नई दिल्ली,26 मार्च (युआईटीवी)- देशभर में पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति को लेकर फैली आशंकाओं के बीच केंद्र सरकार ने स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी है। सरकार ने कहा है कि देश में कहीं भी ईंधन की कमी नहीं है और सभी रिटेल पेट्रोल पंप सामान्य रूप से काम कर रहे हैं। सरकार के इस बयान से आम जनता को राहत मिली है,क्योंकि पिछले कुछ दिनों में कुछ इलाकों में अफवाहों के चलते लोगों ने घबराकर ज्यादा मात्रा में पेट्रोल-डीजल खरीदना शुरू कर दिया था। अधिकारियों के अनुसार,यह स्थिति अब पूरी तरह नियंत्रण में है और सप्लाई चेन सुचारू रूप से संचालित हो रही है।
सरकार ने स्पष्ट किया कि देश की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त मात्रा में पेट्रोलियम उत्पादों का भंडार मौजूद है। सभी रिफाइनरियाँ उच्च क्षमता पर काम कर रही हैं और कच्चे तेल की आपूर्ति भी बाधित नहीं हुई है। यही वजह है कि कहीं भी ईंधन की वास्तविक कमी नहीं देखी गई। ऊर्जा मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक,सप्लाई और डिमांड के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए लगातार निगरानी की जा रही है,ताकि किसी भी तरह की अनियमितता को तुरंत दूर किया जा सके।
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि कुछ स्थानों पर अफवाहों ने लोगों को प्रभावित किया और उन्होंने आवश्यकता से अधिक ईंधन खरीदने की कोशिश की। इससे कुछ समय के लिए स्थानीय स्तर पर दबाव जरूर बना,लेकिन सरकार और तेल कंपनियों की त्वरित कार्रवाई के कारण स्थिति जल्द ही सामान्य हो गई। सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करें।
ईंधन आपूर्ति के साथ-साथ सरकार ने प्राकृतिक गैस के क्षेत्र में भी स्थिति स्पष्ट की है। घरेलू उपभोक्ताओं के लिए पीएनजी (पाइप्ड नेचुरल गैस) और वाहनों के लिए सीएनजी की आपूर्ति 100 प्रतिशत बनाए रखी जा रही है। सरकार का कहना है कि आम लोगों की जरूरतों को प्राथमिकता दी जा रही है,ताकि उनके दैनिक जीवन पर कोई असर न पड़े। वहीं औद्योगिक और व्यावसायिक उपभोक्ताओं को औसत खपत के लगभग 80 प्रतिशत तक गैस सप्लाई दी जा रही है,जिससे उद्योगों का कामकाज जारी रह सके और आर्थिक गतिविधियाँ प्रभावित न हों।
सरकार ने इस दौरान एक महत्वपूर्ण नीति कदम भी उठाया है। ‘नेचुरल गैस एंड पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स डिस्ट्रीब्यूशन ऑर्डर, 2026’ को अधिसूचित किया गया है,जिसका उद्देश्य पूरे देश में पाइपलाइन नेटवर्क के विस्तार को तेज करना है। इस नए फ्रेमवर्क के तहत पाइपलाइन बिछाने की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और समयबद्ध बनाया जाएगा। इसके अलावा, जमीन से जुड़ी समस्याओं को भी कम करने के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं,जिससे परियोजनाओं में देरी न हो।
पीएनजी कनेक्शन के विस्तार में भी सरकार ने उल्लेखनीय प्रगति का दावा किया है। एक ही दिन में 110 से अधिक भौगोलिक क्षेत्रों में 9,046 नए पीएनजी कनेक्शन जारी किए गए,जो एक रिकॉर्ड माना जा रहा है। इस उपलब्धि में इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड और गेल जैसी प्रमुख कंपनियों की अहम भूमिका रही है। ये कंपनियाँ उपभोक्ताओं को पीएनजी अपनाने के लिए विभिन्न प्रोत्साहन योजनाएँ भी चला रही हैं।
राजधानी नई दिल्ली में इस दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। दिल्ली विकास प्राधिकरण ने 24 घंटे पाइपलाइन बिछाने की अनुमति दे दी है और इसके लिए सड़क मरम्मत शुल्क को भी माफ कर दिया गया है। इससे न केवल काम में तेजी आएगी,बल्कि लागत भी कम होगी और अधिक से अधिक लोगों तक पीएनजी कनेक्शन पहुँचाना आसान होगा।
प्रक्रियाओं को सरल और तेज बनाने के लिए सरकार ने संबंधित एजेंसियों को सख्त निर्देश भी दिए हैं। पेट्रोलियम एंड एक्सप्लोसिव सेफ्टी ऑर्गनाइजेशन को निर्देश दिया गया है कि वे सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन से जुड़े आवेदनों का निपटारा 10 दिनों के भीतर करें। वहीं पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस विनियामक बोर्ड ने यह सुनिश्चित करने के लिए कहा है कि आवासीय स्कूल,छात्रावास और सामुदायिक रसोई जैसे स्थानों को प्राथमिकता के आधार पर 5 दिनों के भीतर पीएनजी कनेक्शन उपलब्ध कराए जाएं।
एलपीजी की आपूर्ति को लेकर भी सरकार ने बड़े फैसले लिए हैं। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए कमर्शियल एलपीजी का आवंटन 50 प्रतिशत तक बढ़ा दिया गया है। इस अतिरिक्त आपूर्ति को विशेष रूप से होटल,ढाबे,रेस्टोरेंट और प्रवासी मजदूरों के लिए 5 किलो वाले सिलेंडर के रूप में उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके अलावा,राज्यों को 10 प्रतिशत अतिरिक्त एलपीजी देने की पेशकश भी की गई है,बशर्ते वे उपभोक्ताओं को एलपीजी से पीएनजी की ओर स्थानांतरित करने में तेजी दिखाएं।
ऊर्जा क्षेत्र में पारदर्शिता और अनुशासन बनाए रखने के लिए सरकार ने सख्ती भी दिखाई है। आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत देशभर में एक ही दिन में 2,700 से अधिक छापेमारी की गई। इस दौरान 2,000 से ज्यादा गैस सिलेंडर जब्त किए गए। अब तक 650 से अधिक एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं और 155 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। यह कार्रवाई इस बात का संकेत है कि सरकार किसी भी प्रकार की कालाबाजारी या अनियमितता को बर्दाश्त नहीं करेगी।
एलपीजी की माँग को संतुलित करने के लिए सरकार ने वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों पर भी जोर दिया है। राज्यों को 48,000 किलोलीटर अतिरिक्त केरोसिन आवंटित किया गया है,ताकि जरूरतमंद वर्गों को राहत मिल सके। इसके साथ ही कोयला मंत्रालय को निर्देश दिए गए हैं कि वे छोटे और मध्यम उपभोक्ताओं के लिए कोयले की आपूर्ति बढ़ाएँ,जिससे उन्हें ऊर्जा के अन्य विकल्प मिल सकें।
इस बीच,नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। बैठक में ‘इमिग्रेशन, वीजा, फॉरेनर्स रजिस्ट्रेशन एंड ट्रैकिंग’ (आईवीएफआरटी) योजना को 31 मार्च के बाद भी अगले पाँच वर्षों के लिए बढ़ाने को मंजूरी दी गई। इस योजना पर लगभग 1,800 करोड़ रुपये खर्च किए जाएँगे। इसका उद्देश्य देश में आने वाले विदेशी नागरिकों की निगरानी और प्रबंधन को और अधिक प्रभावी बनाना है।
इसके अलावा,सरकार ने देश में हवाई कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए भी बड़े कदम उठाए हैं। ‘चैलेंज मोड’ के तहत 100 नए एयरपोर्ट बनाने की योजना को मंजूरी दी गई है,जिन पर औसतन 100 करोड़ रुपये प्रति एयरपोर्ट खर्च होंगे। यह पहल देश के दूरदराज और कम विकसित क्षेत्रों को हवाई नेटवर्क से जोड़ने में मदद करेगी और आर्थिक विकास को गति देगी।
इसी कड़ी में संशोधित उड़ान योजना के तहत 200 आधुनिक हेलिपैड विकसित करने की भी घोषणा की गई है। इससे क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को बढ़ावा मिलेगा और आपातकालीन सेवाओं,पर्यटन तथा व्यापारिक गतिविधियों को नई दिशा मिलेगी।
केंद्र सरकार ने एक साथ कई मोर्चों पर सक्रियता दिखाते हुए यह स्पष्ट कर दिया है कि देश में ऊर्जा आपूर्ति पूरी तरह सुरक्षित और स्थिर है। साथ ही,दीर्घकालिक सुधारों के जरिए ऊर्जा क्षेत्र को अधिक मजबूत,पारदर्शी और आधुनिक बनाने की दिशा में भी ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। सरकार की इन पहलों से न केवल वर्तमान स्थिति को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी, बल्कि भविष्य में किसी भी संभावित संकट से निपटने की क्षमता भी बढ़ेगी।
