एस जयशंकर ने पश्चिम एशिया संकट पर फ्रांस,ईरान,दक्षिण कोरिया और जर्मनी के विदेश मंत्रियों से की बातचीत (तस्वीर क्रेडिट@DrSJaishankar)

पश्चिम एशिया संकट पर भारत की सक्रिय कूटनीति,एस जयशंकर ने फ्रांस,ईरान,दक्षिण कोरिया और जर्मनी के विदेश मंत्रियों से की बातचीत

नई दिल्ली,12 मार्च (युआईटीवी)- पश्चिम एशिया में जारी सैन्य संघर्ष और बढ़ते तनाव के बीच भारत ने कूटनीतिक स्तर पर अपनी सक्रियता तेज कर दी है। इसी क्रम में भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बुधवार को फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बैरोट के साथ फोन पर बातचीत की। इस बातचीत के दौरान दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष और उससे उत्पन्न क्षेत्रीय तथा वैश्विक प्रभावों पर विस्तार से चर्चा की।

विदेश मंत्री जयशंकर ने इस बातचीत की जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा की। उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा कि फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बैरोट के साथ पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष पर विचारों का आदान-प्रदान उपयोगी और सराहनीय रहा। उन्होंने यह भी कहा कि इस संवाद को भविष्य में व्यक्तिगत रूप से आगे बढ़ाने की उम्मीद है। जयशंकर का यह बयान ऐसे समय में आया है,जब मध्य-पूर्व में लगातार बढ़ते सैन्य तनाव ने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की चिंता बढ़ा दी है।

दरअसल,पश्चिम एशिया में वर्तमान संघर्ष की शुरुआत 28 फरवरी को उस समय हुई,जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान के कुछ सैन्य और रणनीतिक ठिकानों पर संयुक्त हमले किए। इन हमलों के बाद क्षेत्र की स्थिति तेजी से बिगड़ गई और ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए ड्रोन और मिसाइल हमले शुरू कर दिए। इन हमलों का निशाना पश्चिम एशिया में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकाने,कुछ क्षेत्रीय राजधानियाँ और अमेरिका के सहयोगी बल बने। इसके बाद से ही पूरे क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है और कई देशों ने अपने नागरिकों के लिए यात्रा संबंधी चेतावनियाँ भी जारी की हैं।

भारत इस पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए है और क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने के लिए कूटनीतिक स्तर पर सक्रिय संपर्क बनाए हुए है। इसी क्रम में जयशंकर ने मंगलवार को ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची से भी फोन पर विस्तृत बातचीत की थी। इस दौरान दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया में मौजूदा हालात और संभावित कूटनीतिक प्रयासों पर चर्चा की।

जयशंकर ने इस बातचीत के बारे में भी एक्स पर जानकारी देते हुए कहा कि ईरान के विदेश मंत्री अराघची के साथ मौजूदा हालात पर विस्तृत चर्चा हुई और दोनों देशों ने संपर्क में बने रहने पर सहमति जताई। यह बातचीत इस बात का संकेत है कि भारत क्षेत्र में बढ़ते संकट के बीच सभी पक्षों के साथ संवाद बनाए रखने की कोशिश कर रहा है,ताकि स्थिति को शांतिपूर्ण तरीके से सँभाला जा सके।

भारत की यह सक्रिय कूटनीति केवल पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं रही। विदेश मंत्री जयशंकर ने मंगलवार को दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्री चो ह्यून से भी फोन पर बातचीत की। इस दौरान दोनों नेताओं ने भारत और दक्षिण कोरिया के बीच द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के साथ-साथ पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया।

दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया कि दोनों मंत्रियों ने कोरियाई प्रायद्वीप की स्थिति और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा की। साथ ही उन्होंने मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के वैश्विक सुरक्षा और अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों पर भी विचार साझा किए। बयान के अनुसार दोनों देशों ने मौजूदा हालात को देखते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर आपसी संपर्क बनाए रखने पर सहमति जताई।

बातचीत के बाद जयशंकर ने सोशल मीडिया पर एक और पोस्ट साझा करते हुए कहा कि दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्री चो ह्यून के साथ उनकी अच्छी और सार्थक बातचीत हुई। उन्होंने बताया कि इस चर्चा के दौरान दोनों देशों के द्विपक्षीय एजेंडे को आगे बढ़ाने के अलावा पश्चिम एशिया की स्थिति और खास तौर पर ऊर्जा आपूर्ति पर उसके प्रभाव को लेकर भी चर्चा की गई।

दरअसल,पश्चिम एशिया में बढ़ता संघर्ष वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए भी एक बड़ा मुद्दा बन गया है। इस क्षेत्र को दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल और गैस आपूर्ति केंद्रों में से एक माना जाता है। ऐसे में यहाँ किसी भी तरह की अस्थिरता का असर अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा कीमतों और आपूर्ति श्रृंखला पर पड़ सकता है। भारत जैसे बड़े ऊर्जा आयातक देश के लिए यह स्थिति विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।

इसके अलावा जयशंकर ने जर्मनी के विदेश मंत्री जोहान वाडेफुल से भी फोन पर बातचीत की थी। इस दौरान दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय सुरक्षा,वैश्विक स्थिरता और पश्चिम एशिया में जारी संकट के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। भारत और जर्मनी के बीच इस तरह की बातचीत यह दर्शाती है कि दोनों देश अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर एक-दूसरे के साथ सहयोग बनाए रखना चाहते हैं।

विश्लेषकों का मानना है कि भारत की यह कूटनीतिक सक्रियता उसकी संतुलित विदेश नीति को दर्शाती है। भारत लंबे समय से पश्चिम एशिया में स्थिरता और शांति का समर्थक रहा है और वह क्षेत्र के सभी प्रमुख देशों के साथ अच्छे संबंध बनाए रखने की नीति अपनाता रहा है। यही कारण है कि मौजूदा संकट के दौरान भारत विभिन्न देशों के साथ संवाद बनाए रखकर स्थिति को समझने और संभावित समाधान की दिशा में योगदान देने की कोशिश कर रहा है।

पश्चिम एशिया में जारी इस संघर्ष का प्रभाव केवल क्षेत्रीय राजनीति तक सीमित नहीं है,बल्कि इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था,ऊर्जा बाजार और अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा पर भी पड़ सकता है। ऐसे में भारत जैसे बड़े देश की कूटनीतिक भूमिका और संवाद की पहल को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

विदेश मंत्री एस जयशंकर की लगातार हो रही इन उच्च स्तरीय बातचीतों से यह स्पष्ट होता है कि भारत पश्चिम एशिया में बढ़ते संकट को लेकर गंभीर है और वह कूटनीतिक माध्यमों के जरिए स्थिति पर नजर रखते हुए वैश्विक साझेदारों के साथ संवाद को मजबूत बनाए रखने की रणनीति पर काम कर रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इन कूटनीतिक प्रयासों का क्षेत्रीय स्थिति पर कितना सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।