नई दिल्ली,28 अप्रैल (युआईटीवी)- कन्नड़ फिल्म ‘केडी द डेविल’ के गाने ‘सरके चुनर, तेरी सरके’ को लेकर उठे विवाद ने अब एक अहम मोड़ ले लिया है। इस मामले में अभिनेता संजय दत्त राष्ट्रीय महिला आयोग के समक्ष पेश हुए,जहाँ उन्होंने लिखित रूप में माफी माँगते हुए अपनी स्थिति स्पष्ट की। गाने पर आरोप लगाए गए थे कि इसके बोल महिलाओं की छवि को आपत्तिजनक ढंग से प्रस्तुत करते हैं,जिसके बाद आयोग ने इस पूरे मामले का संज्ञान लिया था और संबंधित कलाकारों तथा निर्माताओं को जवाब देने के लिए बुलाया था।
राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजया रहाटकर की मौजूदगी में हुई सुनवाई के दौरान कई गंभीर सवाल उठाए गए। आयोग ने यह स्पष्ट किया कि किसी भी कलाकार की जिम्मेदारी केवल अपने किरदार तक सीमित नहीं होती,बल्कि उसे उस कंटेंट के सामाजिक प्रभाव के बारे में भी सोचना चाहिए,जिसका वह हिस्सा बन रहा है। विशेष रूप से ऐसे कलाकार,जिनकी लोकप्रियता व्यापक होती है,उनके कार्यों का असर समाज के बड़े वर्ग पर पड़ता है,इसलिए उनसे अधिक संवेदनशीलता और जिम्मेदारी की अपेक्षा की जाती है।
सुनवाई के दौरान आयोग ने यह भी जानने की कोशिश की कि क्या इस गाने को तैयार करते समय इसके प्रभावों पर पर्याप्त विचार किया गया था या नहीं। आयोग का मानना है कि मनोरंजन के नाम पर किसी भी प्रकार का ऐसा कंटेंट स्वीकार्य नहीं हो सकता,जो महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुँचाए या समाज में गलत संदेश दे। इस संदर्भ में आयोग ने निर्माताओं और कलाकारों को भविष्य में अधिक सतर्क रहने की सलाह भी दी।
इस पूरे मामले में संजय दत्त ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनका किसी भी रूप में महिलाओं की भावनाओं को आहत करने का कोई इरादा नहीं था। उन्होंने स्वीकार किया कि यदि इस गाने से किसी को ठेस पहुँची है,तो इसके लिए वह खेद व्यक्त करते हैं। उन्होंने आयोग के समक्ष यह भरोसा भी दिलाया कि आगे से वह अपने हर प्रोजेक्ट में इस बात का विशेष ध्यान रखेंगे कि कंटेंट पूरी तरह से सामाजिक और नैतिक मानकों के अनुरूप हो।
संजय दत्त ने इस मौके पर एक महत्वपूर्ण सामाजिक पहल की भी घोषणा की। उन्होंने कहा कि वह अपनी जिम्मेदारी को समझते हुए 50 आदिवासी लड़कियों की शिक्षा का पूरा खर्च उठाएँगे। उनके इस फैसले को एक सकारात्मक कदम के रूप में देखा जा रहा है,जो यह दर्शाता है कि विवाद के बीच भी उन्होंने समाज के प्रति अपनी जवाबदेही को गंभीरता से लिया है। उन्होंने यह भी कहा कि आगे से उनके सभी अनुबंधों में यह प्रावधान शामिल किया जाएगा कि किसी भी प्रोजेक्ट को स्वीकार करने से पहले उसकी कानूनी और नैतिक जाँच अनिवार्य रूप से की जाएगी।
इस मामले में अभिनेत्री नोरा फतेही का नाम भी सामने आया है,जिन्हें आयोग ने पेश होने के लिए बुलाया था। हालाँकि,वह उस समय देश से बाहर थीं,जिसके कारण वह सुनवाई में शामिल नहीं हो सकीं। उन्होंने आयोग से अनुरोध किया है कि उन्हें किसी अन्य तारीख पर उपस्थित होने का अवसर दिया जाए। आयोग ने उनके अनुरोध पर विचार करने का संकेत दिया है।
गौरतलब है कि इस विवाद से जुड़े कुछ अन्य लोग और प्रोडक्शन टीम के सदस्य पहले ही आयोग के सामने पेश हो चुके हैं और अपने पक्ष रख चुके हैं। यह मामला अब केवल एक गाने के बोल तक सीमित नहीं रह गया है,बल्कि यह व्यापक रूप से फिल्म उद्योग में कंटेंट की जिम्मेदारी और सामाजिक संवेदनशीलता के मुद्दे को भी सामने ला रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मामलों से यह स्पष्ट होता है कि मनोरंजन उद्योग को अब केवल व्यावसायिक दृष्टिकोण से आगे बढ़कर सामाजिक जिम्मेदारियों को भी प्राथमिकता देनी होगी। डिजिटल और सोशल मीडिया के दौर में किसी भी कंटेंट का प्रभाव बहुत तेजी से और व्यापक स्तर पर फैलता है,ऐसे में उसकी गुणवत्ता और संदेश पर विशेष ध्यान देना आवश्यक हो जाता है।
राष्ट्रीय महिला आयोग की इस कार्रवाई को एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है,जो यह संकेत देता है कि महिलाओं की गरिमा और सम्मान से जुड़े मुद्दों पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा। साथ ही,यह घटना कलाकारों और निर्माताओं के लिए एक चेतावनी भी है कि वे अपने काम के सामाजिक प्रभाव को नजरअंदाज न करें।
फिलहाल,इस मामले की सुनवाई जारी है और आने वाले दिनों में इसमें और भी पक्ष सामने आ सकते हैं,लेकिन इतना तय है कि इस विवाद ने फिल्म उद्योग में जिम्मेदारी और संवेदनशीलता को लेकर एक नई बहस को जन्म दे दिया है,जो भविष्य में कंटेंट निर्माण के तरीके को प्रभावित कर सकती है।
