टेलीग्राम मैसेंजर

पायरेटेड कंटेंट पर सख्ती,केंद्र सरकार ने टेलीग्राम को जारी किया नोटिस,3,100 से अधिक चैनलों को चिन्हित किया

नई दिल्ली,12 मार्च (युआईटीवी)- भारत में ऑनलाइन पायरेसी और अवैध डिजिटल कंटेंट के खिलाफ केंद्र सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए मैसेजिंग प्लेटफॉर्म टेलीग्राम को नोटिस जारी किया है। सरकार ने प्लेटफॉर्म से उन सभी पायरेटेड यानी कॉपीराइट का उल्लंघन करने वाले कंटेंट को हटाने का निर्देश दिया है,जो अवैध रूप से फिल्मों और वेब सीरीज के रूप में साझा किए जा रहे हैं। यह कदम कई प्रमुख ओटीटी प्लेटफॉर्म्स की शिकायतों के बाद उठाया गया है,जिन्होंने आरोप लगाया था कि उनके कॉपीराइट वाले कंटेंट को टेलीग्राम पर बड़े पैमाने पर अवैध रूप से साझा किया जा रहा है।

केंद्र सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 के तहत यह नोटिस जारी किया है। मंत्रालय ने टेलीग्राम को स्पष्ट निर्देश दिया है कि वह अपने प्लेटफॉर्म पर मौजूद ऐसे सभी चैनलों और समूहों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई करे जो कॉपीराइट का उल्लंघन कर रहे हैं और अवैध रूप से फिल्में,वेब सीरीज तथा अन्य डिजिटल सामग्री साझा कर रहे हैं।

सरकार की इस कार्रवाई के पीछे कई ओटीटी प्लेटफॉर्म्स की शिकायतें हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार जियो सिनेमा और अमेजन प्राइम वीडियो जैसे प्रमुख प्लेटफॉर्म्स ने मंत्रालय को जानकारी दी थी कि उनके ओरिजिनल कंटेंट को बिना अनुमति के टेलीग्राम पर बड़ी संख्या में साझा किया जा रहा है। इन प्लेटफॉर्म्स का कहना था कि इससे न केवल उनके कॉपीराइट का उल्लंघन हो रहा है,बल्कि उन्हें आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ रहा है।

इन शिकायतों के बाद सरकार ने मामले की जाँच शुरू की। जाँच के दौरान अधिकारियों ने पाया कि टेलीग्राम पर हजारों चैनल ऐसे हैं,जो फिल्मों,वेब सीरीज और अन्य कॉपीराइट सामग्री की पायरेटेड कॉपियाँ साझा कर रहे हैं। जाँच के बाद करीब 3,142 ऐसे टेलीग्राम चैनलों की पहचान की गई,जो कथित रूप से अवैध कंटेंट साझा करने में शामिल थे।

सरकारी अधिकारियों के अनुसार इन चैनलों के माध्यम से नई रिलीज होने वाली फिल्मों और लोकप्रिय वेब सीरीज को अवैध रूप से अपलोड किया जाता है और फिर उन्हें लाखों लोगों के साथ साझा किया जाता है। इससे कंटेंट निर्माताओं और ओटीटी प्लेटफॉर्म्स को भारी आर्थिक नुकसान होता है क्योंकि दर्शक आधिकारिक प्लेटफॉर्म की बजाय मुफ्त में पायरेटेड सामग्री देख लेते हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि टेलीग्राम की कुछ तकनीकी सुविधाओं का गलत इस्तेमाल करके इस तरह की गतिविधियाँ संचालित की जा रही थीं। उदाहरण के लिए प्लेटफॉर्म पर बड़ी फाइलें साझा करने की सुविधा और उपयोगकर्ताओं की पहचान छिपाने की क्षमता के कारण कुछ लोग आसानी से पायरेटेड कंटेंट अपलोड कर रहे थे। इसके अलावा टेलीग्राम चैनलों के माध्यम से हजारों-लाखों लोगों तक एक साथ कंटेंट पहुँचाना भी आसान होता है,जिससे पायरेसी तेजी से फैलती है।

केंद्र सरकार की यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है,जब हाल के दिनों में डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर आपत्तिजनक और अवैध कंटेंट को लेकर सख्ती बढ़ाई गई है। कुछ दिन पहले ही मंत्रालय ने अश्लील कंटेंट स्ट्रीम करने के आरोप में पाँच ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर प्रतिबंध लगाया था। इन प्लेटफॉर्म्स में मूडएक्सवीआईपी,कोयल प्लेप्रो,डिजी मूवीप्लेक्स,फील और जुगनू जैसे नाम शामिल थे। सरकार का कहना था कि इन प्लेटफॉर्म्स पर ऐसे कंटेंट स्ट्रीम किए जा रहे थे,जो भारतीय कानून और डिजिटल मीडिया नियमों का उल्लंघन करते हैं।

इसके अलावा जुलाई 2025 में भी सरकार ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 25 ओटीटी प्लेटफॉर्म्स की वेबसाइट और ऐप्स को ब्लॉक करने का आदेश दिया था। इन प्लेटफॉर्म्स पर आरोप था कि वे अश्लील,अभद्र या पोर्नोग्राफिक कंटेंट का प्रसारण कर रहे थे। जिन प्लेटफॉर्म्स को ब्लॉक किया गया उनमें एएलटीटी,उल्लू, बिग शॉट्स ऐप,देसीफ्लिक्स, बूमेक्स,नवरसा लाइट,गुलाब ऐप,कंगन ऐप,बुल ऐप,जलवा ऐप,शोहिट,वाओ एंटरटेनमेंट, लुक एंटरटेनमेंट,हिटप्राइम,फेनियो,शोएक्स,सोल टॉकीज,अड्डा टीवी,हॉटएक्स वीआईपी, हुलचुल ऐप,मूडएक्स,निऑनएक्स वीआईपी,फ्यूगी,मोजफ्लिक्स और ट्रिफ्लिक्स जैसे प्लेटफॉर्म शामिल थे।

सरकार का कहना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को कानून के दायरे में रहकर काम करना होगा और उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके माध्यम से कोई अवैध या आपत्तिजनक सामग्री प्रसारित न हो। इस संबंध में सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 के तहत स्पष्ट दिशानिर्देश जारी किए गए हैं।

इन नियमों के अनुसार किसी भी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म को अश्लील, पोर्नोग्राफिक, गोपनीयता का उल्लंघन करने वाले,लैंगिक आधार पर अपमानजनक,नस्लीय या जातीय रूप से आपत्तिजनक या हिंसा और नफरत को बढ़ावा देने वाले कंटेंट को होस्ट या प्रकाशित करने की अनुमति नहीं है। इसके अलावा यदि किसी प्लेटफॉर्म पर ऐसा कंटेंट पाया जाता है,तो उसे तुरंत हटाना और संबंधित अधिकारियों को सहयोग करना भी जरूरी होता है।

डिजिटल विशेषज्ञों का मानना है कि ऑनलाइन पायरेसी आज मनोरंजन उद्योग के सामने एक बड़ी चुनौती बन चुकी है। फिल्मों और वेब सीरीज के निर्माण में करोड़ों रुपये का निवेश किया जाता है,लेकिन जब वही कंटेंट अवैध रूप से इंटरनेट पर मुफ्त में उपलब्ध हो जाता है,तो इससे निर्माताओं और प्लेटफॉर्म्स को भारी आर्थिक नुकसान होता है।

केंद्र सरकार की हालिया कार्रवाई को इसी व्यापक प्रयास का हिस्सा माना जा रहा है,जिसका उद्देश्य डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर पायरेसी और आपत्तिजनक कंटेंट को नियंत्रित करना है। सरकार का मानना है कि यदि इस तरह की गतिविधियों पर समय रहते सख्ती नहीं की गई तो इससे न केवल मनोरंजन उद्योग को नुकसान होगा,बल्कि डिजिटल इकोसिस्टम की विश्वसनीयता भी प्रभावित हो सकती है।

फिलहाल सभी की नजर इस बात पर है कि टेलीग्राम इस नोटिस के बाद क्या कदम उठाता है। यदि प्लेटफॉर्म सरकार के निर्देशों के अनुसार कार्रवाई करता है,तो बड़ी संख्या में ऐसे चैनलों और समूहों को बंद किया जा सकता है,जो अवैध रूप से फिल्मों और वेब सीरीज की पायरेटेड कॉपियाँ साझा कर रहे हैं। सरकार की यह पहल आने वाले समय में भारत में डिजिटल कंटेंट के नियमन और ऑनलाइन पायरेसी के खिलाफ अभियान को और मजबूत बना सकती है।