौरा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर हो रहा है और दोनों देशों के बीच पहले से मजबूत रणनीतिक साझेदारी को और गहराई देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। विदेश मंत्रालय की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार,इस यात्रा के दौरान राष्ट्रपति मैक्रों और प्रधानमंत्री मोदी द्विपक्षीय सहयोग के कई अहम क्षेत्रों पर विस्तार से चर्चा करेंगे,जिनमें रक्षा,तकनीक,नवाचार,इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग और वैश्विक मुद्दे शामिल हैं।

यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है,जब हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी फ्रांस की यात्रा पर गए थे और दोनों नेताओं के बीच व्यापक बातचीत हुई थी। इसके बाद राष्ट्रपति मैक्रों का भारत आना इस बात का संकेत है कि भारत और फ्रांस अपनी रणनीतिक साझेदारी को केवल कूटनीतिक स्तर तक सीमित नहीं रखना चाहते,बल्कि इसे भविष्य की वैश्विक चुनौतियों और अवसरों से जोड़कर आगे बढ़ाना चाहते हैं। विदेश मंत्रालय ने इसे दोनों देशों के बीच आपसी भरोसे,गहराई और साझा प्रतिबद्धता का प्रतीक बताया है।

राष्ट्रपति मैक्रों के इस दौरे का एक प्रमुख आकर्षण भारत-एआई इम्पेक्ट समिट 2026 में उनकी भागीदारी होगी। यह समिट 16 से 20 फरवरी तक नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित की जा रही है। 19 फरवरी को राष्ट्रपति मैक्रों इस समिट में हिस्सा लेंगे,जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसका औपचारिक उद्घाटन करेंगे। यह समिट कई मायनों में ऐतिहासिक मानी जा रही है,क्योंकि यह ग्लोबल साउथ में आयोजित होने वाला पहला आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) समिट है,जिसमें दुनिया भर के देशों से नेता,नीति निर्माता,उद्योग जगत के प्रतिनिधि और तकनीकी विशेषज्ञ भाग लेंगे।

भारत-एआई इम्पेक्ट समिट का उद्देश्य एआई की उस परिवर्तनकारी क्षमता पर चर्चा करना है,जो गवर्नेस को मजबूत करने,नवाचार को बढ़ावा देने और स्थायी विकास के लक्ष्यों को हासिल करने में मदद कर सकती है। भारत सरकार का मानना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस भारत के विकास सफर में एक अहम भूमिका निभा रहा है। यह न केवल पब्लिक सर्विस डिलीवरी को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बना सकता है,बल्कि बड़े पैमाने पर समावेशी विकास को भी समर्थन देता है,जो 2047 तक विकसित भारत के दृष्टिकोण से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है।

भारत की भाषाई और सांस्कृतिक विविधता इसे एआई के क्षेत्र में एक अनूठी पहचान देती है। देश में सैकड़ों भाषाएँ और बोलियाँ बोली जाती हैं,जिससे बहुभाषी और मल्टी-मॉडल एआई सिस्टम विकसित करने की संभावनाएँ काफी व्यापक हैं। यही कारण है कि भारत को एआई के जिम्मेदार और मानव-केंद्रित उपयोग के लिए एक आदर्श प्रयोगशाला के रूप में देखा जा रहा है। समिट के दौरान इन पहलुओं पर वैश्विक स्तर पर विचार-विमर्श किया जाएगा।

राष्ट्रपति मैक्रों के दौरे के दौरान भारत और फ्रांस के बीच ‘हॉरिजोन 2047 रोडमैप’ में उल्लिखित क्षेत्रों में सहयोग को मजबूत करने पर भी चर्चा होगी। यह रोडमैप दोनों देशों के भविष्य के संबंधों की दिशा तय करता है और इसमें रक्षा उत्पादन,अंतरिक्ष, साइबर सुरक्षा,जलवायु परिवर्तन,स्वच्छ ऊर्जा और अत्याधुनिक तकनीकों जैसे क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई है। माना जा रहा है कि इस दौरे के दौरान कुछ नए समझौते और संयुक्त पहलों की घोषणा भी हो सकती है,जो आने वाले वर्षों में दोनों देशों के संबंधों को नई गति देंगे।

इस यात्रा का एक और महत्वपूर्ण पहलू इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भारत और फ्रांस के सहयोग को लेकर होने वाली बातचीत है। दोनों देश इस क्षेत्र में शांति,स्थिरता और मुक्त नौवहन के समर्थक हैं। फ्रांस,इंडो-पैसिफिक में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला देश है,जबकि भारत इस क्षेत्र में एक प्रमुख शक्ति के रूप में उभर रहा है। ऐसे में दोनों नेताओं की बातचीत क्षेत्रीय सुरक्षा,समुद्री सहयोग और साझा रणनीतिक हितों पर केंद्रित रहने की संभावना है।

राष्ट्रपति मैक्रों और प्रधानमंत्री मोदी मुंबई में ‘भारत-फ्रांस ईयर ऑफ इनोवेशन’ का भी उद्घाटन करेंगे। यह कार्यक्रम पूरे साल 2026 तक दोनों देशों में मनाया जाएगा और इसका उद्देश्य नवाचार,स्टार्टअप,अनुसंधान और तकनीकी सहयोग को बढ़ावा देना है। इस पहल के जरिए भारत और फ्रांस के बीच अकादमिक संस्थानों,उद्योगों और युवा उद्यमियों के स्तर पर सहयोग को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।

राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों का यह भारत दौरा केवल एक औपचारिक राजनयिक यात्रा नहीं है,बल्कि यह भारत-फ्रांस संबंधों को भविष्य की जरूरतों और वैश्विक बदलावों के अनुरूप ढालने की एक ठोस कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। एआई,नवाचार और रणनीतिक सहयोग के जरिए दोनों देश न केवल आपसी संबंधों को मजबूत करेंगे,बल्कि वैश्विक मंच पर भी एक जिम्मेदार और दूरदर्शी साझेदारी का उदाहरण पेश करेंगे।