तेहरान,7 अप्रैल (युआईटीवी)- पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच ईरान और इजरायल के बीच टकराव एक बार फिर तेज हो गया है। मोजतबा खामेनेई ने ईरान के एक वरिष्ठ जनरल की मौत पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए साफ कहा है कि देश के नेतृत्व के खिलाफ “हत्याएँ और अपराध” ईरान की प्रगति को नहीं रोक सकते। यह बयान ऐसे समय आया है,जब सोमवार को तेहरान में हुए एक हवाई हमले में ईरान के इस शीर्ष अधिकारी की मौत हो गई।
रिपोर्ट्स के अनुसार,यह हमला इजरायल द्वारा किया गया था,जिसमें माजिद खादेमी मारे गए। खादेमी ईरान के शक्तिशाली रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के खुफिया संगठन के प्रमुख थे और देश की सुरक्षा व्यवस्था में उनकी अहम भूमिका मानी जाती थी। उनकी मौत को ईरान के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।
अपने लिखित बयान में खामेनेई ने माजिद खादेमी के योगदान को याद करते हुए कहा कि उन्होंने दशकों तक ईरान की सुरक्षा, खुफिया और रक्षा क्षेत्रों में “मौन लेकिन महत्वपूर्ण सेवाएँ” दीं। उन्होंने खादेमी को एक समर्पित और देशभक्त अधिकारी बताते हुए उनके परिवार और साथियों के प्रति संवेदना व्यक्त की। साथ ही,उन्होंने इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के अन्य अधिकारियों को भी इस कठिन समय में धैर्य बनाए रखने का संदेश दिया।
खामेनेई ने इस हमले के लिए सीधे तौर पर इजरायल और संयुक्त राज्य अमेरिका को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने आरोप लगाया कि लगातार असफलताओं के बाद ये देश “आतंकवाद और हत्या” जैसे तरीकों का सहारा ले रहे हैं। उनके इस बयान ने क्षेत्र में पहले से मौजूद तनाव को और बढ़ा दिया है।
इसी बीच,ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने भी अमेरिका और इजरायल की कार्रवाई की कड़ी निंदा की है। उन्होंने राजधानी तेहरान में स्थित शरीफ प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय पर हुए हमले को “अंतर्राष्ट्रीय कानून का उल्लंघन” बताया। इस हमले में विश्वविद्यालय के सूचना प्रौद्योगिकी केंद्र की इमारत को भारी नुकसान पहुँचा,जबकि पास स्थित एक गैस स्टेशन भी बुरी तरह प्रभावित हुआ।
ईरान की ओर से भी जवाबी कार्रवाई के संकेत साफ दिखाई दे रहे हैं। ईरानी सेना ने दावा किया है कि उसने दक्षिणी इजरायल में पेट्रोकेमिकल उद्योगों और पेट्रोलियम भंडारण सुविधाओं को निशाना बनाया है। इसके अलावा,कुवैत में अमेरिकी सैन्य प्रतिष्ठानों, उपग्रह संचार इकाइयों और सैनिकों की मौजूदगी वाले ठिकानों पर भी हमले किए गए हैं। हालाँकि, इन हमलों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हो सकी है,लेकिन इससे क्षेत्रीय स्थिति की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है।
गौरतलब है कि यह तनाव अचानक नहीं बढ़ा,बल्कि पिछले कुछ समय से दोनों पक्षों के बीच संघर्ष लगातार तीव्र होता जा रहा है। 28 फरवरी को इजरायल और संयुक्त राज्य अमेरिका ने संयुक्त रूप से तेहरान और ईरान के अन्य शहरों पर बड़े पैमाने पर हमले किए थे। इन हमलों में कई वरिष्ठ सैन्य कमांडर और नागरिक मारे गए थे। इस दौरान अली खामेनेई भी निशाने पर थे,हालाँकि वे सुरक्षित बच गए।
इन हमलों के जवाब में ईरान ने भी आक्रामक रुख अपनाया और मध्य पूर्व में इजरायल तथा अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए। इस तरह दोनों पक्षों के बीच “एक्शन-रिएक्शन” का सिलसिला लगातार जारी है,जिससे पूरे क्षेत्र में युद्ध जैसे हालात बनते जा रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह संघर्ष केवल दो देशों तक सीमित नहीं है,बल्कि इसका प्रभाव पूरे मध्य पूर्व और वैश्विक राजनीति पर पड़ सकता है। ऊर्जा आपूर्ति,व्यापार मार्ग और सुरक्षा व्यवस्था जैसे कई अहम मुद्दे इस तनाव से प्रभावित हो सकते हैं।
खामेनेई के ताजा बयान से यह साफ हो गया है कि ईरान अपने शीर्ष अधिकारियों की हत्या को लेकर बेहद आक्रोशित है और वह इसे केवल एक सैन्य हमला नहीं,बल्कि अपने राष्ट्र के खिलाफ साजिश के रूप में देख रहा है। वहीं,अमेरिका और इजरायल की ओर से अभी तक इस पूरे घटनाक्रम पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है,जिससे स्थिति और अधिक अनिश्चित बनी हुई है।
माजिद खादेमी की मौत ने इस संघर्ष को एक नए मोड़ पर ला खड़ा किया है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आने वाले दिनों में दोनों पक्ष किस तरह की रणनीति अपनाते हैं और क्या इस तनाव को कूटनीति के जरिए कम किया जा सकेगा या यह और बड़े संघर्ष का रूप लेगा।
