नई दिल्ली,3 फरवरी (युआईटीवी)- भारत और पाकिस्तान के बीच क्रिकेट मुकाबले हमेशा से सिर्फ खेल तक सीमित नहीं रहे हैं,बल्कि इनके साथ राजनीति,कूटनीति और भावनाएँ भी जुड़ी रहती हैं। एक बार फिर ऐसा ही माहौल बनता दिख रहा है। पाकिस्तान सरकार ने भले ही सोशल मीडिया के जरिए यह ऐलान कर दिया हो कि उसकी टीम 15 फरवरी को होने वाले भारत-पाकिस्तान वर्ल्ड कप मुकाबले का बहिष्कार करेगी,लेकिन अब एक नई रिपोर्ट ने इस पूरे मामले में सस्पेंस और बढ़ा दिया है। खबरों के मुताबिक,पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) इस फैसले को आधिकारिक तौर पर इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (आईसीसी) को लिखित रूप में बताने के मूड में नहीं है।
टेलीकॉम एशिया स्पोर्ट्स की रिपोर्ट के अनुसार,पीसीबी ने भारत के खिलाफ वर्ल्ड कप मैच के बॉयकॉट के मुद्दे पर अपनी रणनीति को फिलहाल खुलकर सामने न लाने का फैसला किया है। सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि बोर्ड इस पूरे मामले में जानबूझकर सस्पेंस बनाए रखना चाहता है,ताकि आगे के कदमों के लिए उसके पास ज्यादा विकल्प खुले रहें। इसी वजह से पीसीबी आईसीसी को पत्र लिखकर अपने फैसले की आधिकारिक जानकारी देने से बच रहा है।
रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से यह भी कहा गया है कि पाकिस्तान सरकार पहले ही इस फैसले की घोषणा आधिकारिक प्लेटफॉर्म के जरिए कर चुकी है,इसलिए आईसीसी को अलग से लिखने की कोई जरूरत नहीं समझी जा रही। सूत्रों का कहना है कि चूँकि यह फैसला सरकार का है,न कि सिर्फ क्रिकेट बोर्ड का,इसलिए पीसीबी खुद को इस मामले में तकनीकी रूप से अलग रखना चाहता है। इससे यह संकेत भी मिलता है कि बोर्ड भविष्य में किसी कानूनी या कूटनीतिक मोड़ के लिए खुद को सुरक्षित रखना चाहता है।
इस पूरे घटनाक्रम के पीछे पाकिस्तान की आंतरिक राजनीति और क्रिकेट प्रशासन की जटिलताएँ भी साफ नजर आती हैं। रिपोर्ट के मुताबिक,पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ ने इस मुद्दे पर अहम लोगों से सलाह-मशविरा किया है। रविवार को लाहौर में पीसीबी अध्यक्ष मोहसिन नकवी से मुलाकात से पहले प्रधानमंत्री शरीफ ने पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के पूर्व चेयरमैन नजम सेठी से भी बातचीत की थी। सूत्रों का दावा है कि इस मुलाकात में सेठी ने प्रधानमंत्री को भारत के खिलाफ सख्त रुख अपनाने की सलाह दी थी।
बताया जा रहा है कि नजम सेठी ने अपनी दलील में 2016 का जिक्र किया,जब उनकी चेयरमैनशिप के दौरान भारत एक द्विपक्षीय क्रिकेट समझौते से पीछे हट गया था। सेठी का मानना है कि पाकिस्तान को अब नरम रुख अपनाने के बजाय सख्त कदम उठाने चाहिए। इसी सलाह के बाद सरकार ने भारत के खिलाफ वर्ल्ड कप मुकाबले के बहिष्कार का फैसला सार्वजनिक रूप से घोषित किया।
गौरतलब है कि भारत और श्रीलंका की सह-मेजबानी में टी20 वर्ल्ड कप 2026 की शुरुआत 7 फरवरी से होनी है। इस बड़े टूर्नामेंट में भारत और पाकिस्तान के बीच 15 फरवरी को मुकाबला खेला जाना तय है,जिसे लेकर दुनियाभर के क्रिकेट प्रशंसकों में जबरदस्त उत्साह रहता है। रविवार को पाकिस्तान सरकार ने यह स्पष्ट किया कि वह विश्व कप में पाकिस्तान की भागीदारी को मंजूरी देती है,लेकिन भारत के खिलाफ मैच में टीम हिस्सा नहीं लेगी। इस ऐलान ने क्रिकेट जगत में हलचल मचा दी।
हालाँकि,सरकार के इस सार्वजनिक फैसले के बावजूद पीसीबी का आईसीसी को औपचारिक रूप से सूचित न करना कई सवाल खड़े कर रहा है। जानकारों का मानना है कि यह कदम पूरे मामले को कुछ समय तक दबाए रखने और स्थिति को अपने पक्ष में मोड़ने की कोशिश हो सकता है। यदि पीसीबी आधिकारिक तौर पर आईसीसी को पत्र लिख देता है,तो बोर्ड पर नियमों के उल्लंघन और संभावित प्रतिबंधों का खतरा बढ़ सकता है।
स्पष्ट है कि पीसीबी इस मामले में आईसीसी की किसी भी उस अपील पर ध्यान देने के मूड में नहीं है,जिसमें आपसी सहमति से समाधान निकालने की बात कही जाए। बोर्ड का तर्क यही रहेगा कि यह फैसला पाकिस्तान सरकार ने लिया है और क्रिकेट बोर्ड के पास इसमें हस्तक्षेप की गुंजाइश नहीं है। इससे यह भी संकेत मिलता है कि आने वाले दिनों में यह मामला सिर्फ क्रिकेट प्रशासन तक सीमित नहीं रहेगा,बल्कि कानूनी और व्यावसायिक मोर्चे पर भी जा सकता है।
अगर भारत और पाकिस्तान के बीच यह हाई-वोल्टेज मुकाबला नहीं खेला जाता है,तो इसका सीधा असर आईसीसी और उसके आधिकारिक ब्रॉडकास्ट पार्टनर्स पर पड़ेगा। भारत-पाक मैच को क्रिकेट की दुनिया का सबसे बड़ा व्यावसायिक मुकाबला माना जाता है,जिससे विज्ञापन और प्रसारण के जरिए भारी राजस्व आता है। ऐसे में इस मैच के रद्द होने या बहिष्कार की स्थिति में ब्रॉडकास्टर को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। पूरी संभावना है कि नुकसान की भरपाई के लिए मामला कोर्ट तक पहुँच सकता है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पाकिस्तान सरकार ने इस पूरे मुद्दे पर पहले ही कानूनी सलाह ले ली है। सूत्रों के मुताबिक,अगर आईसीसी इस फैसले को लेकर पाकिस्तान के खिलाफ कोई सख्त कदम उठाता है,तो सरकार पूरी मजबूती से पीसीबी का साथ देगी। इससे यह साफ हो जाता है कि पाकिस्तान इस मुद्दे को लेकर टकराव के लिए भी तैयार है।
भारत-पाक वर्ल्ड कप मुकाबले को लेकर अनिश्चितता लगातार गहराती जा रही है। एक तरफ सरकार का सख्त रुख है,दूसरी तरफ पीसीबी की रणनीतिक चुप्पी। आईसीसी,ब्रॉडकास्टर और क्रिकेट फैंस सभी इस बात का इंतजार कर रहे हैं कि आगे क्या होगा। फिलहाल इतना तय है कि यह मामला सिर्फ एक मैच तक सीमित नहीं रहेगा,बल्कि आने वाले दिनों में अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट राजनीति का बड़ा मुद्दा बन सकता है।
