नई दिल्ली,3 मार्च (युआईटीवी)- मिडिल ईस्ट में तेजी से बिगड़ते हालात का असर अब अंतर्राष्ट्रीय खेल आयोजनों पर भी साफ दिखाई देने लगा है। एयरस्पेस बंद होने और प्रमुख ट्रांजिट हब पर उड़ानों में व्यवधान के कारण जिम्बाब्वे राष्ट्रीय क्रिकेट टीम को भारत से अपने देश लौटने में देरी का सामना करना पड़ रहा है। आईसीसी मेंस टी20 वर्ल्ड कप 2026 में अभियान समाप्त होने के बाद टीम को दुबई के रास्ते हरारे लौटना था,लेकिन बदलते भू-राजनीतिक हालात ने उनके ट्रैवल प्लान को प्रभावित कर दिया है।
कप्तान सिकंदर रजा की अगुवाई में जिम्बाब्वे ने इस विश्व कप में शानदार प्रदर्शन किया। ग्रुप स्टेज में टीम अजेय रही और पूर्व चैंपियन ऑस्ट्रेलिया तथा श्रीलंका जैसी मजबूत टीमों को हराकर सबको चौंका दिया। हालाँकि,सुपर 8 चरण में ग्रुप 1 के तीनों मुकाबलों में उन्हें हार का सामना करना पड़ा,लेकिन पूरे टूर्नामेंट में टीम ने जिस जुझारूपन और आत्मविश्वास का प्रदर्शन किया,उसने क्रिकेट जगत में उनकी छवि मजबूत की है। खिलाड़ियों और सपोर्ट स्टाफ के लिए यह अभियान गर्व और सीख दोनों लेकर आया।
टीम का आखिरी मुकाबला नई दिल्ली के प्रतिष्ठित अरुण जेटली स्टेडियम में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ खेला गया था,जहाँ उन्हें पाँच विकेट से हार झेलनी पड़ी। इसी हार के साथ उनका विश्व कप सफर समाप्त हो गया। मैच के बाद से ही टीम की निगाहें घर वापसी पर थीं,लेकिन परिस्थितियों ने उन्हें भारत में ही रुकने के लिए मजबूर कर दिया।
जिम्बाब्वे क्रिकेट ने सोमवार को जारी आधिकारिक बयान में पुष्टि की कि टीम भारत में पूरी तरह सुरक्षित है। बोर्ड ने कहा कि खिलाड़ियों और सहयोगी स्टाफ की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और वे लगातार संबंधित एजेंसियों के संपर्क में हैं। बयान में स्पष्ट किया गया कि टीम को दुबई के रास्ते घर लौटना था,लेकिन मिडिल ईस्ट में बदलते हालात की वजह से जरूरी ट्रांजिट रूट अस्थायी रूप से बाधित हो गया है। इसके चलते वैकल्पिक यात्रा व्यवस्था किए जाने तक टीम को इंतजार करना पड़ रहा है।
बोर्ड ने यह भी बताया कि वे इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल के साथ लगातार संपर्क में हैं। आईसीसी ने स्थिति को गंभीरता से लेते हुए इमरजेंसी उपाय शुरू कर दिए हैं और अंतर्राष्ट्रीय एयरलाइंस कंपनियों के साथ मिलकर नए ट्रैवल रूट तलाशने की कोशिश कर रही है। खिलाड़ियों की सुरक्षित और समय पर वापसी सुनिश्चित करने के लिए हर संभव विकल्प पर विचार किया जा रहा है। जिम्बाब्वे क्रिकेट,आईसीसी और टीम मैनेजमेंट के बीच नियमित संवाद जारी है,ताकि किसी भी तरह की अनिश्चितता को जल्द समाप्त किया जा सके।
टीम के हेड कोच जस्टिन सैमंस ने भी हालात को लेकर चिंता जताई थी। उन्होंने सुपर 8 चरण से बाहर होने के बाद कहा था कि टीम के ट्रैवल प्लान अभी स्पष्ट नहीं हैं और वे आधिकारिक पुष्टि का इंतजार कर रहे हैं। सैमंस ने यह भी कहा कि खिलाड़ियों का मनोबल ऊँचा है और वे स्थिति को समझते हुए धैर्य बनाए हुए हैं। उनके मुताबिक,टूर्नामेंट से बाहर होने की निराशा के बावजूद टीम ने जिस तरह प्रदर्शन किया,वह भविष्य के लिए सकारात्मक संकेत देता है।
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण दुबई एयरपोर्ट सहित कई प्रमुख हवाई अड्डों पर उड़ानों का संचालन प्रभावित हुआ है। यही कारण है कि कई अंतर्राष्ट्रीय उड़ानों को रद्द या डायवर्ट करना पड़ा है। खेल टीमों और अन्य यात्रियों को वैकल्पिक व्यवस्थाओं के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। जिम्बाब्वे टीम भी इसी अनिश्चितता का सामना कर रही है, हालाँकि राहत की बात यह है कि वे भारत में सुरक्षित माहौल में हैं और उन्हें किसी प्रकार की तत्काल सुरक्षा चुनौती नहीं है।
विश्व कप में जिम्बाब्वे के प्रदर्शन ने यह साबित कर दिया कि एसोसिएट और उभरती टीमें भी बड़े मंच पर प्रभाव छोड़ सकती हैं। ऑस्ट्रेलिया और श्रीलंका जैसी दिग्गज टीमों के खिलाफ जीत ने उनकी तैयारी और रणनीति को सराहा गया। हालाँकि,सुपर 8 में अनुभव की कमी और दबाव के क्षणों ने उन्हें पीछे कर दिया,लेकिन टीम ने आखिरी तक संघर्ष किया। अब जबकि टूर्नामेंट का अध्याय बंद हो चुका है,खिलाड़ियों की प्राथमिकता सुरक्षित घर वापसी है।
क्रिकेट प्रशंसक और जिम्बाब्वे के समर्थक सोशल मीडिया पर टीम के लिए शुभकामनाएँ दे रहे हैं। सभी को उम्मीद है कि जल्द ही यात्रा से जुड़ी अड़चनें दूर होंगी और खिलाड़ी अपने परिवारों के बीच लौट सकेंगे। फिलहाल टीम भारत में ही ठहरी हुई है और आधिकारिक अपडेट का इंतजार कर रही है। जैसे-जैसे स्थिति स्पष्ट होगी,बोर्ड और आईसीसी की ओर से आगे की जानकारी साझा की जाएगी।
मिडिल ईस्ट संकट ने यह दिखा दिया है कि वैश्विक घटनाक्रम किस तरह खेल जगत को भी प्रभावित कर सकता है। अंतर्राष्ट्रीय टूर्नामेंटों में भाग लेने वाली टीमों के लिए सुरक्षित और निर्बाध यात्रा कितनी अहम है,यह स्थिति उसी की याद दिलाती है। जिम्बाब्वे टीम के लिए यह इंतजार भले ही लंबा हो,लेकिन फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात उनकी सुरक्षा है,जो सुनिश्चित की जा चुकी है। अब सबकी निगाहें इस बात पर हैं कि वैकल्पिक व्यवस्था कब तक पूरी होती है और टीम कब अपने वतन की ओर रवाना हो पाती है।
