नई दिल्ली,27 मार्च (युआईटीवी)- भारत की दिग्गज ऊर्जा कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (आरआईएल) ने गुरुवार को उन मीडिया रिपोर्ट्स को सिरे से खारिज कर दिया,जिनमें दावा किया गया था कि कंपनी ने ईरान से कच्चा तेल खरीदा है। कंपनी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ये खबरें पूरी तरह निराधार हैं और इससे बाजार में भ्रम की स्थिति पैदा हो रही है।
दरअसल,कुछ अंतर्राष्ट्रीय और घरेलू मीडिया रिपोर्ट्स में यह कहा गया था कि आरआईएल ने ईरान से लगभग 5 मिलियन बैरल कच्चा तेल खरीदा है। इन रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया कि यह खरीदारी उस समय हुई जब अमेरिकी प्रशासन ने समुद्र में फँसे ईरानी तेल पर अस्थायी रूप से प्रतिबंधों में ढील दी थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक,यह तेल नेशनल ईरानी ऑयल कंपनी से खरीदा गया बताया गया था।
इन दावों पर प्रतिक्रिया देते हुए रिलायंस इंडस्ट्रीज ने एक आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि कंपनी ने ईरान से किसी भी प्रकार का कच्चा तेल नहीं खरीदा है। कंपनी ने कहा, “हम हालिया मीडिया रिपोर्ट्स को पूरी तरह खारिज करते हैं,जिनमें यह दावा किया गया है कि हमने ईरान से क्रूड ऑयल खरीदा है। ये रिपोर्ट्स तथ्यहीन हैं और इनसे गलत जानकारी फैल रही है।” कंपनी ने मीडिया संस्थानों से यह भी अपील की कि वे किसी भी खबर को प्रकाशित करने से पहले तथ्यों की सही जाँच करें,ताकि निवेशकों और आम लोगों में भ्रम न फैले।
इस पूरे विवाद के बीच वैश्विक ऊर्जा बाजार में हलचल देखी जा रही है। हाल ही में डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने एक सीमित अवधि के लिए ईरानी तेल के व्यापार पर आंशिक छूट दी थी। इस फैसले के तहत उन तेल खेपों को बेचने की अनुमति दी गई,जो पहले से समुद्र में टैंकरों पर लोड थीं। इस छूट का उद्देश्य वैश्विक बाजार में आपूर्ति बढ़ाना और तेल की कीमतों को नियंत्रित करना बताया गया था।
अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के प्रमुख स्कॉट बेसेंट ने इस कदम को ऊर्जा बाजार को स्थिर करने की दिशा में एक जरूरी पहल बताया था। उन्होंने कहा कि इस फैसले से वैश्विक स्तर पर तेल की सप्लाई में सुधार होगा और कीमतों पर दबाव कम पड़ेगा। बेसेंट के अनुसार,इस अस्थायी छूट के तहत केवल वही तेल बेचा जा सकता है,जो 20 मार्च तक जहाजों में लोड हो चुका था और यह व्यवस्था 19 अप्रैल तक प्रभावी रहेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से करीब 140 मिलियन बैरल तेल बाजार में आ सकता है,जिससे सप्लाई की कमी को दूर करने में मदद मिलेगी। फिलहाल यह माना जा रहा है कि ईरान का बड़ा हिस्सा तेल समुद्र में स्टोर है या फिर वैकल्पिक और अप्रत्यक्ष रास्तों से बेचा जा रहा है।
इस संदर्भ में यह भी चर्चा है कि चीन जैसे कुछ देशों ने ईरानी तेल को सस्ते दामों पर खरीदकर स्टॉक किया हुआ है। यदि यह तेल बाजार में आता है,तो इससे वैश्विक ऊर्जा समीकरण पर असर पड़ सकता है और ईरान की रणनीतिक स्थिति भी कमजोर हो सकती है।
रिलायंस इंडस्ट्रीज का यह खंडन ऐसे समय में आया है,जब भारत समेत कई देश पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और तेल आपूर्ति की अनिश्चितता को लेकर सतर्क हैं। भारत दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातकों में से एक है और ऐसे में किसी भी तरह की अफवाह या गलत सूचना का सीधा असर बाजार और नीतिगत निर्णयों पर पड़ सकता है।
कंपनी के इस स्पष्ट रुख से यह संकेत मिलता है कि वह अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबंधों और नियमों का पूरी तरह पालन कर रही है और किसी भी विवादास्पद लेनदेन से दूरी बनाए हुए है। साथ ही, यह भी स्पष्ट हो गया है कि बाजार में फैल रही खबरों को लेकर सतर्क रहने की आवश्यकता है।
रिलायंस इंडस्ट्रीज द्वारा इन रिपोर्ट्स का खंडन करने से स्थिति साफ हो गई है,लेकिन इस घटनाक्रम ने एक बार फिर यह दिखा दिया है कि वैश्विक ऊर्जा बाजार में अफवाहें कितनी तेजी से फैलती हैं और उनका असर कितना व्यापक हो सकता है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि ईरानी तेल को लेकर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर क्या रुख अपनाया जाता है और इसका बाजार पर क्या प्रभाव पड़ता है।
