तेहरान,14 मार्च (युआईटीवी)- मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने खार्ग द्वीप पर हुए अमेरिकी हमले को लेकर बड़ा दावा किया है। ईरान का कहना है कि इस हमले में उसके तेल से जुड़े किसी भी ढाँचे को नुकसान नहीं पहुँचा है और सभी प्रमुख तेल निर्यात सुविधाएँ पूरी तरह सुरक्षित हैं। ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी फ़ार्स न्यूज़ एजेंसी ने इस संबंध में रिपोर्ट जारी करते हुए कहा कि अमेरिकी हमलों के बावजूद द्वीप पर मौजूद ऑयल इंफ्रास्ट्रक्चर को कोई क्षति नहीं हुई है।
दरअसल,हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए दावा किया था कि अमेरिकी सेना ने ईरान के महत्वपूर्ण रणनीतिक केंद्र खार्ग द्वीप पर एयर स्ट्राइक की है। ट्रंप ने अपने बयान में कहा था कि अमेरिकी सेनाओं ने इस द्वीप पर मौजूद सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है और उन्हें पूरी तरह तबाह कर दिया है। हालाँकि,उन्होंने यह भी स्पष्ट किया था कि अमेरिकी सेना ने जानबूझकर वहाँ मौजूद तेल से जुड़े बुनियादी ढाँचे को निशाना नहीं बनाया।
ईरान की सरकारी एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार,हमले के दौरान खार्ग द्वीप पर 15 से अधिक जोरदार धमाके हुए। कई स्थानों से धुआँ उठता भी देखा गया,जिससे यह संकेत मिला कि द्वीप के कुछ सैन्य प्रतिष्ठानों को नुकसान पहुँचा है। रिपोर्ट में बताया गया कि अमेरिकी हमलों का मुख्य लक्ष्य द्वीप पर स्थित सैन्य ठिकाने थे। इनमें जोशन सी बेस,एयरपोर्ट का कंट्रोल टावर और हेलीकॉप्टर हैंगर जैसे सैन्य प्रतिष्ठान शामिल थे।
हालाँकि,ईरानी अधिकारियों का कहना है कि हमले के बावजूद तेल से जुड़े किसी भी महत्वपूर्ण ढाँचे को नुकसान नहीं हुआ है। उनका दावा है कि खार्ग द्वीप पर मौजूद सभी तेल निर्यात सुविधाएँ पूरी तरह सुरक्षित हैं और वहाँ से तेल आपूर्ति की प्रक्रिया भी प्रभावित नहीं हुई है। ईरान ने यह भी संकेत दिया है कि देश के तेल निर्यात में फिलहाल किसी तरह की बाधा नहीं आई है।
खार्ग द्वीप ईरान की अर्थव्यवस्था के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह द्वीप फारस की खाड़ी में स्थित है और ईरान के तेल निर्यात का प्रमुख केंद्र है। विशेषज्ञों के अनुसार ईरान के कच्चे तेल के निर्यात का लगभग 85 से 90 प्रतिशत हिस्सा इसी द्वीप से होकर गुजरता है। यही वजह है कि इसे अक्सर ईरान की “आर्थिक जीवनरेखा” कहा जाता है।
भौगोलिक दृष्टि से खार्ग द्वीप ईरान के दक्षिण में स्थित बुशेहर तट से लगभग 55 किलोमीटर दूर फारस की खाड़ी में स्थित है। यह एक कोरल द्वीप है,जिसकी समुद्री गहराई इतनी अधिक है कि दुनिया के सबसे बड़े तेल टैंकर भी यहाँ आसानी से लंगर डाल सकते हैं। यही विशेषता इसे अंतर्राष्ट्रीय तेल व्यापार के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण बनाती है।
ईरान के कई बड़े तेल क्षेत्रों से पाइपलाइनों के माध्यम से कच्चा तेल इस द्वीप तक पहुँचाया जाता है। इसके बाद यहाँ से बड़े-बड़े तेल टैंकरों के जरिए दुनिया के विभिन्न देशों को तेल भेजा जाता है। खार्ग द्वीप पर मौजूद विशाल तेल भंडारण टर्मिनल और निर्यात सुविधाएँ ईरान की ऊर्जा अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानी जाती हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस द्वीप के तेल ढाँचे को गंभीर नुकसान पहुँचता है,तो उसका असर न केवल ईरान की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा,बल्कि वैश्विक तेल बाजार भी प्रभावित हो सकता है। यही कारण है कि इस द्वीप को लेकर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी काफी संवेदनशीलता देखी जाती है।
अमेरिका की ओर से किए गए इस हमले और उसके बाद ईरान के दावे ने पूरे क्षेत्र में तनाव को और बढ़ा दिया है। हालाँकि,दोनों पक्षों के बयानों से यह स्पष्ट है कि फिलहाल तेल निर्यात से जुड़े ढाँचे को सीधे तौर पर निशाना नहीं बनाया गया है। इससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में संभावित बड़ी उथल-पुथल की आशंका कुछ हद तक कम हुई है।
फिलहाल अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की नजरें इस पूरे घटनाक्रम पर टिकी हुई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस तरह के सैन्य हमले लगातार जारी रहते हैं,तो मध्य पूर्व में अस्थिरता और बढ़ सकती है। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आने वाले दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच यह तनाव किस दिशा में आगे बढ़ता है और क्या दोनों पक्ष किसी तरह की कूटनीतिक पहल के जरिए हालात को शांत करने की कोशिश करते हैं।
