इंफोसिस (तस्वीर क्रेडिट@shraddham008)

इंफोसिस के तिमाही नतीजे मजबूत,मुनाफा 21 प्रतिशत बढ़ा; निवेशकों के लिए 25 रुपये प्रति शेयर डिविडेंड का ऐलान

मुंबई,24 अप्रैल (युआईटीवी)- देश की प्रमुख आईटी कंपनी इंफोसिस ने गुरुवार को वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही के नतीजे जारी करते हुए मजबूत प्रदर्शन का संकेत दिया है। कंपनी ने बताया कि जनवरी से मार्च 2026 की अवधि में उसका शुद्ध मुनाफा साल-दर-साल 21 प्रतिशत बढ़कर 8,501 करोड़ रुपये पहुँच गया है,जो पिछले वर्ष इसी अवधि में 7,033 करोड़ रुपये था। इस बढ़ोतरी को कंपनी के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है,खासकर ऐसे समय में जब वैश्विक स्तर पर आईटी सेक्टर कई चुनौतियों का सामना कर रहा है।

कंपनी की आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। चौथी तिमाही में इंफोसिस की रेवेन्यू 13.4 प्रतिशत बढ़कर 46,402 करोड़ रुपये हो गई,जो पिछले साल इसी तिमाही में 40,925 करोड़ रुपये थी। इस दौरान कंपनी का परिचालन लाभ भी बढ़कर 9,743 करोड़ रुपये हो गया,जबकि पिछले वर्ष यह आंकड़ा 8,575 करोड़ रुपये था। यह दर्शाता है कि कंपनी ने न केवल अपने राजस्व को बढ़ाया है,बल्कि लागत नियंत्रण और बेहतर ऑपरेशनल दक्षता के जरिए अपने मुनाफे को भी मजबूत किया है।

पूरे वित्त वर्ष 2026 के आँकड़ों पर नजर डालें तो कंपनी का प्रदर्शन और भी संतुलित दिखाई देता है। पूरे साल में इंफोसिस का शुद्ध मुनाफा 10.20 प्रतिशत बढ़कर 29,440 करोड़ रुपये तक पहुँच गया। वहीं ऑपरेशंस से होने वाली आय 9.6 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 1.78 लाख करोड़ रुपये हो गई,जो पिछले वित्त वर्ष में 1.62 लाख करोड़ रुपये थी। यह आँकड़ें बताते हैं कि कंपनी ने साल भर में स्थिर और निरंतर वृद्धि बनाए रखी है।

कंपनी ने अपने निवेशकों को भी खुश करते हुए इस तिमाही के लिए 25 रुपये प्रति शेयर का डिविडेंड देने की घोषणा की है। इस फैसले को निवेशकों के विश्वास को बनाए रखने और उन्हें बेहतर रिटर्न देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आईटी कंपनियों के बीच डिविडेंड को लेकर प्रतिस्पर्धा के दौर में यह घोषणा निवेशकों के लिए आकर्षक साबित हो सकती है।

भविष्य को लेकर कंपनी ने सतर्क लेकिन सकारात्मक रुख अपनाया है। वित्त वर्ष 2027 के लिए इंफोसिस ने अनुमान लगाया है कि उसकी आय 1.5 प्रतिशत से 3.5 प्रतिशत तक बढ़ सकती है,वह भी स्थिर मुद्रा के आधार पर। साथ ही कंपनी को उम्मीद है कि उसका ऑपरेटिंग मार्जिन 20 से 22 प्रतिशत के बीच रहेगा। यह अनुमान वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और आईटी खर्च में संभावित उतार-चढ़ाव को ध्यान में रखते हुए दिया गया है।

कंपनी के प्रदर्शन में विभिन्न क्षेत्रों का योगदान भी अहम रहा है। मार्च तिमाही में इंफोसिस के सबसे बड़े सेगमेंट फाइनेंशियल सर्विसेज से आय में 5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। यह सेगमेंट कंपनी के लिए लगातार मजबूत स्तंभ बना हुआ है और भविष्य में भी इसके जरिए स्थिर आय की उम्मीद की जा रही है।

इंफोसिस के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सलिल पारेख ने कहा कि वित्त वर्ष 2026 में कंपनी का प्रदर्शन मजबूत रहा है,जिसमें बड़े सौदों और एंटरप्राइज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस रणनीति की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि कंपनी आने वाले समय में नई तकनीकों और डिजिटल समाधानों पर और अधिक ध्यान केंद्रित करेगी,ताकि ग्राहकों की बदलती जरूरतों को पूरा किया जा सके।

इस तिमाही में कंपनी के बड़े सौदों का कुल कॉन्ट्रैक्ट वैल्यू 3.2 अरब डॉलर रहा,जो भारतीय मुद्रा में लगभग 30,100 करोड़ रुपये के बराबर है। पूरे वित्त वर्ष में यह आँकड़ा 14.9 अरब डॉलर,यानी करीब 1.40 लाख करोड़ रुपये तक पहुँच गया। यह दर्शाता है कि कंपनी को बड़े और दीर्घकालिक प्रोजेक्ट्स मिल रहे हैं,जो भविष्य की आय को स्थिर बनाए रखने में मदद करेंगे।

वित्तीय प्रमुख जयेश संघराजका ने जानकारी दी कि कंपनी वित्त वर्ष 2027 में 20,000 नए ग्रेजुएट्स को नौकरी देने की योजना बना रही है। इससे यह संकेत मिलता है कि कंपनी अपने विस्तार को लेकर आश्वस्त है और भविष्य के लिए प्रतिभाओं में निवेश कर रही है। तिमाही के अंत तक कंपनी में कुल कर्मचारियों की संख्या 3,28,594 रही,जो इसे देश के सबसे बड़े नियोक्ताओं में से एक बनाती है।

वैश्विक विस्तार के मोर्चे पर भी कंपनी ने कदम बढ़ाया है। इंफोसिस ने जापान में अपनी एक नई पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी शुरू करने की घोषणा की है। यह कदम एशियाई बाजार में कंपनी की मौजूदगी को मजबूत करेगा और नए ग्राहकों तक पहुँच बनाने में मदद करेगा।

हालाँकि,मजबूत नतीजों के बावजूद शेयर बाजार में कंपनी के शेयरों पर दबाव देखने को मिला। नतीजों से पहले गुरुवार को राष्ट्रीय स्टॉक एक्सचेंज पर इंफोसिस का शेयर 2.90 प्रतिशत गिरकर 1,231.80 रुपये पर बंद हुआ। कंपनी का बाजार पूँजीकरण 23 अप्रैल तक लगभग 5.15 लाख करोड़ रुपये रहा।

कुल मिलाकर इंफोसिस के तिमाही और वार्षिक नतीजे यह संकेत देते हैं कि कंपनी ने चुनौतियों के बावजूद स्थिर वृद्धि हासिल की है। आने वाले समय में कंपनी की रणनीति,नए सौदे और तकनीकी निवेश यह तय करेंगे कि वह इस गति को कितनी मजबूती से आगे बढ़ा पाती है।