पीट हेगसेथ (तस्वीर क्रेडिट@AnilYadavmedia1)

पेंटागन में बड़ा फेरबदल: रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ के आदेश पर आर्मी चीफ रैंडी जॉर्ज ने छोड़ा पद,उठे सियासी सवाल

वाशिंगटन,3 अप्रैल (युआईटीवी)- अमेरिकी रक्षा प्रतिष्ठान में एक बड़ा और अचानक बदलाव सामने आया है,जिसने वॉशिंगटन के सत्ता गलियारों से लेकर अंतर्राष्ट्रीय रणनीतिक हलकों तक हलचल मचा दी है। अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने अमेरिकी आर्मी के चीफ ऑफ स्टाफ रैंडी जॉर्ज को तत्काल प्रभाव से पद छोड़ने और सेवानिवृत्त होने का निर्देश दिया है। इस आदेश के बाद जनरल जॉर्ज ने अपना पद छोड़ दिया,जिससे पेंटागन में बड़े प्रशासनिक फेरबदल के संकेत मिल रहे हैं।

पेंटागन के प्रवक्ता सीन पार्नेल ने आधिकारिक बयान जारी करते हुए कहा कि जनरल रैंडी ए. जॉर्ज आर्मी के 41वें चीफ ऑफ स्टाफ के पद से तत्काल प्रभाव से रिटायर हो रहे हैं। उन्होंने उनके दशकों के सैन्य योगदान की सराहना करते हुए कहा कि रक्षा विभाग देश के प्रति उनकी सेवाओं के लिए आभारी है और उनके भविष्य के लिए शुभकामनाएँ देता है। हालाँकि,इस बयान में उनके अचानक हटाए जाने के कारणों का कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया,जिससे इस पूरे घटनाक्रम को लेकर अटकलों का दौर तेज हो गया है।

सूत्रों के मुताबिक,यह फैसला सीधे रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ की ओर से लिया गया,जिन्होंने जनरल जॉर्ज से पद छोड़ने के लिए कहा। इसके बाद जॉर्ज ने बिना किसी सार्वजनिक विरोध के अपना पद त्याग दिया। उनकी जगह अब अमेरिकी सेना के उप प्रमुख क्रिस्टोफर लानेव को कार्यवाहक चीफ ऑफ स्टाफ नियुक्त किया गया है,जो सीनेट से स्थायी नियुक्ति की पुष्टि होने तक इस पद की जिम्मेदारी सँभालेंगे।

जनरल रैंडी जॉर्ज ने सितंबर 2023 में आर्मी चीफ का पद सँभाला था और उनके चार साल के कार्यकाल में अभी करीब डेढ़ साल बाकी थे। ऐसे में उनका अचानक पद छोड़ना सामान्य प्रक्रिया से हटकर माना जा रहा है,क्योंकि अमेरिका में इस स्तर के सैन्य पदों पर बदलाव आमतौर पर लंबी प्रक्रिया और सीनेट की निगरानी के बाद ही होते हैं। यही कारण है कि इस फैसले ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

रिपोर्ट्स के अनुसार,यह बदलाव केवल एक पद तक सीमित नहीं है। रक्षा विभाग के भीतर अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को भी हटाए जाने की खबर है,जिनमें ट्रेनिंग और चैपलेंसी से जुड़े उच्च अधिकारी शामिल हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि पेंटागन में व्यापक स्तर पर पुनर्गठन की प्रक्रिया चल रही है,जो आने वाले समय में और भी बदलाव ला सकती है।

यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है,जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी सेना की भूमिका और उसकी तैयारियों पर लगातार नजर रखी जा रही है। ऐसे संवेदनशील समय में आर्मी चीफ का अचानक पद छोड़ना रणनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

इस फैसले पर अमेरिकी राजनीति में भी तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। कांग्रेस से जुड़े नेता यूजीन विंडमैन ने इस कदम की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि जनरल जॉर्ज एक उत्कृष्ट सार्वजनिक सेवक और सैनिक हैं,जिन्हें अनुचित तरीके से किनारे कर दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि यह निर्णय राजनीतिक दबाव में लिया गया है और राष्ट्रपति ऐसे अधिकारियों को प्राथमिकता दे रहे हैं,जो उनकी नीतियों से पूरी तरह सहमत हों।

विंडमैन ने पेंटागन के नेतृत्व पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि अगर किसी पर सवाल उठाए जाने चाहिए,तो वह रक्षा मंत्री हैं,न कि वे अधिकारी जिन्होंने अपने पूरे करियर में ईमानदारी और समर्पण के साथ देश की सेवा की है। उनके इस बयान ने इस मुद्दे को और अधिक राजनीतिक रंग दे दिया है।

इसी बीच,रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ हाल ही में एक अन्य विवाद में भी घिर चुके हैं। उन्होंने एक अपाचे हेलीकॉप्टर क्रू से जुड़ी घटना में हस्तक्षेप करते हुए सस्पेंशन हटाने का आदेश दिया था। इसके बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा था, “कोई सजा नहीं,कोई जाँच नहीं—देशभक्तों,आगे बढ़ो।” इस बयान ने भी रक्षा मंत्रालय के भीतर अनुशासन और निर्णय प्रक्रिया को लेकर बहस छेड़ दी थी।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के फैसले सेना के भीतर मनोबल और नेतृत्व संरचना पर असर डाल सकते हैं। आर्मी चीफ का पद अमेरिका में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है, जो सेना की ट्रेनिंग,ऑपरेशनल तैयारी और रणनीतिक दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाता है। ऐसे में इस पद पर अचानक बदलाव से सैन्य ढाँचे में अस्थिरता की आशंका भी जताई जा रही है।

हालाँकि,कुछ विश्लेषकों का यह भी मानना है कि यह कदम पेंटागन में नई रणनीतिक प्राथमिकताओं को लागू करने के लिए उठाया गया हो सकता है। बदलते वैश्विक परिदृश्य और उभरती सुरक्षा चुनौतियों के मद्देनजर अमेरिकी प्रशासन अपने सैन्य नेतृत्व में बदलाव कर रहा हो,ताकि नई नीतियों को प्रभावी ढंग से लागू किया जा सके।

फिलहाल,पेंटागन ने इस फैसले के पीछे के कारणों को सार्वजनिक नहीं किया है,जिससे यह मामला और रहस्यमय बन गया है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या इस मुद्दे पर और खुलासे होते हैं या नहीं और सीनेट इस नियुक्ति प्रक्रिया में क्या रुख अपनाती है।

जनरल रैंडी जॉर्ज का अचानक पद छोड़ना केवल एक प्रशासनिक बदलाव नहीं है,बल्कि यह अमेरिकी रक्षा व्यवस्था और राजनीति के बीच जटिल संबंधों को भी उजागर करता है। इस फैसले के दूरगामी प्रभाव पड़ सकते हैं,खासकर ऐसे समय में जब वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य तेजी से बदल रहा है और अमेरिका कई मोर्चों पर चुनौतियों का सामना कर रहा है।