पाकिस्तान के प्रधानमंत्री मोहम्मद शहबाज शरीफ

भारत-पाकिस्तान संबंधों पर एक नई पेशकश,शहबाज शरीफ ने भारत के साथ सऊदी अरब में वार्ता का दिया प्रस्ताव,नरेंद्र मोदी ने दिया कड़ा संदेश

इस्लामाबाद/नई दिल्ली,23 मई (युआईटीवी)- पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने एक बार फिर से भारत के साथ वार्ता की पेशकश की है। गुरुवार को सऊदी अरब दौरे के दौरान दिए गए इस बयान में शरीफ ने यह भी कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच अगर बातचीत होती है,तो वह राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) स्तर पर होगी और इसका एजेंडा कश्मीर,पानी,आतंकवाद और व्यापार पर आधारित होगा। उन्होंने अमेरिका से आग्रह किया कि वह इस वार्ता में मध्यस्थ की भूमिका निभाए और सऊदी अरब को एक संभावित तटस्थ स्थान बताया,जहाँ दोनों देशों के बीच बातचीत संभव हो सकती है।

प्रधानमंत्री शरीफ का यह बयान ऐसे समय में आया है,जब पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति डगमगाई हुई है और विदेशी निवेश में भारी गिरावट दर्ज की गई है। उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान और भारत के बीच धीरे-धीरे तनाव कम हो रहा है और दोनों देशों के डीजीएमओ (डायरेक्टर जनरल मिलिट्री ऑपरेशंस) आपस में संवाद कर रहे हैं। यह बात पाकिस्तान की ओर से एक सकारात्मक संकेत के तौर पर देखी जा सकती है।

शरीफ ने कहा कि अगर वार्ता होती है,तो पाकिस्तान का प्रतिनिधित्व देश के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार करेंगे। साथ ही उन्होंने माना कि इस मुद्दे पर सेना और सरकार में सहमति है। शरीफ ने यह भी पुष्टि की कि सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर को फील्ड मार्शल के पद पर पदोन्नत करने का निर्णय संघीय कैबिनेट और पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) के नेता नवाज शरीफ की मंजूरी के बाद लिया गया था। इससे यह स्पष्ट होता है कि पाकिस्तानी सेना भी इस वार्ता की दिशा में एक भूमिका निभा रही है।

शरीफ ने यह प्रस्ताव भी रखा कि अमेरिका भारत-पाक वार्ता में मध्यस्थता कर सकता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अमेरिका की भूमिका दोनों देशों के लिए स्वीकार्य हो सकती है। वहीं सऊदी अरब को तटस्थ स्थान के रूप में प्रस्तावित किया गया,जिससे यह प्रतीत होता है कि पाकिस्तान अब अपने पारंपरिक सहयोगियों की मदद से द्विपक्षीय संबंधों में सुधार की कोशिश कर रहा है।

दूसरी ओर, भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उसी दिन राजस्थान के बीकानेर में एक विशाल चुनावी जनसभा को संबोधित करते हुए पाकिस्तान को कड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि भारत आतंकवाद को किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं करेगा और जब तक पाकिस्तान कश्मीर पर अपना “अवैध कब्जा” नहीं छोड़ता,तब तक उसके साथ कोई वार्ता संभव नहीं है।

पीएम मोदी ने कहा, “अगर कोई बातचीत होगी,तो वह केवल पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) पर होगी। अगर पाकिस्तान आतंकवादियों का निर्यात करता रहेगा,तो उसे भारत का एक बूँद पानी भी नसीब नहीं होगा।”

उन्होंने यह भी जोड़ा कि भारत के खिलाफ खून बहाने की कोशिश पाकिस्तान को बहुत महँगी पड़ेगी। यह बयान भारत की स्पष्ट नीति को दर्शाता है कि “आतंकवाद और बातचीत एक साथ नहीं चल सकते।”

भारत की रणनीति अभी स्पष्ट रूप से “वेट एंड वॉच” (प्रतीक्षा करो और देखो) वाली है। मोदी सरकार के पिछले एक दशक के रुख को देखते हुए यह कहा जा सकता है कि भारत केवल शब्दों से नहीं,बल्कि ठोस कार्रवाई के जरिए ही संबंधों को आगे बढ़ाने में विश्वास करता है। भारत ने हमेशा कहा है कि वह आतंक और बातचीत को अलग-अलग नहीं देख सकता।

अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका और पश्चिमी देश यह चाहते हैं कि भारत और पाकिस्तान के बीच शांति बनी रहे,खासकर ऐसे समय में जब विश्व पहले से ही यूक्रेन और गाजा जैसे क्षेत्रों में संघर्षों से जूझ रहा है। ऐसे में दक्षिण एशिया में एक और संघर्ष किसी को भी रास नहीं आएगा।

दूसरी तरफ,मोदी सरकार चुनावी मोड में है और इस समय पाकिस्तान के साथ किसी भी प्रकार की वार्ता का राजनीतिक जोखिम उठाना शायद सरकार उचित नहीं समझेगी। यह भी ध्यान देने योग्य है कि भारत ने पहले भी द्विपक्षीय मुद्दों पर किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता को खारिज किया है।

शहबाज शरीफ की वार्ता की पेशकश और नरेंद्र मोदी का सख्त जवाब यह दिखाता है कि भारत-पाकिस्तान संबंध अभी भी बेहद जटिल हैं। पाकिस्तान जहाँ आर्थिक और कूटनीतिक दबाव में वार्ता की ओर झुकाव दिखा रहा है,वहीं भारत अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए स्पष्ट संकेत दे रहा है कि जब तक आतंकवाद बंद नहीं होता और पाकिस्तान अपने कश्मीर रुख में बदलाव नहीं करता,तब तक कोई बातचीत संभव नहीं है।

ऐसे में आने वाले दिनों में देखना होगा कि पाकिस्तान अपनी पेशकश को कितना गंभीरता से आगे बढ़ाता है और क्या वास्तव में भारत को कोई ठोस प्रस्ताव भेजा जाता है या यह बयान सिर्फ अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर “शांति प्रिय” दिखने की एक कोशिश भर है। फिलहाल,भारत ने अपने रुख में कोई नरमी नहीं दिखाई है और यही फिलहाल सबसे स्पष्ट सच्चाई है।