मिशेल बार्नियर (तस्वीर क्रेडिट@Brajeshk_jha)

मिशेल बार्नियर की सरकार विश्वास मत में हारी,फ्रांस में राजनीतिक संकट गहराया

पेरिस,5 दिसंबर (युआईटीवी)- फ्रांसीसी प्रधानमंत्री मिशेल बार्नियर और उनके मंत्रिमंडल के खिलाफ फ्रांसीसी सांसदों ने बुधवार को अविश्वास प्रस्ताव पारित किया। यह प्रस्ताव बार्नियर की सरकार के लिए एक राजनीतिक संकट के रूप में सामने आया और इसे पारित कर दिया गया,जिससे आगामी वर्ष के बजट पर चिंताएँ बढ़ गईं। यह घटना 60 वर्षों से भी अधिक समय के बाद हुई है,जब किसी फ्रांसीसी सरकार को इस तरह से गिराया गया।

अल जजीरा ने बताया कि फ्रांसीसी संसद के 577 सीटों वाले निचले सदन में बार्नियर की मध्यमार्गी अल्पसंख्यक सरकार को हटाने के पक्ष में 331 सदस्यों ने मतदान किया। इसके बाद, यह उम्मीद जताई जा रही है कि बार्नियर जल्द ही इस्तीफा देंगे। यह घटना फ्रांस के इतिहास में पहली बार 60 से ज्यादा वर्षों में किसी सरकार को अविश्वास प्रस्ताव के द्वारा गिराने का एक ऐतिहासिक उदाहरण बनी है। इसके परिणामस्वरूप,बार्नियर की तीन महीने पुरानी सरकार को फ्रांस के पाँचवें गणराज्य के इतिहास में सबसे कम कार्यकाल वाली सरकार बनने का दुर्भाग्यपूर्ण दर्जा प्राप्त हुआ।

इस अविश्वास प्रस्ताव के पीछे का मुख्य कारण बजट से जुड़ी विवादित परिस्थितियाँ थीं। इस प्रस्ताव को पास करने के लिए विभिन्न राजनीतिक विचारधाराओं के दलों ने एकजुट होकर समर्थन दिया,जिनमें धुर दक्षिणपंथी और वामपंथी ताकतें भी शामिल थीं। इसने यह स्पष्ट कर दिया कि बार्नियर की सरकार में पर्याप्त राजनीतिक समर्थन नहीं था,जो एक स्थिर प्रशासन को चलाने के लिए आवश्यक था। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा कि उनके कार्यकाल में उथल-पुथल के बावजूद, वह 2027 तक अपना शेष कार्यकाल पूरा करेंगे। हालाँकि,मैक्रों को इस वर्ष एक बार फिर नए प्रधानमंत्री को नियुक्त करने की आवश्यकता होगी।

फ्रांसीसी मीडिया के मुताबिक,सरकार गिरने के खतरे को इमैनुएल मैक्रों ने खारिज किया और कहा कि इस समय प्रधानमंत्री के पद से उनके संभावित निष्कासन के बारे में बात करना काल्पनिक राजनीति का हिस्सा है। उन्होंने यह भी कहा कि वह फ्रांसीसी लोगों द्वारा दो बार चुने गए हैं और ऐसी चर्चाओं से लोगों को डराना उचित नहीं होगा। इसके अलावा,उन्होंने यह भी कहा कि फ्रांसीसी अर्थव्यवस्था मजबूत है और आर्थिक हालात बेहतर हो रहे हैं। हालाँकि,बार्नियर द्वारा प्रस्तावित बजट को लेकर तीव्र विरोध ने अविश्वास प्रस्ताव को उठने के लिए प्रेरित किया।

फ्रांस इस समय वित्तीय संकट और बढ़ते घाटे से जूझ रहा है,जिसके कारण देश की अर्थव्यवस्था पर गंभीर दबाव है। पिछले दो वर्षों से वृद्धि के स्तर में कोई खास सुधार नहीं हुआ है,जिससे अर्थव्यवस्था की स्थिति और अधिक चुनौतीपूर्ण हो गई है। वहीं, यूरोपीय राजनीति में भी फ्रांस को कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। यूरोपीय संघ के नेता के रूप में फ्रांस की स्थिति,विशेष रूप से यूक्रेन के लिए उसके समर्थन के बावजूद,कमजोर हुई है। इसके अतिरिक्त, फ्रांस का पारंपरिक सहयोगी जर्मनी अब राजनीतिक और आर्थिक रूप से पहले जैसा मजबूत नहीं रहा है,जो फ्रांस के लिए एक अतिरिक्त चुनौती बन चुका है।

इसके पहले,1962 में प्रधानमंत्री जॉर्जेस पोम्पीडौ को भी इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया गया था,लेकिन बाद में उन्हें राष्ट्रपति चार्ल्स डी गॉल द्वारा फिर से नियुक्त किया गया था,लेकिन अब यह संभावना कम है कि बार्नियर को वही सहानुभूति और समर्थन मिले। यूरोन्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, 73 वर्ष की आयु में बार्नियर ने प्रधानमंत्री के रूप में केवल 91 दिन तक सेवा की और उनकी सरकार ने मात्र 74 दिनों तक ही कार्य किया। यह समयसीमा फ्रांस के राजनीतिक इतिहास में एक नया और नकारात्मक मील का पत्थर बन गया है।

इस घटनाक्रम ने फ्रांस के राजनीतिक परिदृश्य को और जटिल बना दिया है,जहाँ एक ओर आर्थिक चुनौतियाँ और अंतर्राष्ट्रीय दबाव हैं,वहीं दूसरी ओर आंतरिक राजनीतिक अस्थिरता ने सरकार को मुश्किल में डाल दिया है। अब यह देखना होगा कि बार्नियर के इस्तीफे के बाद फ्रांस की राजनीति किस दिशा में जाती है और मैक्रों की सरकार किस प्रकार इन चुनौतियों का सामना करती है।