अहमदाबाद,28 मार्च (युआईटीवी)- भारत की समुद्री सुरक्षा और आपातकालीन प्रतिक्रिया क्षमताओं को एक नई मजबूती देते हुए अदाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन लिमिटेड (एपीएसईजेड) ने देश के पहले ‘पोर्ट ऑफ रिफ्यूज’ (पीओआर) को आधिकारिक रूप से चालू करने की घोषणा की है। यह पहल न केवल भारत के समुद्री ढाँचे में एक महत्वपूर्ण कमी को दूर करती है,बल्कि संकट में फँसे जहाजों,समुद्री दुर्घटनाओं और पर्यावरणीय जोखिमों से निपटने के लिए एक संगठित और आधुनिक तंत्र भी स्थापित करती है।
अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार, ‘पोर्ट ऑफ रिफ्यूज’ एक ऐसा सुरक्षित स्थान होता है,जहाँ किसी संकटग्रस्त जहाज को अस्थायी आश्रय दिया जा सकता है,ताकि स्थिति को नियंत्रित किया जा सके,मानव जीवन की रक्षा की जा सके और पर्यावरणीय क्षति को न्यूनतम किया जा सके। अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन द्वारा परिभाषित इस अवधारणा को दुनिया की प्रमुख समुद्री अर्थव्यवस्थाओं में लंबे समय से अपनाया जाता रहा है,लेकिन भारत में अब तक इसका औपचारिक ढाँचा मौजूद नहीं था।
एपीएसईजेड की इस पहल को वैश्विक स्तर की विशेषज्ञता और तकनीकी सहयोग प्राप्त है। इसके तहत कंपनी ने एसएमआईटी साल्वेज, रॉयल बोस्कालिस वेस्टमिंस्टर एनवी और समुद्री आपातकालीन प्रतिक्रिया केंद्र (एमईआरसी) के साथ एक त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन (एमओयू) किया है। इस सहयोग के जरिए भारत को अत्याधुनिक बचाव तकनीक,त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली और समन्वित संचालन क्षमता मिलेगी,जिससे समुद्री संकट की स्थिति में प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सकेगी।
भारत,जिसकी तटरेखा 11,000 किलोमीटर से अधिक लंबी है और जो दुनिया के प्रमुख समुद्री व्यापार मार्गों के बीच स्थित है,लंबे समय से ऐसी संरचना की आवश्यकता महसूस कर रहा था। वैश्विक शिपिंग नेटवर्क में भारत की बढ़ती भूमिका और समुद्री व्यापार के विस्तार ने इस आवश्यकता को और अधिक महत्वपूर्ण बना दिया था। ऐसे में ‘पोर्ट ऑफ रिफ्यूज’ का निर्माण देश के लिए एक रणनीतिक उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।
एपीएसईजेड,जो भारत के कुल बंदरगाह कार्गो वॉल्यूम का लगभग 27 प्रतिशत सँभालती है,इस परियोजना के माध्यम से न केवल अपनी परिचालन क्षमता को बढ़ा रही है,बल्कि राष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा ढांचे को भी मजबूत कर रही है। कंपनी के पूर्णकालिक निदेशक और सीईओ अश्वनी गुप्ता ने इस उपलब्धि को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि बंदरगाह केवल व्यापार और अर्थव्यवस्था को जोड़ने का माध्यम नहीं होते,बल्कि संकट की स्थिति में जीवन की रक्षा भी करते हैं।
उन्होंने कहा कि समर्पित ‘पोर्ट ऑफ रिफ्यूज’ की स्थापना से भारत की समुद्री तैयारियों को एक नया आयाम मिला है और यह वैश्विक स्तर पर तटीय सुरक्षा के लिए एक नया मानक स्थापित करेगा। उनके अनुसार,विश्व स्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ-साथ जिम्मेदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है और एपीएसईजेड इस संतुलन को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।
इस परियोजना के तहत एपीएसईजेड ने दो प्रमुख बंदरगाहों को ‘पोर्ट ऑफ रिफ्यूज’ के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया है। पश्चिमी तट पर स्थित दिघी बंदरगाह अरब सागर और फारस की खाड़ी की ओर जाने वाले समुद्री मार्गों के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। वहीं,पूर्वी तट पर गोपालपुर बंदरगाह बंगाल की खाड़ी और मलक्का जलडमरूमध्य की दिशा में जाने वाले जहाजों को सहायता प्रदान करेगा।
मलक्का जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापार गलियारों में से एक है,जहाँ हर दिन हजारों जहाजों का आवागमन होता है। ऐसे में गोपालपुर बंदरगाह का ‘पोर्ट ऑफ रिफ्यूज’ के रूप में विकसित होना न केवल भारत,बल्कि वैश्विक समुद्री व्यापार के लिए भी महत्वपूर्ण है।
इन दोनों सुविधाओं में अत्याधुनिक उपकरण और प्रशिक्षित विशेषज्ञों की टीम तैनात की जाएगी,जो आपातकालीन स्थिति में तुरंत प्रतिक्रिया दे सकेगी। इनमें जहाजों के बचाव, मलबा हटाने,आग बुझाने,प्रदूषण नियंत्रण और आपातकालीन समन्वय जैसी सेवाएँ शामिल होंगी। इससे समुद्री दुर्घटनाओं के दौरान त्वरित और प्रभावी कार्रवाई संभव हो सकेगी।
भारत सरकार के शिपिंग महानिदेशक श्याम जगन्नाथन ने भी इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि मानकीकृत ‘पोर्ट ऑफ रिफ्यूज’ ढाँचे को अपनाने से समुद्री दुर्घटनाओं के दौरान बेहतर समन्वय और समयबद्ध प्रतिक्रिया सुनिश्चित होगी। इससे न केवल मानव जीवन की रक्षा होगी,बल्कि माल और तटीय पर्यावरण को भी सुरक्षित रखा जा सकेगा।
उन्होंने यह भी कहा कि यह पहल अंतर्राष्ट्रीय समुद्री सम्मेलनों और नियमों के अनुरूप है,जो सुरक्षा,पर्यावरण संरक्षण और वैश्विक शिपिंग नेटवर्क में भारत की भूमिका को और मजबूत करेगी।
इस परियोजना से जुड़े वैश्विक साझेदारों ने भी इसे एक महत्वपूर्ण कदम बताया है। एसएमआईटी साल्वेज के प्रबंध निदेशक रिचर्ड जानसेन ने कहा कि किसी दुर्घटनाग्रस्त जहाज को सुरक्षित आश्रय प्रदान करना बचाव कार्य का एक अहम हिस्सा होता है। इससे जहाज और उसके माल को जल्दी और सुरक्षित तरीके से सँभाला जा सकता है,साथ ही पर्यावरणीय नुकसान को भी नियंत्रित किया जा सकता है।
उन्होंने यह भी भरोसा जताया कि उनकी कंपनी अपने वैश्विक अनुभव और तकनीकी विशेषज्ञता के जरिए भारत के प्रमुख शिपिंग मार्गों पर तेज,सुरक्षित और समन्वित आपातकालीन प्रतिक्रिया सुनिश्चित करेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल भारत की समुद्री रणनीति में एक बड़ा बदलाव ला सकती है। इससे न केवल समुद्री सुरक्षा बढ़ेगी,बल्कि अंतर्राष्ट्रीय व्यापारिक समुदाय में भारत की विश्वसनीयता भी मजबूत होगी। साथ ही,यह कदम पर्यावरण संरक्षण के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है,क्योंकि समुद्री दुर्घटनाओं से होने वाले तेल रिसाव और अन्य प्रदूषण को समय रहते नियंत्रित किया जा सकेगा।
भारत में पहले ‘पोर्ट ऑफ रिफ्यूज’ का संचालन शुरू होना देश के समुद्री ढाँचे के विकास में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है। यह पहल भारत को वैश्विक समुद्री मानकों के करीब लाने के साथ-साथ उसे एक जिम्मेदार और सक्षम समुद्री राष्ट्र के रूप में स्थापित करती है। आने वाले समय में यह प्रणाली न केवल देश की समुद्री सुरक्षा को मजबूत करेगी,बल्कि वैश्विक शिपिंग नेटवर्क में भारत की भूमिका को भी और अधिक प्रभावशाली बनाएगी।
