नई दिल्ली,17 जनवरी (युआईटीवी)- भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में एक बार फिर मजबूती देखने को मिली है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की ओर से शुक्रवार को जारी आँकड़ों के मुताबिक, 9 जनवरी को समाप्त हुए सप्ताह में देश का कुल विदेशी मुद्रा भंडार 392 मिलियन डॉलर बढ़कर 687 बिलियन डॉलर हो गया। यह बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है,जब वैश्विक बाजारों में अस्थिरता,भू-राजनीतिक तनाव और प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं की मौद्रिक नीतियों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। इसके बावजूद भारत के विदेशी मुद्रा भंडार का ऊँचे स्तर पर बना रहना देश की आर्थिक मजबूती और बाहरी झटकों से निपटने की क्षमता को दर्शाता है।
आरबीआई के आँकड़ों के अनुसार,इस सप्ताह विदेशी मुद्रा भंडार के अहम घटक गोल्ड रिजर्व में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई। 9 जनवरी को समाप्त सप्ताह में गोल्ड रिजर्व की वैल्यू 1.56 बिलियन डॉलर बढ़कर 112.83 बिलियन डॉलर हो गई। गोल्ड रिजर्व में यह इजाफा मुख्य रूप से अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में सोने की कीमतों में आई तेज़ी की वजह से हुआ है। बीते एक सप्ताह में वैश्विक बाजारों में सोने की कीमत करीब 2.5 प्रतिशत बढ़ी है,जबकि पिछले एक महीने में इसमें लगभग 5.5 प्रतिशत की तेजी देखने को मिली है। ऐसे माहौल में केंद्रीय बैंकों के गोल्ड रिजर्व की वैल्यू अपने आप बढ़ जाती है, जिससे कुल विदेशी मुद्रा भंडार को सहारा मिलता है।
हालाँकि,विदेशी मुद्रा भंडार के सबसे बड़े घटक फॉरेन करेंसी एसेट्स (एफसीए) में इस दौरान गिरावट दर्ज की गई है। आरबीआई के मुताबिक, 9 जनवरी को समाप्त सप्ताह में एफसीए की वैल्यू 1.12 बिलियन डॉलर घटकर 550.86 बिलियन डॉलर रह गई। एफसीए में अमेरिकी डॉलर के अलावा दुनिया की अन्य प्रमुख मुद्राएँ जैसे यूरो,जापानी येन और ब्रिटिश पाउंड शामिल होती हैं। इन मुद्राओं की वैल्यू को डॉलर के मुकाबले आंका जाता है,इसलिए वैश्विक करेंसी मार्केट में उतार-चढ़ाव का सीधा असर एफसीए पर पड़ता है। डॉलर के मुकाबले अन्य मुद्राओं की कमजोरी या मजबूती एफसीए के कुल मूल्य को प्रभावित करती है।
इसके अलावा,आरबीआई ने बताया कि स्पेशल ड्रॉइंग राइट्स (एसडीआर) की वैल्यू में भी इस सप्ताह हल्की गिरावट आई है। 9 जनवरी को समाप्त सप्ताह में एसडीआर की वैल्यू 39 मिलियन डॉलर घटकर 18.73 बिलियन डॉलर हो गई। इसी तरह अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) में भारत की रिजर्व पोजिशन की वैल्यू भी 13 मिलियन डॉलर घटकर 4.758 बिलियन डॉलर रह गई। इन दोनों घटकों में गिरावट अपेक्षाकृत सीमित रही,लेकिन कुल मिलाकर गोल्ड रिजर्व में आई मजबूत बढ़ोतरी ने विदेशी मुद्रा भंडार को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई।
किसी भी देश के लिए विदेशी मुद्रा भंडार उसकी आर्थिक सेहत का एक महत्वपूर्ण संकेतक माना जाता है। मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार यह दर्शाता है कि देश के पास बाहरी झटकों से निपटने के लिए पर्याप्त संसाधन मौजूद हैं। भारत जैसे आयात-निर्भर देश के लिए यह और भी अहम हो जाता है,जहाँ कच्चे तेल,उर्वरक और अन्य जरूरी वस्तुओं का बड़ा हिस्सा विदेशों से आता है। पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार होने से आयात भुगतान में आसानी होती है और वैश्विक बाजारों में अचानक आए उतार-चढ़ाव का असर घरेलू अर्थव्यवस्था पर सीमित रहता है।
विदेशी मुद्रा भंडार का एक अहम उपयोग विनिमय दर को स्थिर बनाए रखने में भी होता है। अगर किसी स्थिति में डॉलर के मुकाबले रुपये पर अत्यधिक दबाव बनता है और रुपये की कीमत तेजी से गिरने लगती है,तो भारतीय रिजर्व बैंक विदेशी मुद्रा भंडार का इस्तेमाल कर बाजार में डॉलर बेच सकता है। इससे रुपये की गिरावट को थामने में मदद मिलती है और विनिमय दर में अत्यधिक उतार-चढ़ाव को रोका जा सकता है। इसी तरह,जब रुपये में जरूरत से ज्यादा मजबूती आती है,तब आरबीआई डॉलर खरीदकर बाजार में संतुलन बनाए रखता है।
बढ़ता हुआ विदेशी मुद्रा भंडार यह भी संकेत देता है कि देश में विदेशी पूँजी का प्रवाह बना हुआ है। इसमें प्रत्यक्ष विदेशी निवेश,पोर्टफोलियो निवेश,निर्यात से होने वाली कमाई और प्रवासी भारतीयों द्वारा भेजी गई रेमिटेंस की अहम भूमिका होती है। जब डॉलर की आवक मजबूत रहती है,तो इससे न केवल विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ता है,बल्कि देश की समग्र आर्थिक स्थिति भी मजबूत होती है। इससे अंतर्राष्ट्रीय निवेशकों का भरोसा बढ़ता है और भारत को वैश्विक बाजारों में एक स्थिर और भरोसेमंद अर्थव्यवस्था के रूप में देखा जाता है।
इसके साथ ही,ऊँचा विदेशी मुद्रा भंडार देश के लिए अंतर्राष्ट्रीय व्यापार को भी आसान बनाता है। इससे आयातकों और निर्यातकों को भरोसा मिलता है कि भुगतान से जुड़ी किसी भी स्थिति में देश के पास पर्याप्त विदेशी मुद्रा उपलब्ध है। कुल मिलाकर, 9 जनवरी को समाप्त सप्ताह में भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में दर्ज की गई बढ़ोतरी न केवल आर्थिक स्थिरता का संकेत है,बल्कि यह भी दिखाती है कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था अपेक्षाकृत मजबूत स्थिति में बनी हुई है।
