खामेनेई की मौत पर भारत में विरोध तेज (तस्वीर क्रेडिट@aajtak)

मिडिल ईस्ट संकट के बीच भारत में हाईअलर्ट,गृह मंत्रालय ने राज्यों को दिए सख्त निर्देश

नई दिल्ली,3 मार्च (युआईटीवी)- मध्य पूर्व में तेजी से बदलते हालात का असर अब भारत में भी दिखाई देने लगा है। क्षेत्रीय तनाव और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती सैन्य गतिविधियों के मद्देनज़र देशभर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। गृह मंत्रालय और विभिन्न केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को हाईअलर्ट पर रहने का निर्देश दिया है। राज्यों से कहा गया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में संदिग्ध गतिविधियों पर पैनी नजर रखें और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पर्याप्त पुलिस बल की तैनाती सुनिश्चित करें।

हालिया घटनाक्रम के बाद कुछ राज्यों में विरोध प्रदर्शन भी सामने आए हैं। अमेरिका और इजरायल की संयुक्त सैन्य कार्रवाई में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के मारे जाने की खबरों के बाद देश के अलग-अलग हिस्सों में उनके समर्थन में प्रदर्शन हुए हैं। हालाँकि,इन प्रदर्शनों में अधिकांश स्थानों पर शांति बनी रही,लेकिन सुरक्षा एजेंसियाँ किसी भी अप्रिय घटना की आशंका को देखते हुए सतर्क हैं। अधिकारियों का कहना है कि अंतर्राष्ट्रीय घटनाओं का असर घरेलू माहौल पर न पड़े,इसके लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।

सरकारी सूत्रों के अनुसार,कुछ असामाजिक तत्व सोशल मीडिया के जरिए भ्रामक सूचनाएँ फैलाने और लोगों को उकसाने की कोशिश कर रहे हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए राज्यों की पुलिस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के उपयोग को लेकर सख्त चेतावनी जारी की है। नागरिकों से अपील की गई है कि वे किसी भी तरह का आपत्तिजनक,भड़काऊ या अपुष्ट सामग्री पोस्ट,शेयर या फॉरवर्ड करने से बचें। प्रशासन का कहना है कि अफवाहें और भ्रामक संदेश माहौल को बिगाड़ सकते हैं तथा कानून-व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बन सकते हैं।

पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि भारत में हर नागरिक को शांतिपूर्ण और कानूनी तरीके से अपनी बात रखने का अधिकार है,लेकिन हिंसा,सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाना और सुरक्षा बलों के साथ टकराव किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं होगा। ऐसी घटनाएँ न केवल जान-माल का नुकसान करती हैं,बल्कि आम नागरिकों के दैनिक जीवन को भी प्रभावित करती हैं। प्रशासन का मानना है कि किसी भी प्रकार की अशांति का सीधा असर व्यापार,शिक्षा और रोजगार पर पड़ता है,जिससे समाज के सभी वर्गों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

सुरक्षा एजेंसियों ने राज्यों को विशेष रूप से संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त बल तैनात करने और खुफिया तंत्र को सक्रिय रखने का निर्देश दिया है। भीड़-भाड़ वाले स्थानों,धार्मिक स्थलों और प्रमुख सार्वजनिक परिसरों में निगरानी बढ़ा दी गई है। कई जगहों पर फ्लैग मार्च भी किए जा रहे हैं,ताकि लोगों में विश्वास बना रहे और किसी भी तरह की अफवाह पर तुरंत नियंत्रण पाया जा सके।

इसी क्रम में कर्नाटक के बांदीपुरा जिले में स्थानीय पुलिस प्रशासन ने नागरिकों से कानून-व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग की अपील की है। अधिकारियों ने कहा है कि क्षेत्र में शांति और सुरक्षा बनाए रखना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। पुलिस की ओर से जारी अपील में लोगों से कहा गया है कि वे तोड़फोड़,दंगा-फसाद,पत्थरबाजी या किसी भी प्रकार की गड़बड़ी में शामिल न हों। ऐसा करना न केवल कानून के खिलाफ है,बल्कि इससे आम जनता,व्यापारियों,विद्यार्थियों और दिहाड़ी मजदूरों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

प्रशासन ने यह भी आगाह किया है कि हिंसा और अशांति की स्थिति में शैक्षणिक संस्थानों को अस्थायी रूप से बंद करना पड़ सकता है। इसके अलावा सार्वजनिक परिवहन और अन्य आवश्यक सेवाओं में भी बाधा उत्पन्न हो सकती है। आर्थिक गतिविधियों पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभाव से स्थानीय कारोबारियों और कामगारों की आय प्रभावित हो सकती है। इसलिए सभी नागरिकों से संयम और जिम्मेदारी का परिचय देने की अपील की गई है।

कानून-व्यवस्था भंग करने की किसी भी कोशिश पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है। पुलिस का कहना है कि गैर-कानूनी गतिविधियों में शामिल तत्वों,भड़काने वालों और असामाजिक समूहों की पहचान कर उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। साइबर सेल को विशेष रूप से सक्रिय किया गया है,ताकि सोशल मीडिया पर फैलाए जा रहे भ्रामक संदेशों की निगरानी की जा सके और दोषियों को चिन्हित कर उनके खिलाफ उचित कार्रवाई हो।

केंद्रीय और राज्य सरकारें लगातार स्थिति की समीक्षा कर रही हैं। उच्चस्तरीय बैठकों के जरिए सुरक्षा रणनीति पर चर्चा की जा रही है और आवश्यकतानुसार अतिरिक्त दिशा-निर्देश जारी किए जा रहे हैं। सरकार का उद्देश्य स्पष्ट है—देश में शांति और स्थिरता बनाए रखना तथा किसी भी बाहरी या आंतरिक उकसावे को प्रभावी ढंग से नियंत्रित करना।

विशेषज्ञों का मानना है कि अंतर्राष्ट्रीय संकटों के दौरान सोशल मीडिया की भूमिका बेहद अहम हो जाती है। ऐसे समय में जिम्मेदार आचरण और सूचनाओं की सत्यता की जाँच करना हर नागरिक का कर्तव्य है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे केवल आधिकारिक स्रोतों से प्राप्त जानकारी पर ही भरोसा करें और किसी भी संदिग्ध संदेश की सूचना तुरंत स्थानीय पुलिस को दें।

मौजूदा हालात में सरकार और सुरक्षा एजेंसियों की प्राथमिकता देश की आंतरिक सुरक्षा को मजबूत बनाए रखना है। हालाँकि,भारत में स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है,लेकिन एहतियात के तौर पर उठाए गए कदम यह दर्शाते हैं कि प्रशासन किसी भी चुनौती से निपटने के लिए तैयार है। नागरिकों के सहयोग और जागरूकता से ही यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि अंतर्राष्ट्रीय तनाव का असर देश की शांति और सौहार्द पर न पड़े।