क्राइस्टचर्च,30 नवंबर (युआईटीवी)- न्यूजीलैंड के पूर्व कप्तान केन विलियमसन ने 9,000 टेस्ट रन पूरे कर एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। विलियमसन न्यूजीलैंड के पहले बल्लेबाज बन गए हैं,जिन्होंने यह मील का पत्थर छुआ है। यह ऐतिहासिक उपलब्धि उन्होंने क्राइस्टचर्च के हेगले ओवल में इंग्लैंड के खिलाफ चल रहे पहले टेस्ट मैच के दौरान हासिल की।
34 वर्षीय विलियमसन ने कमर की चोट से उबरने के बाद टेस्ट क्रिकेट में जोरदार वापसी की है। चोट के कारण वह भारत के खिलाफ टेस्ट सीरीज से बाहर हो गए थे। उन्होंने 9,000 रन अपनी वापसी में न्यूजीलैंड की दूसरी पारी के दौरान पूरे किए। उन्होंने अपने 103वें टेस्ट मैच में इस उपलब्धि को हासिल किया, जिससे वह कुमार संगकारा और यूनिस खान के साथ संयुक्त रूप से तीसरे सबसे तेज़ 9,000 टेस्ट रन बनाने वाले बल्लेबाज बन गए।
इस सूची में ऑस्ट्रेलिया के स्टीव स्मिथ शीर्ष पर हैं, जिन्होंने 99 टेस्ट मैचों में यह उपलब्धि हासिल की थी। स्मिथ ने ब्रायन लारा के 101 टेस्ट मैचों के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ा था। विलियमसन ने इस मुकाबले की दूसरी पारी में 61 रन बनाए और रचिन रविंद्र और डेरिल मिशेल के साथ महत्वपूर्ण साझेदारियाँ कीं। हालाँकि,वह क्रिस वोक्स की गेंद पर विकेट के सामने लपके जाने से पहले आउट हो गए।
विलियमसन ने अपनी वापसी को यादगार बनाते हुए पहली पारी में शानदार 93 रन बनाए। उनकी इस पारी की बदौलत न्यूजीलैंड ने पहली पारी में 348 रन बनाए। इस पारी में ग्लेन फिलिप्स ने नाबाद 58 रनों का योगदान दिया। इंग्लैंड की ओर से ब्रायडन कार्से और शोएब बशीर ने चार-चार विकेट लेकर न्यूजीलैंड के बल्लेबाजों को चुनौती दी।
इंग्लैंड ने अपनी पहली पारी में शानदार बल्लेबाजी का प्रदर्शन किया। हैरी ब्रूक ने 171 रनों की तूफानी पारी खेली,जबकि कप्तान बेन स्टोक्स ने 80 और ओली पोप ने 77 रन बनाए। इंग्लैंड ने 499 रन बनाकर 151 रनों की बड़ी बढ़त हासिल की।
केन विलियमसन की 9,000 टेस्ट रनों की उपलब्धि न्यूजीलैंड क्रिकेट के लिए एक ऐतिहासिक क्षण है। वह न्यूजीलैंड के सबसे सफल बल्लेबाजों में से एक हैं और उनकी यह उपलब्धि अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में उनकी स्थिरता और क्षमता को दर्शाती है।
विलियमसन का नाम अब क्रिकेट के महान खिलाड़ियों में शामिल हो गया है। उनकी तकनीकी उत्कृष्टता और मानसिक दृढ़ता ने उन्हें न्यूजीलैंड का सबसे भरोसेमंद बल्लेबाज बनाया है।
विलियमसन का यह रिकॉर्ड उनके करियर का एक और बड़ा अध्याय है। यह उपलब्धि न केवल उनकी व्यक्तिगत सफलता को दर्शाती है,बल्कि न्यूजीलैंड क्रिकेट को भी गर्व का एक और अवसर प्रदान करती है। इंग्लैंड के खिलाफ यह मैच उनके करियर का एक और यादगार पल बन गया है। उनका योगदान आने वाले वर्षों में भी टीम के लिए अमूल्य रहेगा।

