नई दिल्ली,12 मार्च (युआईटीवी)- पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव का असर अब भारत के घरेलू बाजार में भी दिखाई देने लगा है। एलपीजी आपूर्ति में संभावित बाधा की आशंकाओं के बीच देश के कई शहरों में इलेक्ट्रिक इंडक्शन चूल्हों की माँग अचानक तेजी से बढ़ गई है। स्थिति यह हो गई है कि कई क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर इंडक्शन चूल्हे पूरी तरह ‘आउट ऑफ स्टॉक’ हो गए हैं। उपभोक्ता एलपीजी सिलेंडर के संभावित संकट से बचने के लिए तेजी से वैकल्पिक कुकिंग विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं।
क्विक-कॉमर्स और ई-कॉमर्स कंपनियों के मुताबिक पिछले कुछ दिनों में इंडक्शन चूल्हों की बिक्री में असामान्य उछाल देखा गया है। लोकप्रिय डिलीवरी प्लेटफॉर्म ब्लिंकइट,ज़ेप्टो, स्विगी,इंस्टामार्ट और बिगबास्केट पर कई शहरों में इंडक्शन चूल्हे अस्थायी रूप से उपलब्ध नहीं हैं क्योंकि स्टॉक बहुत तेजी से खत्म हो गया। आम तौर पर इन प्लेटफॉर्म्स पर ऐसे घरेलू उपकरण सीमित मात्रा में रखे जाते हैं,लेकिन अचानक आई माँग ने आपूर्ति पर दबाव बढ़ा दिया है।
इलेक्ट्रिक इंडक्शन चूल्हों को लंबे समय से एलपीजी सिलेंडर का एक सुविधाजनक विकल्प माना जाता रहा है। इन्हें बिजली से चलाया जाता है और इनका उपयोग गैस की अनुपलब्धता या आपात स्थिति में किया जाता है। मौजूदा हालात में एलपीजी की आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता की खबरों के कारण लोग पहले से ही वैकल्पिक विकल्पों की तैयारी कर रहे हैं। यही वजह है कि इंडक्शन चूल्हों के साथ-साथ अन्य इलेक्ट्रिक किचन उपकरणों की बिक्री भी तेजी से बढ़ी है।
ऑनलाइन मार्केटप्लेस अमेज़न और फ्लिपकार्ट पर भी इंडक्शन चूल्हों की माँग में उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखी गई है। अमेजन इंडिया के एक प्रवक्ता के अनुसार पिछले दो दिनों में इंडक्शन चूल्हों की बिक्री में 30 गुना से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है। कंपनी का कहना है कि इस समय उपभोक्ता बड़ी संख्या में ऐसे उपकरण खरीद रहे हैं जो गैस पर निर्भरता को कम कर सकते हैं।
अमेजन के मुताबिक केवल इंडक्शन चूल्हों ही नहीं,बल्कि कई अन्य इलेक्ट्रिक किचन उपकरणों की माँग भी तेजी से बढ़ी है। उदाहरण के तौर पर राइस कुकर और इलेक्ट्रिक प्रेशर कुकर की माँग सामान्य से लगभग चार गुना अधिक हो गई है। इसके अलावा एयर फ्रायर और मल्टी-यूज इलेक्ट्रिक केतली जैसे उपकरणों की बिक्री भी लगभग दोगुनी हो गई है। इससे यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि लोग भविष्य की अनिश्चितता को देखते हुए अपने किचन को वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों के साथ तैयार कर रहे हैं।
फ्लिपकार्ट ने भी माँग में इस असाधारण वृद्धि की पुष्टि की है। कंपनी के अनुसार पिछले चार से पाँच दिनों के दौरान इंडक्शन चूल्हों की बिक्री में चार गुना तक की बढ़ोतरी हुई है। कंपनी ने यह भी बताया कि कुछ क्षेत्रों में यह वृद्धि विशेष रूप से अधिक देखी गई है। राजधानी दिल्ली, कोलकाता और उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में उपभोक्ता तेजी से इन उपकरणों की खरीद कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि उपभोक्ताओं की यह प्रतिक्रिया भविष्य में संभावित कीमतों में उतार-चढ़ाव और आपूर्ति में कमी की आशंका से जुड़ी हुई है। जब किसी आवश्यक वस्तु की उपलब्धता को लेकर अनिश्चितता पैदा होती है,तो लोग पहले से वैकल्पिक व्यवस्था करने लगते हैं। मौजूदा हालात में भी यही स्थिति देखने को मिल रही है।
दरअसल पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ा दी है। इस क्षेत्र को दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा उत्पादन क्षेत्रों में से एक माना जाता है। यहाँ किसी भी तरह का सैन्य तनाव तेल और गैस की आपूर्ति को प्रभावित कर सकता है। भारत जैसे देश,जो अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात से पूरा करते हैं,ऐसे हालात में विशेष सतर्कता बरतते हैं।
एलपीजी यानी रसोई गैस भी इसी व्यापक ऊर्जा आपूर्ति प्रणाली का हिस्सा है। यदि अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल या गैस की आपूर्ति प्रभावित होती है,तो उसका असर घरेलू बाजार पर भी पड़ सकता है। इसी संभावना को देखते हुए लोगों में चिंता बढ़ी है और वे वैकल्पिक विकल्पों की तलाश कर रहे हैं।
रिपोर्ट्स के अनुसार तेल विपणन कंपनियों ने एलपीजी वितरकों से यह भी कहा है कि वे अस्पतालों और शैक्षणिक संस्थानों जैसे आवश्यक संस्थानों को गैस आपूर्ति में प्राथमिकता दें। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी महत्वपूर्ण सेवाएँ प्रभावित न हों। हालाँकि,आम उपभोक्ताओं के लिए भी आपूर्ति बनाए रखने के प्रयास किए जा रहे हैं।
इस बीच सरकार ने संभावित संकट को देखते हुए कई एहतियाती कदम उठाए हैं। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अनुसार घरेलू एलपीजी उत्पादन में लगभग 25 प्रतिशत तक की वृद्धि की गई है। सरकार का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि देश में कुकिंग गैस की आपूर्ति निर्बाध बनी रहे और आम उपभोक्ताओं को किसी तरह की परेशानी न हो।
मंत्रालय के मुताबिक 8 मार्च को एक आदेश जारी किया गया था,जिसमें देश की रिफाइनरियों और पेट्रोकेमिकल कंपनियों को एलपीजी उत्पादन को अधिकतम स्तर तक बढ़ाने का निर्देश दिया गया। इसके साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जा रहा है कि उपलब्ध उत्पादन का बड़ा हिस्सा घरेलू उपभोक्ताओं की जरूरतों को पूरा करने में लगाया जाए।
विश्लेषकों का मानना है कि भारत में ऊर्जा आपूर्ति का ढाँचा काफी मजबूत है और सरकार समय-समय पर रणनीतिक भंडार और उत्पादन बढ़ाकर संभावित संकटों से निपटने की तैयारी करती रहती है। इसके बावजूद वैश्विक घटनाओं का असर बाजार की मानसिकता पर पड़ता है,जिसके कारण उपभोक्ता वैकल्पिक विकल्पों की ओर तेजी से बढ़ते हैं।
फिलहाल इंडक्शन चूल्हों और अन्य इलेक्ट्रिक किचन उपकरणों की माँग में आई इस अचानक वृद्धि ने बाजार को चौंका दिया है। कंपनियाँ अब तेजी से अपनी आपूर्ति बढ़ाने की कोशिश कर रही हैं,ताकि बढ़ती माँग को पूरा किया जा सके। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि पश्चिम एशिया की स्थिति और ऊर्जा बाजार की दिशा के अनुसार उपभोक्ताओं का रुझान किस तरह बदलता है।
