भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर

फ्रांस में जी-7 विदेश मंत्रियों की बैठक में शामिल होंगे डॉ. एस. जयशंकर,यूक्रेन युद्ध से लेकर वैश्विक शासन सुधार तक अहम मुद्दों पर होगी चर्चा

नई दिल्ली,26 मार्च (युआईटीवी)- भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर गुरुवार से शुक्रवार तक फ्रांस के दौरे पर रहेंगे,जहाँ वे जी-7 देशों के विदेश मंत्रियों की महत्वपूर्ण बैठक में भाग लेंगे। यह बैठक ऐसे समय में आयोजित हो रही है,जब दुनिया कई जटिल भू-राजनीतिक चुनौतियों का सामना कर रही है,जिनमें यूक्रेन में जारी युद्ध, समुद्री सुरक्षा,आपूर्ति श्रृंखला की स्थिरता और वैश्विक शासन प्रणाली में सुधार जैसे मुद्दे प्रमुख हैं। जयशंकर की यह यात्रा भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका और बहुपक्षीय मंचों पर उसकी सक्रिय भागीदारी का एक और उदाहरण मानी जा रही है।

विदेश मंत्रालय से मिली जानकारी के अनुसार,यह दौरा फ्रांस के यूरोप और विदेश मामलों के मंत्री जीन-नोएल बैरोट के आमंत्रण पर हो रहा है। इस दौरान जयशंकर फ्रांस के एब्बे डेस वॉक्स-डी-सेर्ने नामक स्थान पर आयोजित जी-7 विदेश मंत्रियों की बैठक में शामिल होंगे। इस बैठक में न केवल जी-7 देशों के प्रतिनिधि भाग लेंगे,बल्कि भारत सहित कई गैर-जी-7 देशों को भी आमंत्रित किया गया है,जो इस मंच की व्यापकता और सहयोग की भावना को दर्शाता है।

यह बैठक आगामी जी-7 नेताओं के शिखर सम्मेलन की तैयारी के लिहाज से बेहद अहम मानी जा रही है,जो जून में आयोजित होने वाला है। अधिकारियों के अनुसार,विदेश मंत्रियों के स्तर पर होने वाली यह चर्चा नेताओं के बीच होने वाली वार्ताओं की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इसमें उन विषयों पर गहन विचार-विमर्श होगा,जो वैश्विक स्थिरता और विकास के लिए निर्णायक हैं।

बैठक का सबसे प्रमुख एजेंडा यूक्रेन में जारी युद्ध रहेगा। फरवरी 2022 से शुरू हुआ रूस-यूक्रेन युद्ध अब भी वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर रहा है। इस संदर्भ में मंत्रियों के बीच युद्ध की वर्तमान स्थिति,उसके मानवीय प्रभाव और भविष्य की रणनीति पर चर्चा होगी। इसके अलावा यूक्रेन के पुनर्निर्माण को लेकर भी विशेष सत्र आयोजित किया जाएगा,जिसमें परमाणु सुरक्षा,मानवीय डीमाइनिंग (बारूदी सुरंग हटाना) और पुनर्निर्माण के लिए वित्तीय संसाधनों की व्यवस्था जैसे मुद्दों पर विचार किया जाएगा।

इस प्रक्रिया में यूरोपीय पुनर्निर्माण और विकास बैंक जैसी संस्थाओं की भूमिका पर भी जोर दिया जाएगा,जो युद्धग्रस्त क्षेत्रों में निवेश और विकास को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यूक्रेन के पुनर्निर्माण के लिए वैश्विक सहयोग और वित्तीय समर्थन अत्यंत आवश्यक होगा और जी-7 जैसे मंच इस दिशा में ठोस पहल कर सकते हैं।

बैठक में समुद्री सुरक्षा और आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। हाल के वर्षों में समुद्री मार्गों पर बढ़ते तनाव और बाधाओं ने वैश्विक व्यापार को प्रभावित किया है। ऐसे में सुरक्षित और निर्बाध समुद्री मार्ग सुनिश्चित करना सभी देशों के लिए प्राथमिकता बन गया है। इस संदर्भ में समुद्री नेविगेशन की स्वतंत्रता और अंतर्राष्ट्रीय नियमों के पालन को लेकर चर्चा होने की संभावना है।

इसके साथ ही,वैश्विक शासन प्रणाली में सुधार का मुद्दा भी एजेंडे में शामिल है। वर्तमान अंतर्राष्ट्रीय संस्थाएँ और व्यवस्थाएँ कई बार नई चुनौतियों का सामना करने में पर्याप्त सक्षम नहीं दिखतीं। ऐसे में जी-7 देश और उनके साझेदार मिलकर एक आधुनिक और अधिक प्रभावी वैश्विक शासन ढाँचे पर विचार करेंगे। इसमें बहुपक्षीय संस्थाओं को मजबूत बनाने और विभिन्न देशों की संप्रभुता को सुरक्षित रखते हुए सहयोग के नए मॉडल विकसित करने पर जोर दिया जाएगा।

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के प्रवक्ता पास्कल कॉन्फावरेक्स ने इस बैठक के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह हाल ही में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान हुई अनौपचारिक चर्चाओं के बाद हो रही है और आगामी शिखर सम्मेलन के लिए एक महत्वपूर्ण तैयारी का चरण है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि इस बैठक के दौरान ठोस और क्रियान्वयन योग्य परिणामों पर विशेष जोर दिया जाएगा।

इस बैठक की एक खास बात यह भी है कि इसमें भारत,दक्षिण कोरिया,सऊदी अरब, ब्राज़ील और यूक्रेन जैसे देशों को आमंत्रित किया गया है,जो जी-7 की आउटरीच नीति को दर्शाता है। यह पहल दर्शाती है कि वैश्विक चुनौतियों का समाधान केवल सीमित समूहों के जरिए संभव नहीं है,बल्कि इसके लिए व्यापक अंतर्राष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता है। भारत जैसे देशों की भागीदारी इस प्रक्रिया को अधिक समावेशी और प्रभावी बनाती है।

डॉ. जयशंकर की इस यात्रा के दौरान विभिन्न देशों के विदेश मंत्रियों के साथ द्विपक्षीय बैठकें भी होने की संभावना है। इन बैठकों में भारत अपने राष्ट्रीय हितों,क्षेत्रीय सुरक्षा,आर्थिक सहयोग और वैश्विक मुद्दों पर अपने दृष्टिकोण को स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करेगा। भारत पहले ही ‘वैश्विक दक्षिण’ की आवाज के रूप में अपनी पहचान मजबूत कर चुका है और इस बैठक में भी वह विकासशील देशों के मुद्दों को उठाने की कोशिश करेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के बहुपक्षीय मंचों पर भारत की सक्रियता उसकी कूटनीतिक ताकत को और मजबूत करती है। भारत न केवल एक उभरती हुई आर्थिक शक्ति है,बल्कि वह वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। ऐसे में जी-7 जैसी बैठकों में उसकी भागीदारी अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर उसके प्रभाव को बढ़ाने में मदद करती है।

फ्रांस और भारत के बीच पहले से ही मजबूत रणनीतिक साझेदारी है,जो रक्षा,ऊर्जा, जलवायु परिवर्तन और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग जैसे क्षेत्रों में फैली हुई है। जयशंकर की इस यात्रा से दोनों देशों के बीच संबंधों को और मजबूती मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा,यह दौरा भारत-यूरोप संबंधों को भी नई दिशा दे सकता है।

फ्रांस में होने वाली यह जी-7 विदेश मंत्रियों की बैठक वैश्विक राजनीति के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकती है। इसमें लिए गए फैसले और चर्चाएँ आने वाले समय में अंतर्राष्ट्रीय संबंधों की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएँगी। भारत की भागीदारी इस बात का संकेत है कि वह न केवल क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक स्तर पर भी एक प्रमुख और जिम्मेदार शक्ति के रूप में उभर रहा है।