नई दिल्ली,28 जनवरी (युआईटीवी)- संसद के बजट सत्र की शुरुआत से पहले लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने राष्ट्रपति के अभिभाषण के महत्व को रेखांकित करते हुए इसे केवल एक संवैधानिक परंपरा नहीं,बल्कि पूरे देश को दिशा देने वाला मार्गदर्शक संदेश बताया है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति का अभिभाषण लोकतंत्र की आत्मा को प्रतिबिंबित करता है,जहाँ जनता की आकांक्षाएँ नीति-निर्माण का आधार बनती हैं और संसद उन्हें लागू करने की जिम्मेदारी निभाती है। ओम बिरला का यह वक्तव्य ऐसे समय आया है,जब संसद का बजट सत्र देश की आर्थिक,सामाजिक और विकासात्मक प्राथमिकताओं को तय करने के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।
लोकसभा अध्यक्ष ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर साझा किए गए अपने संदेश में कहा कि संसद का बजट सत्र राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा दोनों सदनों की संयुक्त बैठक को संबोधित किए जाने के साथ शुरू हो रहा है। उन्होंने लिखा कि राष्ट्रपति का अभिभाषण केवल औपचारिकता नहीं है,बल्कि इसमें राष्ट्र की भावी नीतियों,निर्णयों और कार्यक्रमों की स्पष्ट झलक मिलती है। यह अभिभाषण आने वाले वर्ष की विकास यात्रा का सार प्रस्तुत करता है और सरकार की प्राथमिकताओं को देश के सामने रखता है।
ओम बिरला ने अपने संदेश में यह भी कहा कि राष्ट्रपति का अभिभाषण लोकतंत्र की उस मूल भावना को दर्शाता है,जिसमें जनता की उम्मीदें और आवश्यकताएँ नीति निर्धारण का आधार बनती हैं। संसद का दायित्व है कि वह इन आकांक्षाओं को कानून और योजनाओं के माध्यम से धरातल पर उतारे। उनके अनुसार,बजट सत्र के दौरान होने वाली चर्चाएँ और निर्णय न केवल सरकार की कार्यशैली को दिशा देते हैं,बल्कि देश के भविष्य की आर्थिक और सामाजिक रूपरेखा भी तय करते हैं।
लोकसभा अध्यक्ष ने इस अवसर पर एक वीडियो भी साझा किया,जिसमें भारत के केंद्रीय बजट के ऐतिहासिक सफर को दर्शाया गया है। यह वीडियो आज़ादी के बाद से लेकर वर्तमान समय तक भारतीय अर्थव्यवस्था और बजट के विकास की कहानी बयां करता है। वीडियो में बताया गया है कि जब भारत 1947 में स्वतंत्र हुआ,तब देश की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर थी। 1947-48 में पेश किया गया पहला केंद्रीय बजट लगभग 197 करोड़ रुपए का था और उस समय देश की कुल अर्थव्यवस्था करीब 2.78 लाख करोड़ रुपए के आसपास थी। उस दौर में बजट का मुख्य उद्देश्य खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना,प्रशासनिक ढाँचे को चलाना और बुनियादी ढाँचे की नींव रखना था।
वीडियो में आगे बताया गया है कि 1960 और 1970 के दशक में हरित क्रांति के दौर में बजट की प्राथमिकताएँ बदलीं। इस समय सार्वजनिक क्षेत्र,कृषि और ग्रामीण भारत में बड़े पैमाने पर निवेश किया गया। इन प्रयासों का परिणाम यह हुआ कि भारत खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भर बना और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली। यह वह दौर था,जब बजट के जरिए देश की कृषि क्षमता और ग्रामीण ढाँचे को सशक्त करने पर विशेष जोर दिया गया।
1991 के आर्थिक सुधारों के बाद भारतीय बजट की दिशा में बड़ा बदलाव आया। उदारीकरण,निजीकरण और वैश्वीकरण की नीतियों ने अर्थव्यवस्था को नई गति दी। वीडियो में बताया गया है कि 1991-92 का केंद्रीय बजट लगभग 1 लाख करोड़ रुपए का था और उस समय भारत की अर्थव्यवस्था करीब 270 अरब डॉलर तक पहुँच चुकी थी। इस दौर में बजट का फोकस बाजार आधारित सुधारों,निजी निवेश को प्रोत्साहन देने और वैश्विक अर्थव्यवस्था से जुड़ाव बढ़ाने पर रहा।
आगे चलकर वर्ष 2000-01 तक केंद्रीय बजट का आकार बढ़कर तीन से चार लाख करोड़ रुपए के बीच पहुँच गया,जबकि देश की जीडीपी लगभग 468 अरब डॉलर हो गई। 2010-11 में यह आँकड़ा और तेजी से बढ़ा,जब केंद्रीय बजट 10 से 12 लाख करोड़ रुपए के स्तर पर पहुँच गया और भारत की जीडीपी 1.67 ट्रिलियन डॉलर तक पहुँच गई। इस दौरान बुनियादी ढाँचे,सामाजिक कल्याण योजनाओं और आर्थिक विकास को संतुलित रूप से आगे बढ़ाने का प्रयास किया गया।
वीडियो में यह भी उल्लेख किया गया कि 2020-21 में वैश्विक कोरोना महामारी के बावजूद भारत ने लगभग 35 लाख करोड़ रुपए का केंद्रीय बजट पेश किया। उस कठिन समय में भी सरकार ने स्वास्थ्य,राहत पैकेज और आर्थिक पुनरुद्धार को प्राथमिकता दी। इसी वर्ष भारत की जीडीपी 2.67 ट्रिलियन डॉलर के स्तर पर रही, जो देश की आर्थिक मजबूती और संकट से उबरने की क्षमता को दर्शाती है।
वर्तमान परिदृश्य की बात करें तो भारत का केंद्रीय बजट 50 लाख करोड़ रुपए के आंकड़े को पार कर चुका है और देश की अर्थव्यवस्था 4 ट्रिलियन डॉलर से अधिक की हो गई है। यह 1947 के पहले बजट की तुलना में लगभग 25 हजार गुना वृद्धि को दर्शाता है। जहाँ आज़ादी के समय बजट का फोकस केवल बुनियादी जरूरतों को पूरा करने तक सीमित था,वहीं आज भारत का बजट भविष्य की तकनीक और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है।
आज के बजट में इंफ्रास्ट्रक्चर विकास,एक्सप्रेसवे,रेलवे नेटवर्क का विस्तार,नए एयरपोर्ट,डिजिटल इंडिया,स्टार्टअप्स को बढ़ावा,रक्षा उत्पादन,हरित ऊर्जा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस,डाटा सेंटर,सेमीकंडक्टर निर्माण,मैन्युफैक्चरिंग और आत्मनिर्भर भारत जैसे क्षेत्रों को केंद्र में रखा गया है। यह बदलाव दर्शाता है कि भारत अब केवल अपनी जरूरतें पूरी करने वाला देश नहीं,बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में नेतृत्व की भूमिका निभाने की ओर बढ़ रहा है।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला का यह संदेश न केवल बजट सत्र के महत्व को रेखांकित करता है,बल्कि यह भी बताता है कि राष्ट्रपति का अभिभाषण और बजट मिलकर देश की विकास यात्रा की दिशा तय करते हैं। यह सत्र ऐसे समय में हो रहा है,जब भारत तेज़ी से बदलती वैश्विक परिस्थितियों के बीच अपनी आर्थिक और रणनीतिक स्थिति को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। ऐसे में संसद में होने वाली चर्चाएँ और लिए गए फैसले आने वाले वर्षों के लिए भारत की राह तय करेंगे।
