बांग्लादेश क्रिकेट टीम (तस्वीर क्रेडिट@JaikyYadav16)

भारत में टी20 वर्ल्ड कप खेलने से बांग्लादेश का इनकार,आईसीसी के फैसले के बाद बढ़ा विवाद

नई दिल्ली, 23 जनवरी (युआईटीवी)- टी20 वर्ल्ड कप को लेकर अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में एक बड़ा विवाद सामने आ गया है। बांग्लादेश ने आधिकारिक तौर पर भारत में टी20 वर्ल्ड कप खेलने से इनकार कर दिया है। यह फैसला बांग्लादेश सरकार के खेल सलाहकार आसिफ नजरुल और राष्ट्रीय क्रिकेट टीम के खिलाड़ियों के साथ हुई अहम बैठक के बाद लिया गया। इस निर्णय के साथ ही आईसीसी,बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड और भारतीय क्रिकेट प्रशासन के बीच तनाव और गहरा हो गया है।

बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (बीसीबी) के अध्यक्ष अमीनुल इस्लाम बुलबुल ने इस फैसले की पुष्टि करते हुए कहा कि आईसीसी ने भारत से बाहर मैचों के आयोजन की उनकी माँग को पूरी तरह खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि बोर्ड ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए अपने मैच भारत के बजाय श्रीलंका में कराने का अनुरोध किया था,लेकिन आईसीसी ने इसे स्वीकार नहीं किया। इसके बाद बांग्लादेश के पास भारत में खेलने से इनकार करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा।

अमीनुल इस्लाम बुलबुल ने आईसीसी और वैश्विक क्रिकेट प्रशासन पर तीखा हमला करते हुए कहा कि विश्व क्रिकेट की स्थिति को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। उनके मुताबिक,क्रिकेट की लोकप्रियता लगातार घट रही है और आईसीसी के फैसले इस गिरावट को और तेज कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि “200 मिलियन लोगों वाले देश को इस तरह से अलग-थलग कर दिया गया है। क्रिकेट ओलंपिक में जा रहा है,लेकिन अगर हमारे जैसे देश वहाँ प्रतिनिधित्व नहीं कर पा रहे हैं,तो यह आईसीसी की असफलता को दर्शाता है।”

बीसीबी अध्यक्ष ने साफ शब्दों में कहा कि बांग्लादेश टी20 वर्ल्ड कप खेलना चाहता है,लेकिन भारत में खेलने को लेकर उनका रुख पूरी तरह स्पष्ट है। उन्होंने कहा, “हम विश्व कप खेलना चाहते हैं,लेकिन भारत में नहीं खेलेंगे। हम आईसीसी के साथ बातचीत जारी रखेंगे और अपने अधिकारों के लिए लड़ते रहेंगे।” उनके इस बयान से यह संकेत मिलता है कि बांग्लादेश फिलहाल अपने फैसले पर अडिग है,हालाँकि वह आईसीसी के साथ संवाद के दरवाजे बंद नहीं करना चाहता।

इस विवाद की जड़ में हाल के महीनों में सामने आए कई मुद्दे बताए जा रहे हैं। बीसीबी अध्यक्ष ने कहा कि मुस्तफिजुर रहमान से जुड़ा मामला अकेला कारण नहीं है,बल्कि आईसीसी बोर्ड मीटिंग में कई ऐसे फैसले लिए गए,जिनसे यह संदेश गया कि भारत इस मुद्दे पर एकमात्र निर्णय निर्माता की भूमिका में है। उन्होंने दावा किया कि बोर्ड मीटिंग में कुछ “चौंकाने वाली कॉलें” आईं,जिससे बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड को यह महसूस हुआ कि उनकी चिंताओं को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है।

इससे एक दिन पहले, 21 जनवरी को इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल ने बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड को भारत में टी20 वर्ल्ड कप खेलने या न खेलने पर अंतिम फैसला करने के लिए केवल एक दिन का अल्टीमेटम दिया था। आईसीसी ने साफ कर दिया था कि अगर बांग्लादेश ने तय समयसीमा के भीतर अपना रुख स्पष्ट नहीं किया,तो वह अपने स्तर पर फैसला लेने के लिए स्वतंत्र होगी। इसी बोर्ड मीटिंग में बीसीबी की वेन्यू बदलने की माँग को भी औपचारिक रूप से खारिज कर दिया गया था।

बांग्लादेश का तर्क रहा है कि भारत में उनके खिलाड़ियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएँ हैं। बीसीबी का कहना है कि हालिया घटनाक्रम और माहौल को देखते हुए खिलाड़ियों और सहयोगी स्टाफ की सुरक्षा सुनिश्चित करना उनके लिए प्राथमिकता है। इसी वजह से उन्होंने श्रीलंका जैसे तटस्थ और अपेक्षाकृत सुरक्षित देश में अपने मैच कराने की माँग रखी थी। हालाँकि,आईसीसी ने इस माँग को स्वीकार नहीं किया और मौजूदा शेड्यूल में किसी तरह के बदलाव से इनकार कर दिया।

इस फैसले के बाद अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट जगत में कई सवाल उठने लगे हैं। एक ओर जहाँ आईसीसी टूर्नामेंट की स्थिरता और आयोजन की निरंतरता को प्राथमिकता देने की बात कर रही है,वहीं बांग्लादेश का कहना है कि सदस्य देशों की सुरक्षा चिंताओं और संप्रभु फैसलों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। बीसीबी अध्यक्ष के बयान से यह भी संकेत मिलता है कि बांग्लादेश खुद को इस पूरे मामले में अलग-थलग और दबाव में महसूस कर रहा है।

फिलहाल यह साफ नहीं है कि बांग्लादेश के इस इनकार के बाद आईसीसी क्या रुख अपनाएगी। नियमों के मुताबिक,किसी टीम के टूर्नामेंट से हटने की स्थिति में आईसीसी वैकल्पिक टीम को मौका दे सकती है या फिर बांग्लादेश पर अनुशासनात्मक कार्रवाई भी संभव है। हालाँकि,बीसीबी का कहना है कि वह अभी भी बातचीत के जरिए समाधान निकालने के लिए तैयार है।

भारत में टी20 वर्ल्ड कप से जुड़ा यह विवाद केवल खेल तक सीमित नहीं रह गया है,बल्कि इसमें राजनीति,सुरक्षा और अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट प्रशासन की भूमिका जैसे कई पहलू जुड़ गए हैं। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि आईसीसी,बांग्लादेश और अन्य सदस्य देश इस गतिरोध को कैसे सुलझाते हैं और क्या बांग्लादेश का फैसला बदलता है या फिर टी20 वर्ल्ड कप एक बड़ी टीम के बिना ही आगे बढ़ता है।