मॉस्को,20 अगस्त (युआईटीवी)- भारत और रूस के बीच दशकों से चली आ रही रणनीतिक साझेदारी को एक नई ऊँचाई पर ले जाने के प्रयास में विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर इन दिनों रूस की तीन दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर हैं। यह यात्रा 19 अगस्त से 21 अगस्त 2025 तक चलेगी और इसका मुख्य आकर्षण 20 अगस्त को मास्को में आयोजित होने वाला भारत-रूस अंतर-सरकारी आयोग (आईआरआईजीसी-टीईसी) के 26वें सत्र का आयोजन है। इस सत्र की सह-अध्यक्षता भारत की ओर से एस.जयशंकर और रूस की ओर से प्रथम उप-प्रधानमंत्री डेनिस मंटुरोव करेंगे। इस आयोग की बैठक को दोनों देशों के बीच बढ़ते व्यापारिक, आर्थिक,वैज्ञानिक,तकनीकी और सांस्कृतिक सहयोग की दिशा में एक मजबूत कदम माना जा रहा है।
भारत-रूस अंतर-सरकारी आयोग (आईआरआईजीसी-टीईसी) दोनों देशों के बीच एक महत्वपूर्ण वार्षिक तंत्र है,जिसके माध्यम से रणनीतिक साझेदारी के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा और समीक्षा की जाती है। इस बार की बैठक में खासतौर से ऊर्जा सहयोग,रक्षा उत्पादन,नई तकनीक के क्षेत्र में अनुसंधान,व्यापारिक संतुलन और निवेश अवसरों पर ध्यान केंद्रित होने की संभावना है। भारत और रूस लंबे समय से रक्षा और ऊर्जा क्षेत्र में साझेदार रहे हैं,लेकिन अब दोनों देश अपने संबंधों का दायरा और विस्तारित करना चाहते हैं। इसी कारण विज्ञान,प्रौद्योगिकी,नवाचार और शिक्षा जैसे क्षेत्रों पर भी चर्चा की जाएगी।
जयशंकर का यह दौरा ऐसे समय पर हो रहा है,जब वैश्विक राजनीति में बड़े बदलाव देखने को मिल रहे हैं। अमेरिका और पश्चिमी देशों के साथ रूस के तनावपूर्ण रिश्तों के बीच भारत की भूमिका एक संतुलन साधने वाली शक्ति के रूप में देखी जा रही है। भारत न केवल रूस का पारंपरिक मित्र रहा है,बल्कि बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों में भी उसने मास्को के साथ अपने संबंधों को निरंतर मजबूत बनाए रखा है। यही कारण है कि इस यात्रा को रणनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विदेश मंत्रालय ने भी अपने बयान में इस बात को रेखांकित किया कि जयशंकर की रूस यात्रा का उद्देश्य दीर्घकालिक और समय-परीक्षित विशेष एवं विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करना है।
अपने प्रवास के दौरान डॉ. एस. जयशंकर रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव से भी मुलाकात करेंगे। दोनों नेताओं की यह बैठक भारत-रूस संबंधों की गहराई को दर्शाती है और लगातार उच्च-स्तरीय आदान-प्रदान की परंपरा को आगे बढ़ाती है। हाल ही में दोनों की मुलाकात शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के विदेश मंत्रियों की बैठक और ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान हुई थी। लगातार संवाद से यह स्पष्ट है कि भारत और रूस दोनों ही अपने संबंधों को केवल औपचारिक स्तर तक सीमित नहीं रखना चाहते,बल्कि उन्हें वास्तविक और दीर्घकालिक सहयोग की दिशा में आगे बढ़ाना चाहते हैं।
विदेश मंत्री की इस यात्रा का एक और अहम पहलू भारत-रूस व्यापार मंच को संबोधित करना है। यहाँ जयशंकर दोनों देशों के उद्योग जगत और निवेशकों से बातचीत करेंगे और व्यापार तथा निवेश संबंधों को प्रोत्साहित करने के अवसरों पर विचार-विमर्श करेंगे। भारत और रूस के बीच वर्तमान में लगभग 50 अरब डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार होता है,लेकिन दोनों देश इसे 100 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य रख रहे हैं। इसके लिए ऊर्जा आपूर्ति,फार्मा,आईटी,कृषि उत्पादों और अवसंरचना विकास जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा होगी।
इस यात्रा को एक संभावित उच्च-स्तरीय वार्ता की तैयारी के रूप में भी देखा जा रहा है। उम्मीद जताई जा रही है कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन जल्द ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर भारत की यात्रा कर सकते हैं। यदि यह यात्रा होती है,तो यह न केवल भारत-रूस संबंधों में एक नया मील का पत्थर साबित होगी,बल्कि वैश्विक स्तर पर भी एक अहम संदेश देगी कि दोनों देश अंतर्राष्ट्रीय राजनीति के किसी भी उतार-चढ़ाव के बावजूद अपनी रणनीतिक साझेदारी को प्राथमिकता देते हैं।
भारत और रूस के संबंध केवल सरकारी स्तर तक सीमित नहीं हैं,बल्कि सांस्कृतिक और शैक्षणिक सहयोग में भी गहराई रखते हैं। रूस में हजारों भारतीय छात्र चिकित्सा और तकनीकी शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। वहीं,भारतीय संस्कृति,योग और आयुर्वेद के प्रति रूसी समाज में बढ़ती रुचि भी द्विपक्षीय संबंधों की मजबूत नींव का हिस्सा है। इस यात्रा में सांस्कृतिक आदान-प्रदान और शिक्षा सहयोग पर भी विशेष रूप से चर्चा की जानी है।
गौरतलब है कि इस वर्ष की शुरुआत में विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने भी मॉस्को का दौरा किया था,जहाँ उन्होंने रूस के उप विदेश मंत्री आंद्रे रुडेंको के साथ विदेश कार्यालय परामर्श किया था। इस तरह के निरंतर राजनयिक संपर्क दोनों देशों की इस प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं कि वे अपने रिश्तों को केवल ऐतिहासिक पृष्ठभूमि तक सीमित नहीं रखेंगे,बल्कि समय के माँग के अनुसार उन्हें आधुनिक स्वरूप देंगे।
एस. जयशंकर की मॉस्को की यह यात्रा भारत और रूस के बीच संबंधों को नए आयाम देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह यात्रा केवल औपचारिकताओं तक सीमित नहीं है,बल्कि इसमें ठोस नीतिगत निर्णय और दीर्घकालिक रणनीतिक योजनाओं के संकेत मिलते हैं। बदलती अंतर्राष्ट्रीय परिस्थिति में भारत-रूस संबंधों का महत्व और भी बढ़ गया है। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि यह दौरा दोनों देशों की साझेदारी को और प्रगाढ़ करने में निर्णायक भूमिका निभाएगा और भविष्य के लिए सहयोग की नई संभावनाओं के द्वार खोलेगा।
