तेहरान, 12 मार्च (युआईटीवी)- ईरान की महिला राष्ट्रीय फुटबॉल टीम की स्टार खिलाड़ी मोहद्देसेह ज़ोल्फ़ी एक बार फिर चर्चा में हैं। कुछ समय पहले ऑस्ट्रेलिया में शरण माँगने वाली इस खिलाड़ी ने अब अपना फैसला बदलते हुए विदेशी शरण के प्रस्ताव को ठुकरा दिया है और अपने देश ईरान लौटने की इच्छा जताई है। उनके इस फैसले ने अंतर्राष्ट्रीय खेल जगत और राजनीतिक हलकों में नई चर्चा शुरू कर दी है।
दरअसल,हाल ही में अंतर्राष्ट्रीय मीडिया में यह खबर सामने आई थी कि ईरान की महिला फुटबॉल टीम की दो खिलाड़ियों ने ऑस्ट्रेलिया में शरण लेने के लिए आवेदन किया था। यह फैसला उस समय लिया गया था,जब टीम से जुड़े विवाद और ईरान के भीतर की राजनीतिक परिस्थितियों को लेकर खिलाड़ियों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई जा रही थी। हालाँकि,अब जानकारी सामने आई है कि इन दो खिलाड़ियों में से एक,मोहद्देसे जोल्फी,ने अपना मन बदल लिया है और शरण के अनुरोध को वापस लेने का फैसला किया है।
ऑस्ट्रेलिया के गृह मामलों के मंत्री टोनी बर्क ने इस मामले की पुष्टि करते हुए अंतर्राष्ट्रीय मीडिया को बताया कि जिन दो ईरानी महिला खिलाड़ियों को मानवीय आधार पर शरण दी गई थी,उनमें से एक ने अपने फैसले पर पुनर्विचार किया है। उन्होंने कहा कि खिलाड़ी ने अपनी टीम की साथियों से चर्चा करने के बाद यह निर्णय लिया और फिर ऑस्ट्रेलिया में स्थित ईरानी दूतावास से संपर्क किया।
टोनी बर्क ने कहा कि ऑस्ट्रेलिया एक ऐसा देश है,जहाँ लोगों को अपने फैसले बदलने की पूरी स्वतंत्रता है। उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति पहले शरण माँगता है और बाद में अपना निर्णय बदलता है,तो सरकार उस फैसले का सम्मान करती है। उनके अनुसार यह खिलाड़ी अब अपने देश वापस लौटना चाहती है और सरकार उसकी इच्छा का सम्मान करेगी।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार जिस खिलाड़ी ने शरण का अनुरोध वापस लिया है,वह मोहद्देसे जोल्फी ही हैं,जो ईरान की महिला फुटबॉल टीम की प्रमुख खिलाड़ियों में से एक मानी जाती हैं। वह अपने प्रदर्शन और खेल कौशल के कारण ईरान में काफी लोकप्रिय हैं और टीम की महत्वपूर्ण सदस्य के रूप में जानी जाती हैं।
यह पूरा मामला उस विवाद के बाद सामने आया था जो हाल ही में खेले गए एएफसी महिला एशियाई कप 2026 के उद्घाटन मैच के दौरान हुआ था। इस टूर्नामेंट के पहले मुकाबले में ईरान की महिला फुटबॉल टीम का सामना दक्षिण कोरिया महिला राष्ट्रीय फुटबॉल टीम से हुआ था। मैच शुरू होने से पहले जब राष्ट्रगान बजाया गया,तब ईरान की महिला खिलाड़ियों ने इस्लामिक शासन के राष्ट्रगान को गाने से इनकार कर दिया था।
राष्ट्रगान के दौरान ईरानी महिला खिलाड़ी चुपचाप खड़ी रहीं और उन्होंने गीत नहीं गाया। खिलाड़ियों के इस कदम को एक प्रतीकात्मक विरोध के रूप में देखा गया। माना जा रहा था कि यह कदम ईरान के भीतर जारी राजनीतिक तनाव,सैन्य स्थिति और सामाजिक अशांति के संदर्भ में उठाया गया था।
इस घटना के बाद ईरान में इस पर तीखी प्रतिक्रियाएँ देखने को मिलीं। कुछ लोगों ने खिलाड़ियों के इस कदम की आलोचना की और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की माँग भी की। सोशल मीडिया और कुछ राजनीतिक समूहों ने यह कहा कि राष्ट्रगान का सम्मान करना राष्ट्रीय कर्तव्य है और खिलाड़ियों को ऐसा कदम नहीं उठाना चाहिए था।
इस विवाद के बाद खिलाड़ियों की सुरक्षा को लेकर भी अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर चिंता व्यक्त की गई। कई मानवाधिकार संगठनों और खेल जगत से जुड़े लोगों ने आशंका जताई कि टीम की कुछ खिलाड़ी अपने देश लौटने पर दबाव या कार्रवाई का सामना कर सकती हैं। इसी वजह से ऑस्ट्रेलिया सरकार ने मानवीय आधार पर कुछ खिलाड़ियों को विशेष वीजा देने का फैसला किया था।
इस मानवीय वीजा के तहत खिलाड़ियों को ऑस्ट्रेलिया में रहने की अनुमति दी गई थी। इस वीजा की खास बात यह थी कि इसके जरिए खिलाड़ी न केवल वहाँ रह सकती थीं,बल्कि नौकरी करने और पढ़ाई जारी रखने की भी अनुमति उन्हें मिलती। यह व्यवस्था उन खिलाड़ियों के लिए सुरक्षा और भविष्य के विकल्प उपलब्ध कराने के उद्देश्य से की गई थी।
हालाँकि,अब मोहद्देसे जोल्फी के फैसले ने इस पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया है। उन्होंने विदेशी शरण को ठुकराते हुए अपने देश लौटने की इच्छा जताई है। उनके इस फैसले के पीछे क्या व्यक्तिगत या पेशेवर कारण हैं,इस बारे में अभी आधिकारिक तौर पर ज्यादा जानकारी सामने नहीं आई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर खेलने वाले खिलाड़ियों के लिए अपने देश,टीम और करियर से जुड़ी भावनाएँ बेहद मजबूत होती हैं। ऐसे में कई बार खिलाड़ी कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपने देश लौटने का फैसला करते हैं।
मोहद्देसे जोल्फी का यह निर्णय भी इसी भावना से जुड़ा माना जा रहा है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि उनके इस फैसले के बाद ईरान में उनकी वापसी किस तरह होती है और आगे उनका खेल करियर किस दिशा में आगे बढ़ता है। फिलहाल अंतर्राष्ट्रीय खेल जगत की नजर इस पूरे घटनाक्रम पर बनी हुई है।
